जबलपुर के खाते में एक और बड़ा पर्यटन स्थल आ सकता है. नगर वन उद्यान बनाया गया है, लेकिन पर्यटकों का आना-जाना नहीं
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Thakur Tal Jabalpur : बरगी हिल्स और मदन-महल की पहाड़ियों के बीच प्राकृतिक सुंदरता को समेटे ठाकुरताल बजट का मोहताज है, बजट मिले तो इसकी खूबसूरती में और निखार आ सकता है. इसे एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है. व्यापक उदासीनता के चलते ठाकुरताल पहाड़ों के बीच खामोशी की चादर ओढ़े है. पहाड़ के बीच बने तालाब के नजारे को देखने लोग तो पहुंचते हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का मार्ग इतना जर्जर है कि लोगों को जान जोखिम में डालनी पड़ जाता है. पहाड़ के बीचों-बीच होने के कारण यहां पहुंच पाना मुश्किल होता है. विधिवत प्लानिंग करके ठाकुरताल का सौंदर्यीकरण करवाया जाए तो जबलपुर के खाते में एक और बड़ा पर्यटन स्थल आ सकता है. ठाकुर ताल तालाब में तैरती हुई गंदगी नजर आ रही है. बरसों से साफ-सफाई के अभाव में तालाब के चारों तरफ झाड़ियां उग गई हैं. कुछ यही उपेक्षापूर्ण स्थिति तालाब के मध्य भी नजर आई. जहां पर पेड़ों की डगालें और उनके पत्ते टूट कर तालाब में ही समा चुके हैं, इनके कारण बदबू फैल रही है. एक तरफ तालाबों के सौंदर्यीकरण की प्लानिंग बन रही है तो दूसरी तरफ ठाकुरताल की खामोशी बजट का इंतजार कर रही है.
अभी सिर्फ नगर वन उद्यान बना
ठाकुरताल की पहाड़ियों पर अभी सिर्फ नगर वन उद्यान बनाया गया है. पिछले चार सालों से इसका विकास कार्य करवाया जा रहा है, जो अब तक अधूरा ही है. पहाड़ियों के किनारे पहुंच मार्ग बनाए गए हैं. पर्यटक यहां से प्रकृति का नजारा देख सकें, इसलिए वॉचटॉवर बनाया गया है, लेकिन नगर वन उद्यान के बीचों-बीच प्राकृतिक खूबसूरती से लबरेज तालाब का विकास कार्य इस कदर अभागा रहा कि उसके लिए बजट तक नहीं मिल पाया.
फाउंटेन-पॉथ वे से सौंदर्यीकरण
जरूरत है कि ठाकुरताल के चारों तरफ फाउंटेन और पाथवे बनाया जाए, जिससे यहां आने वाले लोग तालाब के किनारे वॉक कर सकें. इतना ही नहीं यहां पर फाउंटेन लगाया जाए, जिससे इसकी खूबसूरती और निखर सकती है. गौरतलब है कि शहर के अंदर कई तालाबों का सौंदर्यीकरण करवाया जा रहा है, लेकिन पहाड़ियों पर स्थित तालाबों पर तो ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है. अगर जिम्मेदार इस तरफ ध्यान दें तो तालाब का सौंदर्य निखर सकता है.
वन विभाग का है तालाब
पहाड़ियों पर स्थित ठाकुरताल वन क्षेत्र में आता है. इस कारण इस तालाब का संरक्षण और संवर्धन वन विभाग को करना है. कुल मिलाकर देखा जाए तो तालाब वन विभाग का ही है, पंरतु वह इसका सौंदर्यीकरण तक नहीं करवा सका है. पूछताछ की गई तो कहा गया कि ठाकुरताल के लिए बजट नहीं है. विभाग ने बजट की मांग की है. जैसे ही बजट मिलेगा, वैसे ही तालाब का सौंदर्यीकरण करवा दिया जाएगा.
तालाब के सौन्दर्यीकरण के साथ पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बन सकता है तालाब
इस तालाब का यदि सौन्दर्यीकरण हो जाता है तो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र भी यह तालाब बन सकता है. इसकी खूबसूरती देशी-विदेशी पर्यटकों के बीच नई छाप छोड़ सकती है. लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते इस तालाब का विकास नहीं हो सका और पर्यटन के क्षेत्र में कोई ठोस कार्य नहीं हो सका. लिहाजा जबलपुर और तालाबों की अनदेखी की जा रही है और तालाबों का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है. तालाब धीरे-धीरे जबलपुर शहर से गायब होते जा रहे हैं.
तालाब की जमीन पर भू-माफिया की नजर
तालाबों की खाली पड़ी जमीन पर सबसे ज्यादा भू-माफिया सक्रिय हैं और उनकी नजरों से तालाब की जमीन बच नहीं सकती है. बड़े से बड़े तालाब को नेस्तनाबूत करने में भू-माफिया का ही हाथ रहा है. तालाब की जमीन पर भू-माफिया और जिम्मेदार अधिकारी मिलकर कॉलोनियां डेवलप कर दीं. तालाब के नाम पर मौके पर कहीं भी एक बूंद पानी तक नजर नहीं आता है. विभागीय अधिकारियों ने यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया तो बचे हुए तालाब भी अपना अस्तित्व खो देंगे और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने रहेंगे. तालाबों को बचाने में प्रशासनिक अधिकारयों के साथ समाजसेवियों को भी सक्रिय होना पड़ेगा. तभी शहर के तालाब बचाए जा सकते हैं.

