चैत्र नवरात्रि पर घटस्थापना से पहले कुछ पवित्र वस्तुओं को घर में लाने से वास्तु दोष और कन्या पूजन के बिना माता की पूजा अधूरी मानी जाती है. अष्टमी-नवमी कन्या पूजन के लिए श्रेष्ठ है.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Chaitra Navratri 2026: मां दुर्गा की अराधना करने की तारीख नजदीक आ गई है. चैत्र नवरात्रि पर घट स्थापना के साथ प्रारंभ हो जाएगी. यह पर्व 19 मार्च से 27 मार्च 2026 तक जारी रहेगा. इन दिनों मां दुर्गा को वह कौन सी वस्तुएं हैं? जो मां दुर्गा को अत्यंत प्रिय है. उन्हें नवरात्रि शुरू होने से पहले अपने घर लाना चाहिए. वहीं नवरात्रि के बाद अष्टमी और नवमीं के दिन कन्या पूजन करने का विधान बताया गया है. कन्य पूजन से भक्ति करने वाले व्यक्ति की सारी परेशानी दूर हो जाती हैं. चैत्र नवरात्रि पर घट स्थापना, पवित्र वस्तु घर कब लाएं और कन्या पूजन कब करें? ऐसी सभी जानकारी इस लेख में दी जा रही हैं? आइए जानते हैं…
नवरात्रि पर घर लाएं ये वस्तु
- -सोने या चांदी का सिक्का खरीदना काफी शुभ है. यदि सिक्के पर देवी लक्ष्मी या भगवान गणेश की छवि अंकित हो यह और भी शुभ होता है.
- – देवी दुर्गा और मां लक्ष्मी दोनों को कमल के फूल प्रिय हैं. नवरात्रि के दौरान घर में कमल का फूल लाना या कमल पर बैठी देवी लक्ष्मी की तस्वीर रखना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
- – देवी दुर्गा को सोलह आभूषण अर्पित करना बेहद जरूरी है. बाजार से लाल चुनरी, चुड़ियां, बिंदी और अन्य आभूषण लाकर घर के मंदिर में स्थापित करें.
- – घटस्थापना के लिए पीतल या तांबे का कलश लाना अत्यंत शुभ माना जाता है. मिट्टी के कलश के स्थान पर पीतल या तांबे का नया कलश लाना पवित्रता का प्रतीक माना जाता है.
- – देवी सरस्वती और भगवान कृष्ण को मोर का पंख प्रिय होता है, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का काम करता है. नवरात्रि से पहले तीन मोर पंख लाकर उन्हें मंदिर या घर के मुख्य द्वार पर रखें.
घटस्थापना मुहूर्त
द्विस्वभाव मीनलग्न प्रातः 06:54 से प्रातः 07:50 तक
मिथुनलग्न प्रातः 11:24 से दोपहर 01:38 तक
शुभ चौघड़िया प्रातः 06:54 से प्रातः 08:05,
चर-लाभ-अमृत का चौघड़िया प्रातः वकः 84 से दोपहर 03:32 तक
अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:11 से 12:59 तक रहेगा.
नवरात्रि पर पंचक का साया
19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि शुरू होगी. वहीं पंचक 16 मार्च 2026 से शुरू हो रहे हैं जो शाम 6.14 से शुरू होंगे जो 21 मार्च 2026 तक रहेंगे. ऐसे में नवरात्रि की घटस्थापना से लेकर तृतीया तिथि तक पंचक का साया रहेगा.
चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन कब है?
2026 चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 26 मार्च और नवमी 27 मार्च को है. देवी पुराण के अनुसार अष्टमी और नवमी तिथियों को शक्ति और ऊर्जा की तिथियां माना गया है. इसलिए इस दिन कन्या पूजन करने का विधान है. कन्या पूजन करने से माता प्रसन्न होती हैं और रक्षा प्रदान करती हैं.
कन्या पूजन का मुहूर्त
अष्टमी कन्या पूजन मुहूर्त नवमी कन्या पूजन मुहूर्त
सुबह 6.18 – सुबह 7.50 सुबह 6.17 – सुबह 10.54
सुबह 10.55 – दोपहर 1.59 दोपहर 12.27 – दोपहर 1.59
कन्या पूजन क्यों किया जाता है
कुमार्यः पूजिताः सम्यक् पूजिता जगदम्बिका. अर्थात – जो व्यक्ति कन्याओं की श्रद्धा से पूजा करता है, वह वास्तव में जगदंबा की ही पूजा करता है.देवी भागवत पुराण और मार्कण्य पुराण के अनुसार नवरात्रि में जो व्यक्ति कन्या पूजन करता है उसे माता रानी की कृपा प्राप्त होती है.
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि छोटी कन्याओं में दुर्गा का वास होता है इसलिए कन्या की पूजा करना देवी की पूजा के समान माना जाता है. मान्यता है इससे नवरात्रि के 9 दिन की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है. कन्या पूजन
आयु देवी का स्वरूप
2 वर्ष कुमारी
3 वर्ष त्रिमूर्ति
4 वर्ष कल्याणी
5 वर्ष रोहिणी
6 वर्ष कालिका
7 वर्ष चंडिका
8 वर्ष शांभवी
9 वर्ष दुर्गा
10 वर्ष सुभद्रा
कन्या पूजन विधि
- घट स्थापना स्थल पर कन्या पूजन से पहले घर और पूजा स्थान को साफ करें.
- मां दुर्गा की पूजा करके कन्याओं को घर बुलाएं.
- एक छोटे बालक (भैरव) को आमंत्रित करें.
- सबसे पहले घर आई कन्याओं का सम्मानपूर्वक स्वागत करें.
- कन्याओं को साफ-स्वच्छ स्थान पर बैठने की व्यवस्था करें.
- एक थाल या लोटे में पानी लेकर कन्याओं के पैर धोएं. यह सम्मान और सेवा का प्रतीक माना जाता है.
- कन्याओं के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक लगाएँ और उनके चरणों में फूल अर्पित करें.
- कन्याओं को देवी का रूप मानकर लाल चुनरी या रुमाल अर्पित करें.
- कन्याओं को श्रद्धा पूर्वक भोजन कराएं.
- भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा, फल, मिठाई या छोटे उपहार दे.
- कन्याओं का चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें और सम्मानपूर्वक विदा करें.
कन्या पूजन में क्या गिफ्ट दें
- लाल चुनरी या रूमाल
- चूड़ियाँ
- बिंदी और कुमकुम
- पेन-कॉपी या पढ़ाई का सामान
- फल और मिठाई
- नारियल और दक्षिणा
- छोटे खिलौने
कन्या पूजन का भोग
चैत्र नवरात्रि पर कन्याओं को पूड़ी, काले चने और हलवा या खीर का भोग लगाने का विधान है. यदि कन्याएं यह प्रसाद ग्रहण कर लेती हैं तो मां दुर्गा का आशिर्वाद प्राप्त होता है.
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