हिंदू धर्म में 16 संस्कारों में मुंडन संस्कार भी एक पवित्र संस्कार है, जिसके लिए शुभ मुहूर्त का इंतजार रहता है. क्योंकि इस संस्कार में बच्चों का भविष्य छिपा रहता है.
Source : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Mundan Muhurat 2026: हिंदू धर्म में 16 संस्कारों में मुंडन संस्कार भी एक पावन पवित्र संस्कार है, जिसका धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से विशेष महत्व है. ऐसी मान्यता है कि जन्म के समय शिशु के बाल पिछले जन्म के संस्कारों के प्रतीक माने जाते हैं, इन अशुद्धियों को हटाने और शुद्धता प्राप्त करने के लिए मुंडन संस्कार किया जाता है.
मुंडन संस्कार करने से बच्चे के लंबे, स्वस्थ और मजबूत बाल भी निकलना प्रारंभ हो जाते हैं, जिन्हें शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार मुंडन संस्कार हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करने का विधान बताया गया है. क्योंकि इसका असर बच्चे के जीवन पर सीधे तौर पर पड़ता है. आइए जानें साल 2026 में मुंडन कब-कब कर सकते हैं.
मुंडन मुहूर्त 2026
21 जनवरी 2026 सुबह 07:14 – सुबह 2.49, 22 जनवरी
29 जनवरी 2026 सुबह 07:32 – दोपहर 1.57
11 फरवरी 2026 सुबह 10:53 – सुबह 7.03, 12 फरवरी
12 फरवरी 2026 सुबह 07:02 – दोपहर 1.43
18 फरवरी 2026 शाम 05:00 – रात 9.16
26 फरवरी 2026 सुबह 06:49 – दोपहर 12.12
27 फरवरी 2026 सुबह 10:49 – रात 10.35
6 मार्च 2026 सुबह 09:30 – शाम 5.56
16 मार्च 2026 सुबह 09:43 – सुबह 6.30, 17 मार्च
25 मार्च 2026 सुबह 06:20 – दोपहर 1.52
27 मार्च 2026 सुबह 10:09 – सुबह 6.17, 28 मार्च
03 अप्रैल 2026 सुबह 08:45 – सुबह 6.09, 4 अप्रैल
13 अप्रैल 2026 सुबह 05:58 – सुबह 1.11, 14 अप्रैल
23 अप्रैल 2026 सुबह 05:48 – रात 8.52
01 मई 2026 सुबह 05:40 – रात 10.55
04 मई 2026 सुबह 09:58 – सुबह 5.27, 5 मई
11 मई 2026 दोपहर 03:27 – रात 1.29, 12 मई
17 जून 2026 सुबह 05:22 – रात 9.14
24 जून 2026 सुबह 05:24 – सुबह 5.24, 25 जून
25 जून 2026 05:24 – शाम 4.30
02 जुलाई 2026 09:28 – सुबह 5.26, 3 जुलाई
03 जुलाई 2026 05:27 – सुबह 11.23
09 जुलाई 2026 10:40 – दोपहर 2.56
15 जुलाई 2026 11:53 – रात 9.47
20 जुलाई 2026 19:10 – सुबह 4.04, 21 जुलाई
मुंडन के लिए जुलाई के बाद नहीं है शुभ मुहूर्त
समस्त मांगलिक कार्य जैसे मुंडन, विवाह आदि सभी चातुर्मास में वर्जित होते हैं. नववर्ष में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को है. इस दिन से चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी. यही वजह है कि 20 जुलाई के बाद मुंडन के लिए शुभ मुहूर्त नहीं है.
मुंडन की शुभ तिथियां – द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी मुंडन संस्कार के लिए शुभ मानी जाती है. माघ और फाल्गुन मास में बच्चों का मुण्डन संस्कार करना सबसे शुभ माना जाता है.
मुंडन का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, शिशु के सिर पर उगने वाले बालों को पिछले जन्म के कर्मों से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में मुंडन कराने और बालों का विसर्जन करने से बच्चे को पूर्व जन्म के कर्मों से मुक्ति मिल जाती है और नई शुरुआत की अनुमति मिलती है. इसके साथ ही यह माना जाता है कि मुंडन संस्कार से जातक को दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. वहीं मुंडन का एक वैज्ञानिक कारण भी है. मुंडन के बाद सिर की त्वचा आसानी से सूर्य की रोशनी के संपर्क में आ जाती है, जिससे त्वचा को विटामिन डी अवशोषित करने में सहायता मिलती है. इसके साथ ही मुंडन के द्वारा बच्चे की गर्भावस्था की अशुद्धियां भी दूर हो जाती हैं. ऐसे में मुंडन संस्कार बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी माना गया है.
मुंडन संस्कार विधि
मुंडन संस्कार, शुभ मुहूर्त में घर के आंगन में तुलसी के पास या फिर किसी धार्मिक स्थल पर भी किया जा सकता है. मुंडन से पहले हवन करवाया जाता है. मां बच्चे को अपनी गोद में लेकर बैठती हैं. इस दौरान मुंह पश्चिम दिशा की ओर रखा जाता है. इसके बाद बच्चे के बाल उतारकर, सिर को गंगाजल से धुलवाया जाता है. इसके बाद सिर पर हल्दी का लेप लगाया जाता है.
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