कार्तिक के दूसरे सोमवार को चंद्रमौलीश्वर रूप में महाकाल सवारी पर निकले. शहरवासियों ने उनका स्वागत किया. भगवान महाकाल को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में तीसरे स्थान पर गिना जाता है.
By : DB News Update
Edited By : सुप्रिया
Mahakal Sawari 2024: द्वादश ज्योतिर्लिंगों में तीसरे नंबर पर विराजित भगवान महाकाल की सावन और भादो के साथ-साथ कार्तिक और अगहन माह में भी सवारी निकलती है. कार्तिक माह के दूसरे सोमवार भगवान महाकालेश्वर ने चंद्रमौलीश्वर रूप में प्रजा के हाल-चाल जाने. इस दौरान भगवान महाकाल का उज्जैन की सड़कों पर पलक पावडे बिछाकर स्वागत किया गया. सवारी को गार्ड ऑफ़ ऑनर भी दिया गया.
ये रहे आकर्षण का केन्द्र
- -सवारी निकलने के पूर्व सोमवार सायं 04 बजे महाकालेश्वर मंदिर के सभामण्डप में भगवान का विधिवत पूजन अर्चन किया गया.
- – सवारी जैसे ही मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, पालकी में विराजित भगवान को पुलिस के जवानों द्वारा सलामी दी गई.
- – कार्तिक माह की दूसरी सवारी विधिवत पूजन- अर्चन के बाद महाकालेश्वर मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होते हुए रामघाट क्षिप्रा तट पहुंची. जहां पर भगवान श्री महाकालेश्वर का मां क्षिप्रा के जल से अभिषेक किया गया.
- – सवारी रामघाट से गणगौर दरवाजा, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिेक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, छत्री चौक, गोपाल मंदिर पहुची. गोपाल मंदिर पर परम्परानुसार पूजन किया गया. जिसके पश्यात सवारी पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होते हुए महाकालेश्वर मंदिर पहुंची.
14 नवम्बर को रात्रि 11 बजे हरिहर मिलन सवारी
वैकुंठ चतुर्दशी शनिवार 14 नवम्बर 2024 को रात्रि 11 बजे हरिहर मिलन की सवारी निकाली जावेगी. जो महाकालेश्वर मंदिर से गोपाल मंदिर जायेगी व पूजन पश्चात पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर वापस आएगी. इस दौरान महाकालेश्वर मंदिर और गोपाल मंदिर के पुजारी द्वारा विधि विधान के साथ शिव और विष्णु का पूजन किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि वैकुंठ चतुर्दशी पर भगवान विष्णु को भगवान शिव सृष्टि का भार सौंप देते हैं.

