श्री राम वनवास के दौरान जबलपुर के पिपरिया रामघाट आने के प्रमाणिक मान्यता के मिले थे सुबूत. भगवान श्रीराम ने नर्मदा नदी पार कर दंडकारण्य वन के लिए प्रस्थान किया था.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP Ram Van Gaman Path: हिंदू धर्म के आराध्य भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने जिस ऐतिहासिक मार्ग से चलकर अपने 14 वर्षों के वनवास की यात्रा पर निकले थे, जो अयोध्या से शुरू होकर श्रीलंका तक जाता है. उसे राम वन पथ गमन नाम दिया गया है. इस मार्ग का कुछ हिस्सा मध्य प्रदेश की धरती से भी होकर गुजरता है. भगवान राम के रज कमल को एक मार्ग के रूप में स्मृतियों में संजोए रखने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट लांच किया गया था. जिससे स्मृतियां अक्षुण्य बनी रहें. इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा राम वन पथ गमन नाम का मेगा प्रोजेक्ट बनाया गया था.लेकिन वह प्रोजेक्ट न जाने किस अंधेरी कोठरी में गुम हो गया. पता ही नहीं चल पा रहा है.
जबलपुर में भी भगवान राम के आने के मिले थे प्रमाण
मध्य प्रदेश सरकार भगवान श्रीराम के चरण जहां-जहां पड़े थे, उन स्थानों की खोज करने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए थे. लिहाजा जिला प्रशासन की तरफ से जबलपुर के नर्मदा तट के विभिन्न स्थानों की खोज की गई थी और उसके प्रमाण जबलपुर (Jabalpur) में नर्मदा के किनारे मिले थे. ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने यहां से नर्मदा नदी को पार कर दण्डकारण्य वन के लिए प्रस्थान किया था.
जबलपुर में रामजी के चरण रज नर्मदा किनारे रामघाट पिपरिया में मिले थे, जो जबलपुर जिले की शहपुरा तहसील में है.
ऐसी है मान्यता?
अभी कुछ दिनों पूर्व ही जबलपुर के तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना जो वर्तमान में प्रदेश सरकार के जनसंपर्क आयुक्त हैं, उन्होंने खुद रामघाट पिपरिया का दौरा किया था. उन्होंने वहां के मंदिरों के दर्शन कर अधिकारियों को निर्देश दिए कि इसके विकास की कार्ययोजना तैयार कराएं. क्योंकि ग्राम पंचायत मगरमुंहा के आश्रित गांव रामघाट पिपरिया को रामायण सर्किट से जोड़ना था. ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री राम वनवास के दौरान पिपरिया रामघाट आए थे और नर्मदा नदी को पार कर दण्डकारण्य वन के लिए प्रस्थान किया था. भारत सरकार के श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास की भगवान श्री राम गमन स्थल सूची में क्रमांक-57 में भी रामघाट पिपरिया का उल्लेख किया है.
रामघाट पिपरिया में श्री राम की चरण पादुका विराजमान
ग्राम रामघाट पिपरिया के राम मंदिर परिसर में भगवान श्रीराम की चरण पादुका विराजमान है. यहां शिवलिंग भी स्थापित किया गया है और हनुमान जी का मंदिर भी इस परिसर में है. रामघाट पिपरिया के नर्मदा नदी के दूसरे तट पर राम कुंड भी स्थित है. इस स्थान को भगवान श्री राम वन पथ गमन के मेगा प्रोजेक्ट में भी शामिल करने की योजना थीङ
यहां से गुजरना था मार्ग
मध्य प्रदेश में चित्रकूट, सतना, पन्ना, जबलपुर, मंडला, शहडोल और अमरकंटक जैसे कई स्थलों को इस पथ से जोड़ने का प्लॉन बनाया गया था. क्योंकि भगवान श्रीराम वनवास के दौरान वर्षों तक इस क्षेत्र में भ्रमण किया था. इस मार्ग के माध्यम से प्राचीन स्थलों का सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण, पुलों का निर्माण और पर्यटन सुविधाओं का विकास किए जाने का उद्देश्य छिपा था. ताकि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को संजोया जा सके.

