MP के Chhindwara में अब तक 20 बच्चों की मौत हो चुकी है. इस बीच मध्य प्रदेश में कफ सिरप पूरी तरह से बैन कर दिए गए हैं और कई अधिकारियों पर गाज गिरी है.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Coldrif Cough Syrup Case: मध्य प्रदेश में कफ सिरप से 20 बच्चों की मौत की घटना से भारत के हर कोने में हड़कंप मचा हुआ है. उत्तर भारत एमपी के छिंदवाड़ा-जबलपुर से लेकर दक्षिण भारत तमिलनडु की सरकार तक हिल गई है. बताया तो यह जा रहा है कि केन्द्र सरकार भी एक्शन में आ गइ है और कच्चे माल की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. केंद्र सरकार की सख्ती के बाद जवाबदेही भी तय होने लगी है. मीडिया में चल रहीं खबरों के अनुसार केंद्र सरकार ने इस मामले को लेकर तमिलनाडु की सरकार पर आरोप लगाया है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कफ सिरप के सेवन से मध्य प्रदेश में 20 बच्चों की मौत को लेकर जारी विवाद केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच दोष थोपने का मामला नहीं है, बल्कि यह सबसे पहले जवाबदेही का मामला है. खाद्य और औषधि प्रशासन केंद्र की स्पष्ट सिफारिशों के बावजूद तमिलनाडु इस मामले में कार्रवाई करने में असफल रहा है.
4 साल से कम उम्र के बच्चों को डेक्स्ट्रोमैथोरपन देने पर रोक
सरकार सख्ती दिखाते हुए दवाई के डोज पर भी पाबंदी लगाई है और स्वस्थ्य विभाग के माध्यम से निर्देशित किया गया है कि 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए पैरासिटामोल की अधिक खुराक से लीवर व गुर्दे संबंधी परेशानी हो सकती है, इसलिए हमेशा वजन के आधार पर पैरासिटामोल की डोज चिकित्सक की सलाह से ही दी जाए.
20 बच्चों की हो चुकी है मौत
किडनी फेल हो जाने से एक और बच्ची की मौत हो गई है. छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव की रहने वाली जेयूशा का नागपुर के GMC हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. इसका भी प्राथमिक उपचार प्रवीण सोनी ने किया था. सिर्फ छिंदवाड़ा में 16 बच्चों की मौत हो चुकी है. पांढुर्ना और बैतूल को मिलाकर मध्य प्रदेश में कुल 20 बच्चों की मौत हो चुकी है.
कप सिरप पूरी तरह से बैन
इस बीच स्वास्थ्य विभाग देख् रहे मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि राज्य में मानकों के अनुरुप नहीं पाए गए दो और कफ सिरप को पूरी तरह बैन कर दिया गया है, वहीं छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत के मामले में सरकार ने सख्त कार्रवाई की है. राज्य के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे शुक्ला ने कहा कि छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत के मामले को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है और इस मामले में सख्त कार्रवाई भी की गई है.
शुरुआत में एक कफ सिरप कोल्ड्रिफ को बैन किया था और अब दो अन्य कफ सिरप को भी राज्य में बैन कर दिया गया है. केंद्र सरकार के बच्चों के लिए कफ सिरप को लेकर गाइडलाइन का जिक्र करते हुए स्वास्थ्य मंत्री शुक्ल ने कहा कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप नहीं दिए जाने की है, जिस पर राज्य सरकार ने निर्देश दिए हैं कि अब कफ सिरप के ऊपर यह लिखा जाए कि यह सिर्फ चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में उपयोग के लिए नहीं है. इस संदर्भ में सभी पीडियाट्रिक एसोसिएशन से चर्चा की गई.
CDSCO ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किया निर्देश
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने मध्य प्रदेश में कथित रूप से खांसी की खराब दवा के कारण बच्चों की मौत के बाद बड़ा कदम उठाया है. देश के शीर्ष औषधि नियामक की ओर से ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) राजीव सिंह रघुवंशी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलर्स को सख्त निर्देश जारी किया. उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी दवा के निर्माण या बिक्री से पहले कच्चे माल और तैयार उत्पाद के हर बैच की अनिवार्य रूप से जांच की जाए.
अपर कलेक्टर जांच दल के प्रभारी बने
भारत सरकार के स्वास्थ एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशानुसार एमपी जबलपुर केे जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने कफ सिरप के उपयोग, विक्रय एवं वितरण की जांच हेतु जिले के प्रत्येक अनुभाग में अनुविभागीय दंडाधिकारियों के नेतृत्व में जांच दल गठित किये हैं. जांच दलों में संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार, थाना प्रभारी, बाल रोग विशेषज्ञ एवं औषधि निरीक्षक को सदस्य नियुक्त किया गया है. इन जांच दलों का प्रभारी अपर कलेक्टर नाथूराम गोंड को बनाया गया है.

