भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी को 16 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी. इस दिन लोग कान्हा के लिए झूला सजाते हैं. कई जगह लड्डू गोपाल की सजावट की जाती है.
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Laddu gopal makeup competition: कृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर श्रद्धालु-भक्तों में बड़ा ही उल्लास देखने को मिल रहा है. भक्तों ने श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम का भाव प्रकट करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं. तभी तो जहां भी लड्डू गोपाल सजावट को लेकर प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं, वहां श्रीकृष्ण प्रेम के साथ-साथ राष्ट्रप्रेम की झलक भी देखने को मिल रही है. कृष्ण के बाल स्वरूप को राष्ट्र भक्ति का चोला ओढ़ा दिया गया है. जिनका दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. ऐसे दृश्य सबसे ज्यादा वहां देखने को मिल रहे हैं, जहां भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में शक्ति (स्त्री) सबसे ज्यादा आराधना करने में जुटी हुई हैं. ऐसा ही एक दृष्य संस्कारधानी जाबालिपुरम् में देखने को मिला. जहां भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को विविध रंगों में सजाया गया था. अवसर था लड्डू गोपाल की सजावट प्रतियोगिता का. बतादें कि मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित नरसिंह मंदिर शास्त्रीब्रिज गोरखपुर में लड्डू गोपाल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था. जहां भगवान श्रीकृष्ण को अनेक स्वरूपों में सजाया गया था. महिलाओं ने अपने घर पर विराजमान लड्डू गोपाल का श्रृंगार इस प्रतियोगिता के अवसर पर किया, जिसमें भगवान के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन हुए.
श्रीकृष्ण के दिखे अनेक रंग
लड्डू गोपाल सजावट प्रतियोगिता में भगवान श्रीकृष्ण के अनेक रंग देखने को मिले. किसी प्रतिभागी ने बाल स्वरूप कृष्ण को मोर के पंख से सजाया था तो किसी ने कदंब की डाली में बैठा दिया था. वासुदेव के सर पर बैठे कृष्ण शेषनाग की छाया में यमुना नदी पार कर रहे थे, ऐसा चित्रण भी करने का प्रयास प्रतिभागियों द्वारा लड्डू गोपाल प्रतियोगिता के अवसर पर करने की कोशिश की गई. जगद्गुरु श्रीनृसिंह पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज प्रतिभागिता में शामिल भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन किए और उनके सजावट की सराहना की.
बता दें कि जन्माष्टमी श्रीकृष्ण के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है. ऐसी मान्यता है कि इसी दिन द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. इस साल शनिवार, 16 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी.
जन्माष्टमी के दिन लोग व्रत रखकर रात्रि में कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं पूजा-पाठ करते हैं. साथ ही इस दिन श्रीकृष्ण का विशेष श्रृगांर भी किया जाता है. जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल का झूला सजाने की भी परंपरा है. रात में कृष्ण जन्मोत्सव के बाद कान्हा को झूला भी झुलाया जाता है. अगर आप वास्तु अनुसार कान्हा का झूला सजाएंगे तो इससे घर पर सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा. जानें वास्तु अनुसार कैसे सजाएं कान्ह का झूला.
इस दिशा का रखें ध्यान-
वास्तु अनुसार कृष्ण का झूला उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में रखना शुभ रहता है.माना जाता है कि इस दिशा में देवता वास करते हैं. साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि झूले में कान्हा की मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रहे.
झूले के रंग का भी रखें ध्यान-
वास्तु शास्त्र के मुताबिक पीला, सफेद, हल्का नीला या फिर सुनहरे रंग का झूला आप जन्माष्टमी पर लगा सकते हैं. ये रंग शुभ माने जाते हैं.
धातु का भी रखें ध्यान-
जन्माष्टमी पर कान्हा का झूला लकड़ी का हो तो यह शुभ है. साथ ही आप चांदी या पीतल जैसी धातुओं से निर्मित झूला भी बनवा सकते हैं या खरीद सकते हैं. लेकिन स्टील या लोहे का झूला लेने से बचें.
ऐसे करें सजावट-
तुलसी, गेंदे का फूल, गुलाब फूल, आम के पत्ते आदि से झूले की सजावट करें और तोरण लगाएं. रेशमी कपड़े, मोती, मणि, मोरपंख आदि से भी झूले की सवाजट की खूबसूरती बढ़ा सकते हैं
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