इन प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों को हिंदू धर्म में खास माना गया है. कौन से भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल आइए जानते हैं.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Holy Places in India: भारत की संस्कृति पहचान धार्मिक स्थलों से है. हमारा भरत देश धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं से एक सूत्र में बंधा है. यहां के लोगों में धर्म पर गहरी आस्था है. इसकी बानगी देश भर में देखी जा सकती है, जहां प्रदेश के हर छोड़े-बड़े गांव, कस्बे से लेकर बड़े महानगरों तक धार्मिक स्थल विद्यमान हैं. हर धार्मिक स्थल का एक अलग ही महत्व और इतिहास है. इन धार्मिक स्थलों के चमत्कार की कहानी आज भी लोगों का आश्चर्य करती हैं. देश की चारों दिशाओं में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां दर्शन करना श्रेष्ठ फलदायी माना जाता है. आइए जानते हैं, उन धार्मिक स्थलों के बारे में जहां आपको जाने के बाद सकारात्मक ऊर्जा का आभास होगा.
ये हैं भारत के कुछ धार्मिक स्थल
अयोध्या राम मंदिर –
पौराणिक ग्रंथों में अयोध्या को मोक्षदायिनी 7 पुरी में से एक बताया गया है. अयोध्या श्रीराम की जन्मभूमि है. अयोध्या राम मंदिर का इतिहास 11वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, इसे मूल रूप से भगवान राम को समर्पित करने के लिए बनाया गया था. यह मंदिर सदियों तक पूजा का एक प्रतिष्ठित स्थान रहा, जो भक्ति और आस्था का आज भी प्रतीक है. इस मंदिर का इतिहास जगजाहिर है, 1528 में यहां बाबर ने मस्जिद बनाने के आदेश दिए थे जिसे औरंगजेब ने पूरा किया.
1992 तक ये मस्जिद विद्यमान रही और रामलला की पूजा एक चूबतरे नुमा मंदिर में होती थी. इसके बाद मंदिर के अस्तित्व को लेकर संघर्ष शुरू हुआ और आखिरकार आयोध्या में 22 जनवरी 2024 को वहां श्रीराम का भव्य नया मंदिर का उद्घाटन हुआ, जहां रामलला की मूर्ति विराजमान हैं.
वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू –
जम्मू-कश्मीर में कटरा की पहाड़ियों में स्थित माता का ये मंदिर आस्था और श्रद्धा की एक बहुत बड़ी मिसाल है. मान्यता है कि देवी वैष्णो यहां पर बनी एक गुफा में आकर छिपी थीं और उन्होंने एक राक्षस का वध किया था. वैष्णो देवी मंदिर का मुख्य आकर्षण गुफा में रखे तीन पिंड है.
मैहर माता के मंदिर-
मध्य प्रदेश में अभी हाल ही में मैहर जिला बना है, जिसे एक प्राचीन तीर्थस्थल के रूप में वर्षों से जाना जाता है. यहां माँ शारदा की भी भव्य मूर्ति स्थापित है. मैहर को शक्तिपीठ माना जाता है, जहां माँ सती के शरीर के अंग गिरने के बाद शक्तिपीठ स्थापित हुए. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में माँ सती का हार गिरने से इसका नाम “मैहर” पड़ा, जिसका अर्थ है “माँ का हार”. मैहर धाम की खोज आल्हा और उदल नामक दो भाइयों को माना जाता है, जिन्होंने त्रिकूट पर्वत पर इस मंदिर की थी. मैहर को मध्य प्रदेश की संगीत नगरी के रूप में भी जाना जाता है. यहीं गोलामठ मंदिर, ओइला मंदिर और बड़ी माई मंदिर जैसे अन्य मंदिर भी विद्यमान हैं.
त्रिपुर सुंदरी का प्राचीन मंदिर-
मध्य प्रदेश जबलपुर जिले में शहर से लगभग 14 किमी. दूर तेवर स्थित त्रिपुर सुंदरी का प्राचीन मंदिर है. भेड़ाघाट रोड स्थित हथियागढ़ में स्थित इस मंदिर में नवरात्र पर्व पर भक्तों का विशेष रूप से मेला भरता है. 11वीं शताब्दी में कल्चुरी राजा कर्ण देव ने इसका निर्माण कराया था. इसकी पुष्टि यहां एक शिलालेख से होती है. यहां नौ दिनों तक शहर के अलावा आसपास के शहरों के लोग भी पूजन करने पहुंचते हैं. इस मंदिर का इतिहास कल्चुरिकाल से जोड़ा जाता है. यहां तीन रूप राज राजेश्वरी, ललिता और महामाया की प्रतिमा एक मूर्ति में दिखाई पड़ती हैं. ऐसी मान्यता है कि राजा कर्ण देव के सपने में आदिशक्ति का रूप त्रिपुरी दिखाई दी थीं. तब राजा कर्ण ने इस प्रतिमा की स्थापना कराई थी. यह प्रतिमा शिला के सहारे अधलेटी अवस्था में पश्चिम दिशा की ओर मुहं करके है. मंदिर में माता महाकाली, माता महालक्ष्मी और माता सरस्वती की विशाल मूर्तियां स्थापित हैं.
अमरनाथ, श्रीनगर –
अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ माना गया है, क्योंकि माना जाता है कि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था. यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है. सावन के पवित्र महीने में यह स्थल श्रद्धालुओं से भरा रहता है.
जगन्नाथ मंदिर, पुरी –
ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर हिन्दुओं के चार धाम में से एक माना जाता है. बद्रीनाथ , द्वारका, पुरी और रामेश्वरम ये चार धाम हैं, जहां दर्शन मात्र से व्यक्ति हर पाप धुल जाते हैं और वह जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है. हर साल जून महीने में होने वाला इस मंदिर का रथ यात्रा उत्सव विश्व प्रसिद्ध है.
वेंकटेश्वर मंदिर, तिरुपति –
आंध्रप्रदेश का तिरुपति मंदिर भगवान विष्णु के वेंकटेश्वर रूप की पूजा होती है. ये हिन्दू मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला और शिल्प कला का अदभूत उदाहरण है. इस मंदिर से जुड़ी मान्यता यह है कि प्रभु विष्णु ने कुछ समय के लिए तिरुमाला के पास स्थित स्वामी पुष्करणी सरोवर के किनारे निवास किया था. भक्त यहां आकर अपने बाल दान करते हैं.
काशी विश्वनाथ, वाराणसी –
ये 12 ज्योतिर्लिंग में से एक माना जाता है, भगवान शिव पार्वती मां के कहने पर उन्हें शादी के बाद कैलाश के लेकर काशी आ गए. काशी में आने के बाद वहं विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के रुप में स्थापित हो गए.
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