ई-अटेंडेंस के बाद नियमित, विनियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों और अधिकारियों की खुल रही पोल, ठेकेदारों को सफाई, कम्प्यूटर ऑपरेटर और अतिक्रमण विभाग में कर्मचारी जुटाने में आ रहा पसीना
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Municipal Corporation Jabalpur News: नगर निगम में अधिकारियों और कर्मचारियों की फेस रीडिंग ई-अटेंडेंस की व्यवस्था जब से शुरू हुई है, तब से कामचोर और फर्जी कर्मचारियों की पोल भी खुलना प्रारंभ हो गई है. नियमित और विनियमित 2500 कर्मचारियों में से अभी भी दो से तीन दर्जन कर्मचारियों की ई-अटेंडेंस नहीं लग रही है. वहीं आउटसोर्स के सफाई, कम्प्यूटर ऑपरेटर, अतिक्रमण और फायर में कर्मचारियों की संख्या जुटाने में ठेकेदारों के पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि नगर निगम में कुल 7200 कर्मचारियों के काम करने का दावा किया जा रहा है. लेकिन ई-अटेंडेंस करीब 5400 की लग रही है. यानि अभी भी सैकड़ों कर्मचारी गायब हैं. लेकिन उनके नाम से जनता की गाढ़ी कमाई आज भी निकाली जा रही है और इससे पहले भी हर माह निकाली जा रही थी. इतना ही नहीं अधिकांश आउटसोर्स कर्मचारी फेस रीडिंग करने से भी कतरा रहे हैं. जिसके कारण फर्जी कर्मचारी की अटेंडेंस लगाई जा रही है. इसके पहले ठेका कंपनियों के जितने फर्जी आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या थी और उनके नाम पर निगम से रकम निकाली जा रही थीं, वह जांच का विषय बन गया है. प्रारंभिक रूप से अभी इसी बात का खुलासा हो रहा है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की जितनी संख्या बताई जा रही थी, वास्तव में नगर निगम के किसी भी विभाग में संख्या दर्शाने के अनुरूप काम करते हुए कर्मचारी दिखाई नहीं पड़ रहे हैं.
600 से ज्यादा गायब और भोपाल मे 85 का जिक्र
नगर निगम जबलपुर में 600 से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी गायब हैं, इनकी 2 माह बाद भी फेस रीडिंग नहीं हो पा रही है. वहीं नगर निगम जबलपुर के अधिकारियों ने भोपाल नगरीय प्रशासन विभाग में 85 आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या का डेटा भेजा है. इससे साफ जाहिर होता है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या में कहीं न कहीं घालमेल है और आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर कौन खाईबाजी कर रहा है, यह भी जांच का विषय है.
दबंग ठेकेदार फेस रीडिंग अटेंडेंस कराने से कतरा रहे
सूत्रों से पता चला है कि आउटसोर्स कर्मचारी उपलब्ध कराने वाले दबंग ठेकेदार फेस रीडिंग अटेंडेंस कराने से कतरा रहे हैं. ज्यादातर कर्मचारियों की ग्रुप फोटो भेजकर संख्या बल दिखाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि ई-अटेंडेंस से फर्जी कर्मचारियों का पर्दाफाश हो जाएगा और वास्तविकता से नगर निगम अधिकारी वाकिफ हो जाएंगे. लिहाजा कर्मचारियों की संख्या बल दिखाकर खाईबाजी करने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है.
फर्जी कर्मचारियों के नाम पर निकाली गई रकम
नगर निगम जबलपुर में आउटसोर्स कर्मचारी संख्या में गड़बड़ी होने का जिस प्रकार से ई-अटेंडेंस के बाद खलासा हो रहा है और करीब 600 आउटसोर्स फर्जी कर्मचारी चिन्हित हो रहे हैं. नगर निगम अधिकारियों के द्वारा ऐसे 600 कर्मचारियों का फर्जी तरीके से ठेका कंपनी को भुगतान भी लंबे समय से किया जा रहा है. जनता की गाढ़ी कमाई जो नगर निगम में टैक्स के रूप में जमा होती है, भुगतान उससे होता रहा है. उसकी रिकवरी कैसे और किस प्रकार से होगी, इसकी रूपरेखा न तो उच्च अधिकारियों ने बनाई है और न ही स्थानीय स्तर पर कोई चर्चा हो रही है, जबकि भ्रष्टाचार की श्रेणी में आने वाली रकम की रिकवरी होना जरूरी है.
निगमायुक्त की पकड़ में भी आ चुके हैं फर्जी कर्मचारी
विडंबना यह है कि नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारी नगर निगम आयुक्त के निरीक्षण में भी पकड़े गए हैं. इसके बाद भी आज तक न तो उनकी सही ढंग से जांच कराई गई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई. जिसके कारण आउटसाेर्स कर्मचारियों के नाम पर भ्रष्टाचार आज भी जारी है.
ये है हकीकत
- 7200 कर्मचारी नगर निगम में रजिस्टर्ड बताए जा रहे हैं.
- 2500 कर्मचारी व अधिकारी नियमित व विनियमित हैं.
- 4100 के करीब आउटसोर्स के कर्मचारी कम्प्यूटर, सफाई, अतिक्रमण, फायर आदि विभाग में कार्यरत हैं.
- 5500 नियमित, विनियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों की ई-अटेंडेंस लग रही है.
- 600 आउटसोर्स कर्मचारियों की आज भी ई-अटेंडेंस नहीं लग रही है.
- 85 फर्जी कर्मचारियों की लिस्ट नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल को भेजी गई है.
- 9 कर्मचारियों को सस्पेंड करने का दावा किया जा रहा है.

