शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक 9 देवियों की पूजा करने का विधान है. हर दिन का अपना महत्व और पूजन अलग-अलग होते हैं.
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Shardiya Navratri Puja 2025: हिंदू धर्म में मान्यता है कि शारदीय नवारत्रि की शुरुआत प्रतिपदा तिथि से होती है और नवमी तक मां दुर्गा की आराधना की जाती है. इन 9 दिनों में मां दुर्गा की 9 शक्तियों की पूजा करने का विधान है. प्रत्येक देवी मां की आराधना करने का अपना एक महत्व है और उनका भोग, मंत्र है. साथ ही 9 दिन तक मां दुर्गा की आराधना करने वाले भक्त अलग-अलग रंगों के पोशाक पहनते हैं. मान्यता है कि पोशाक के रंग से मातारानी के साथ-साथ ग्रहों की भी पूजा हो जाती है और उनकी कृपा भी बरसती है.
2025 में शारदीय नवरात्रि का आरंभ 22 सितंबर से है और 1 अक्टूबर को महानवमी नवरात्रि का आखिरी दिन है. मार्कण्डेय पुराण में शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री माता तक 9 देवी की पूजा करने का विधान बतलाया गया है. नवरात्र में इन देवियों की विशेष पूजा करने से हर ईच्छा की पूर्ति होती है. भक्तों की तकलीफ और दु:ख दर्द दूर होते हैं. ऐसे में 9 दिन हर देवी की पूजा कैसे करें? आइए जानते हैं.
9 देवी, 9 मंत्र, 9 भोग और 9 रंग
मां शैलपुत्री– 22 सितंबर 2025 (प्रतिपदा तिथि)
- पूजा विधि – पहले दिन घटस्थापना करें, अखंड ज्योति जलाएं और जौ बौएं. माता को लाल चंदन, कनेर के फूल, बेलपत्र सहित चुनरी आदि पूजा सामग्री चढ़ाएं.
- मंत्र – ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:’
- भोग – घी या घी से बनी मिठाई का भोग लगाएं.
- रंग – सफेद
- लाभ – देवी शैलपुत्री की पूजा करने से शक्ति मिलती हैं.
मां ब्रह्मचारिणी – 23 सितंबर 2025 (द्वितीया तिथि)
- पूजा विधि – माता को सफेद चंदन, सफेद गुलाब अर्पित करें.
- मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
- भोग – खीर में मिश्री डालकर भोग लगाएं
- रंग – लाल
- लाभ – इंद्रियों पर काबू करने की क्षमता और ज्ञान में वृद्धि होती है.
मां चंद्रघंटा – 24 सितंबर 2025 (तृतीया तिथि)
- पूजा विधि – माता को पलाश के फूल चढ़ाएं, अबीर-गुलाल चढ़ाएं.
- मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघंटायै नम:
- भोग – दूध और मावे की मिठाई का भोग लगाएं.
- रंग – गहरा नीला
- लाभ – चंद्रघंटा की पूजा से एकाग्रता आती है.
मां कूष्मांडा – 26 सितंबर 2025 (चतुर्थी तिथि)
- पूजा विधि – पीला गेंदे के फूल के साथ गुलाब इत्र अर्पित करें.
- मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नम:
- भोग – मालपुए का भोग लगाएं.
- रंग – हरा
- लाभ – कार्य में सफलता प्राप्ति होती है.
मां स्कंदमाता – 27 सितंबर 2025 (पंचमी तिथि)
- पूजा विधि – गुडहल के फूल चढ़ाएं और सुपारी, लौंग, इलायची अर्पित करें.
- मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमतायै नम:
- भोग – केले का भोग लगाएं.
- रंग – स्लेटी
- लाभ – संतान प्राप्ति और बच्चों की खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है.
मां कात्यायनी – 28 सितंबर 2025 (षष्ठी तिथि)
- पूजा विधि – बेर के पेड़ के फूलों से माता का श्रृंगार करें और कुमकुम, हल्दी गांठ, चावल चढ़ाएं.
- मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायनायै नम:
- भोग – शहद का भोग लगाना शुभ होगा.
- रंग – नारंगी
- लाभ – बिना रुकावट के कार्य संपन्न होते हैं, विवाह की अड़चने खत्म होती है.
मां कालरात्रि – 29 सितंबर 2025 (सप्तमी तिथि)
- पूजा विधि – माता को शंखपुष्पी और लाल रंग के फूल चढ़ाएं. अबीर गुलाल, नींबू की माला पहनाएं. माता को आलता लगाएं.
- मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नम:
- भोग – गुड़-घी का भोग लगाएं.
- रंग – मोर वाला हरा
- लाभ – दुश्मनों पर जीत मिलती है.
मां महागौरी – 30 सितंबर 2025 (महाष्टमी तिथि)
- पूजा विधि – माता को मोगरे का फूल, नारियल, अबीर, चंदन और 16 श्रृंगार सामग्री अर्पित करें.
- मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:
- भोग – नारियल या खोपरे से बनी मिठाई का भोग लगाएं. इस दिन कन्या भोजन में पूड़ी, काले चने और हलवा भी बनता है.
- रंग – गुलाबी
- लाभ – तरक्की, सुख और एश्वर्य मिलता है.
मां सिद्धिदात्री– 1 अक्टूबर 2025 (महानवमी तिथि)
- पूजा विधि – गुलाब, चंपा, कनेर के फूलों के साथ मेहंदी, हल्दी, कुमकुम और समस्त पूजन सामग्री चढ़ाएं.
- मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नम:
- भोग – तिल से बनी मिठाई अर्पित करें.
- रंग – पीला
- लाभ – समस्त मनोकामना पूरी होती है.
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