जी20 शिखर सम्मेलन में अमेरिका को नजरअंदाज करते हुए शामिल देशों ने जलवायु परिवर्तन पर एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया है, जिसकी भाषा पर अमेरिका ने आपत्ति जताई है.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
G20 Summit: भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी ने जोहान्सबर्ग में आयोजिति G20 समिट में शनिवार को भाषण देते हुए कहा कि पुराने डेवलपमेंट मॉडल ने रिसोर्स छीने, इसे बदलना जरूरी है. उन्होंने वैश्विक चुनौतियों पर भारत का नजरिया दुनिया के सामने रखा. मोदी ने पुराने डेवलपमेंट मॉडल के मानकों पर दोबारा सोचने की अपील की.
इस अवसर पर पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और दुनियाभर के नेताओं से मुलाकात की. इस दौरान ब्राजीली राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा को उन्होंने गले लगा लिया.
दूसरी ओर अफ्रीकी राष्ट्रपति रामफोसा ने 2026 की अध्यक्षता किसी ‘खाली कुर्सी’ को सौंपने की बात कही है. 2026 में G20 की अध्यक्षता अमेरिका को मिलनी है, लेकिन अब तक कोई अमेरिकी ऑफिशियल समिट में शामिल नहीं हुआ है.
संयुक्त घोषणा पत्र जारी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल देशों ने जलवायु परिवर्तन पर एक ऐतिहासिक घोषणापत्र पारित किया है. अमेरिका के विरोध और बहिष्कार के बाद बावजूद सर्वसम्मति से जी20 देशों के समूह की ओर से घोषणापत्र पर सहमति बनी. जी20 समूह की ओर से उठाए गए इस कदम को परंपरा के हटकर बताया जा रहा है, क्योंकि जी20 में शामिल दुनिया भर के नेताओं ने जलवायु परिवर्तन को लेकर अमेरिका की अनुपस्थिति में एक संयुक्त घोषणापत्र पारित किया.
अमेरिका का बहिष्कार
जी20 शिखर सम्मेलन का अमेरिका ने बहिष्कार किया है. इसके पीछे मेजबान दक्षिण अफ्रीका के साथ अमेरिका के राजनयिक मतभेद को कारण बताया गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा कि अमेरिका ने संयुक्त घोषणापत्र के शब्दों पर आपत्ति जताई है. हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर पारित घोषणापत्र पर फिर से बातचीत नहीं की जा सकती है. राष्ट्रपति रामफोसा के दिए इस बयान से वॉशिंगटन और प्रिटोरिया के बीच जारी तनाव को उजागर किया है.
शुरुआत में पारित कराया गया घोषणापत्र
शिखर सम्मेलन में अपना संबोधन देते हुए दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने संयुक्त घोषणापत्र के लिए व्यापक सहमति को स्वीकार किया और कहा, ‘हमें इस शिखर सम्मेलन की शुरुआत में ही घोषणापत्र को स्वीकार करना चाहिए.
न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, मैग्वेन्या ने कहा कि आमतौर पर घोषणापत्र को कार्यवाही के अंत में स्वीकार किया जाता है, लेकिन हमें ऐसा महसूस हुआ कि हमें शिखर सम्मेलन की घोषणापत्र को पहले ही पारित करने की पहल करनी चाहिए.
G-20 समिट में पहुंचे दुनिया के ये बड़े नेता
जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई ताकतवर देशों के नेता शामिल हुए. इसमें भारत पीएम नरेन्द्र मोदी, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयब एर्दोगन, यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग, UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस समेत कई अन्य नेता भी शामिल हुए.
Source : MEDIA

