वक्फ (संशोधन) बिल आज यानी बुधवार (2 अप्रैल) को लोकसभा में चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया जाएगा.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Waqf Amendment Bill in Parliament : वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के मैनेजमेंट और एडमिनिस्ट्रेशन में सुधार को लेकर तैयार किया गया यह बिल आज लोकसभा में चर्चा और पारित करने के लिए लाया जाने वाला है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में इस बिल पर बहस के लिए 8 घंटे का समय आवंटित किया है. हालांकि, विपक्ष इस बिल पर बहस के लिए 10 घंटे के समय की मांग की है. पूरे विपक्षी दल ने इस बिल को असंवैधानिक कहते हुए इसकी निंदा की है.
बता दें कि पूरे देश में चर्चा के विषय वक्फ (संशोधन) बिल को आज यानी बुधवार (2 अप्रैल) को संसद में लोकसभा के पटल पर चर्चा और पारित करने के लिए लाया जाएगा, जिसके लेकर पूरा विपक्ष एकजुट हो गया है. सभी विपक्षी पार्टियों ने वक्फ (संशोधन) बिल को लेकर मंगलवार (1 अप्रैल) की शाम में एक बैठक की. इस बैठक के बाद पूरे विपक्ष ने सर्वसम्मति से लोकसभा में इस बिल पर चर्चा करने और संसद में इसके विरुद्ध वोट करने का फैसला लिया.
RSP के एनके प्रेमचंद्रन ने एनडीटीवी से कहा, “विपक्षी की सभी पार्टी के सदस्यों ने यह फैसला किया है कि वह संसद में इस बिल को लेकर होने वाली चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लेंगे और इस बिल के संसद में इस बिल के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष के तौर पर मौजूद रहेंगे.”
विपक्ष के अन्य सभी संशोधनों को सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया
वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों के प्रावधान को लेकर रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य एन.के. प्रेमचंद्रन द्वारा प्रस्तुत एक संशोधन पर भी मत विभाजन हुआ. उनका संशोधन 231 के मुकाबले 288 मतों से अस्वीकृत हो गया. विपक्ष के अन्य सभी संशोधनों को सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया. वहीं, सरकार की ओर से पेश तीन संशोधनों को सदन की स्वीकृति मिली और विधेयक में खंड 4ए तथा 15ए जोड़े गए. जिस समय विधेयक पर मतदान हो रहा था, सदन के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लोकसभा में मौजूद नहीं थे.
विधेयक से किसी का नुकसान नहीं
चर्चा का जवाब देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार समाज के हर वर्ग का ध्यान रखती है. उन्होंने विपक्षी सदस्यों के इन आरोपों पर आपत्ति जताई कि देश में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि इस विधेयक से किसी का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने आज के दिन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस विधेयक से करोड़ों-करोड़ मुस्लिम महिलाएं और बच्चे लाभान्वित होंगे.
विधेयक भारतीय मुसलमानों के हित में
चर्चा के दौरान सत्तापक्ष के सांसदों ने विधेयक को अत्यंत महत्वपूर्ण और सुधारात्मक कदम बताते हुए इसे भारतीय मुसलमानों के हित में बताया. सरकार ने दावा किया कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जिम्मेदारी बढ़ाएगा, जिससे वक्फ संपत्तियों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा और उनका दुरुपयोग रोका जा सकेगा.
असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक का विरोध किया
वहीं, विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर कई आपत्तियां उठाईं। विपक्ष का कहना था कि यह वक्फ बोर्डों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप करेगा और मुसलमानों के धार्मिक मामलों में सरकार का अतिक्रमण होगा. एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक का विरोध किया और अपनी बात रखने के बाद अंत में विधेयक की प्रति फाड़ दी.
सीएए लागू होने के बाद किसी भी मुस्लिम की नागरिकता नहीं गई
इससे पहले, चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह भारत सरकार का कानून है और इसे सभी को स्वीकार करना होगा. उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह समाज में भ्रम फैला रहे हैं और मुसलमानों को डराकर उनका वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रहे हैं. शाह ने इस दौरान नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर भी विपक्ष के दावे खारिज किए. उन्होंने कहा कि सीएए लागू होने के बाद किसी भी मुस्लिम की नागरिकता नहीं गई है और अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला जैसे नेता चुनाव जीतकर लौटे हैं, जो बताता हैं कि स्थिति में सुधार हुआ है. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद कम हुआ है और विकास और पर्यटन बढ़े हैं.

