North and South India Wedding के समय में काफी अंतर है. उत्तर भारत में दिन और दक्षिण भारत में रात के समय ही क्यों की जाती हैं शादियां? जानिए इसके पीछे का कारण.
By : एस्ट्रोलॉजर पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Wedding Timings in North and South India: भारत के हर प्रांत की अपनी एक अलग परंपरा है. अपनी मान्यताएं हैं और अपने रीति-रिवाज हैं. इसी कारण हमारा भारत देश विभिन्नताओं का देश का गया है. हर 50 किमी दूरी की एक अपनी भाषा है. बोलचाल और खान पान, पहनावे का तरीका है. हर समाज की संस्कृति व रीति-रिवाज अलग-अलग है. इसी कारण एक ही धर्म के अंदर शादी की टाइमिंग में भी फर्क देखने को मिलता है. अब जब बात उत्तर भारत और दक्षिण भारत की टाइमिंग के फर्क की है तो हमें बताना भी जरूरी है. आइए आज हम जानते हैं एक ही धर्म में शादी की अलग-अलग टाइमिंक क्यों है?
मुहूर्त दिन और रात्रि दोनों समय होते हैं
उत्तर भारत में ज्यादातर शादियां रात के समय ही संपन्न कराई जाती है, जबकि दक्षिण भारत में सुबह या दोपहर के मुहूर्त को शादी करने की परंपरा है. अब सवाल उठता है कि आखिरकार शादी के लिए सबसे बेहतर समय कौन सा है? इस संबंध में मध्य प्रदेश जबलपुर के ज्योतिषाचार्य आचार्य जगद्गुरु डॉ. बालगोविंद शास्त्री जी ने विस्तृत चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि हिंदू पंचांग में दिन और रात्रि दोनों समय शादी का मुहूर्त बतलाया गया है. शादी का मुहूर्त दोनों समय होता है. फिर नॉर्थ और साउथ में शादी की टाइमिंग को लेकर इतना बड़ा अंतर कैसे है? यह सवाल सभी के जेहन में है तो आइए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक और सामाजिक कारण क्या है?
उत्तर भारत में शादियां रात के वक्त ही क्यों?
हिंदू मान्यताओं के आधार पर उत्तर भारत में ज्यादातर शादियां रात में होती है.. जबकि शादी का मुहूर्त दिन में भी होता है. लेकिन उत्तर भारत में सबसे ज्यादा मुगल और अफगानियों का आतंक था. वे हिंदू लड़कियों को अगवा कर लिया करते थे. जिसके डर से हिंदूओं ने रात के अंधेरे में छिपकर शादियां करना प्रारंभ कर दी और यह परंपरा बन गई. इसी कारण जो लोग रात्रि के समय शादी करते हैं वे ध्रुव तारा को साक्षी मानकर सात फेरे लेते हैं और जो लोग दिन में शादी करते हैं, वे सूर्य को साक्षी मानकर फेरे पूरे करते हैं.
अब आकर्षण का केन्द्र बन गईं रात की शादियां
उत्तर भारत की शादियां अब तो आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बन गई हैं. वर्षों पुरानी परंपराएं अब फैशन में तब्दील हो चुकी हैं. क्योंकि रात की शादियों में लाइट, डेकोरेशन और बेंड बाजे की धमक उत्तर भारतीयों को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रही हैं.
दक्षिण भारत में दिन के समय शादियों की परंपरा
दक्षिण भारत में मुगलों का आतंक नहीं था और यहां आज भी सूर्य देव की पूजा को महत्व दिया जाता है. यहां हिंदू परंपरा के अनुसार दिन में शादी करना सबसे शुभ माना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि सूरज की रोशनी सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और सूर्य पवित्रता का प्रतीक है.
वैदिक परंपराएं भी इसी ओर इशारा करती हैं कि दिन के समय देवता रात के मुताबिक अधिक सक्रिय होते हैं. इसी वजह से दक्षिण भारत में शादी सुबह या दोपहर के समय ही होती है.
कैसी है शादी की परंपरा
दक्षिण भारत में दव्रिड़ परंपराओं में शादी खुली जगह में करने का विधान है. ज्यादातर मंडप खुले आंगन में बनते हैं, जिसे केले के पत्तों से सजाया जाता है और उसी मंडप में सात फेरे लिए जाते हैं.
दक्षिण और उत्तर भारत की शादियों में अंतर
- दक्षिण भारत में गुह्यासूत्र, शौनक, आपस्तंब और बौधायन जैसे सूत्रों की परंपराओं को माना जाता है. जिसमें ‘दिवा विवाह’ यानी दिन की शादी को प्राथमिकता दी जाती है.
- जबकि उत्तर भारत में वर्षों पुरानी परंपरा आज भी विद्यमान है. दिन और रात दोनों समय मुहूर्त होने के बाद दिन में शादी नहीं हो रही हैं. अधिकांश लोग रात का मुहूर्त देखकर शादी की तारीख निश्चित करते हैं. हलांकि कई लोग अब परंपराओं से हटकर उत्तर भारत में भी दिन के मुहूर्त और लग्न पर शादी करना प्रारंभ कर दिया है.
- दक्षिण और उत्तर भारत की शादियों की टाइमिंग में सही या गलत जैसी कोई चीज नहीं हैं. हिंदू पंचांग की गणना और मुहूर्त एक जैसे ही होते हैं. केवल दोनों ही स्थानों की परंपरा, रीति रिवाज और शादी की पद्धतियां अलग-अलग देखने को मिल रही हैं.
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