राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई, ओबीसी वर्ग के आने वाले रामनिवास रावत ग्वालियर-चंबल संभाग में अच्छी पकड़ रखते हैं. वे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
Source : DB News Update
By-DB News update| Edited by -Supriya
भोपाल. शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, श्री राजेन्द्र शुक्ल, पंचायत और ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, सांसद श्री वी.डी. शर्मा और महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय भी उपस्थित थीं। शपथ विधि समारोह का संचालन मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा ने किया।
डॉक्टर मोहन यादव सरकार का छोटा-सा विस्तारीकरण हो चुका है, जिसमें कांग्रेस से छह बार चुनाव जीतने वाले वरिष्ठ विधायक रामनिवास रावत को मंत्री बनाया गया है.
छह बार के विधायक हैं रामनिवास रावत
श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट से लगातार चुनाव जीतकर आ रहे रामनिवास रावत को मंत्री बनाया गया है. रामनिवास रावत छह बार के विधायक हैं. राजनीति के जानकार इस पूरी रणनीति के जरिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) कांग्रेस को बड़ा संदेश भी देना चाहती है. वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा के मुताबिक रामनिवास रावत को बीजेपी में शामिल होने के बाद भाजपा को 29 सीटों पर लाभ मिला है.
ओबीसी वर्ग के आने वाले रामनिवास रावत ग्वालियर-चंबल संभाग में अच्छी पकड़ रखते हैं. वे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं. वरिष्ठ पत्रकार सुनील जैन के मुताबिक लोकसभा चुनाव के दौरान जब कांग्रेस के दो विधायकों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा तो निश्चित रूप से बीजेपी को इसका लाभ पहुंचा है. इसी का इनाम अब वरिष्ठ विधायक को मंत्री बना कर दिया गया है.
उपचुनाव के पहले रामनिवास रावत की बीजेपी में बनी बड़ी जगह
विजयपुर विधानसभा सीट पर भविष्य में उपचुनाव होना है. इसके पहले रामनिवास रावत को बीजेपी सरकार में मंत्री बनाकर उनका कद काफी बढ़ा दिया गया है, ताकि चुनाव के दौरान उन्हें फायदा मिल सके. रामनिवास रावत को मंत्री बनाकर कांग्रेस के विधायकों यह संदेश दे दिया गया है कि बीजेपी सरकार में वरिष्ठ विधायकों की क्या अहमियत है.
दिग्विजय सिंह सरकार में रहे मंत्री
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में एक प्रमुख ओबीसी चेहरा रावत, दिग्विजय सिंह सरकार में मंत्री थे। इस क्षेत्र के उन कुछ लोगों में से थे, जिन्होंने मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया का अनुसरण करते हुए भाजपा में प्रवेश नहीं किया था। यही कारण है कि जब वे 30 अप्रैल को विजयपुर में एक सार्वजनिक बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका था, जिस दिन कांग्रेस सांसद राहुल गांधी राज्य में प्रचार कर रहे थे।
रावत ने जीत में निभाई भूमिका
एक हफ़्ते बाद मुरैना में लोकसभा चुनाव हुए और माना जाता है कि रावत के बीजेपी में शामिल होने से भगवा खेमे की जीत में अहम भूमिका निभाई। विजयपुर श्योपुर जिले में है लेकिन मुरैना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। भाजपा में शामिल होने के बाद रावत ने दावा किया कि कांग्रेस ने उन्हें पहचान या सम्मान नहीं दिया। भाजपा में शामिल होने के दो महीने बाद उन्हें मोहन यादव मंत्रिमंडल के 32वें सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
शपथ ग्रहण समारोह में भी नाटकीय रहा
शपथ ग्रहण समारोह किसी की कल्पना से भी ज़्यादा नाटकीय रहा। सुबह 9:03 बजे रावत ने राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली। उन्होंने ‘राज्य का मंत्री’ कहने की बजाय ‘राज्य मंत्री’ कहकर शपथ ली। इससे उनके समर्थकों में हड़कंप मच गया और उन्होंने अपनी निराशा जाहिर की। पंद्रह मिनट बाद रावत ने फिर से शपथ ली, इस बार कैबिनेट मंत्री के तौर पर। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री यादव, उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट मौजूद थे।

