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भगवान के चरणामृत का रहस्य जानकर आप हो जाएंगे हैरान!

DB News
Last updated: 15/12/2025 11:28 PM
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4 Min Read
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 हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, चरणामृत ग्रहण करना भगवान का आशीर्वाद पाने का प्रतीक है. मान्यता है कि यह उनके चरणों की पवित्रता के समान होता है.

Source : DB News Update  

Contents
 हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, चरणामृत ग्रहण करना भगवान का आशीर्वाद पाने का प्रतीक है. मान्यता है कि यह उनके चरणों की पवित्रता के समान होता है.धार्मिक ग्रंथों में भी है चरणामृत का वर्णननकारात्मक ऊर्जा होती है समाप्तशारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारीपूर्व जन्म के पापों का होता है क्षय

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Charnamrit: ‘अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम्। विष्णो पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते।’ इसका अर्थ है कि यह एक ऐसा अमृत है, जिसे पीने से मनुष्‍य को अकाल मृत्‍यु का भय नहीं रहता. यह सभी पापों का नाश कर देता है. साथ ही भगवान विष्‍णु के चरणों को धोने वाले जल को पीने से व्‍यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. चरणामृत का महत्व धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों रूपों में देखने को मिलता है. यह भगवान के चरणों का प्रसाद होता है, जो व्यक्ति को सभी पापों से मुक्त करता है. अकाल मृत्यु से बचाता है. व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसमें तुलसी और गंगाजल जैसे पवित्र तत्व मिलाए जाते हैं, जो रोगों से बचाने में भी सहायक होते हैं.

धार्मिक ग्रंथों में भी है चरणामृत का वर्णन

शास्त्रों के अनुसार, चरणामृत को भगवान के चरणों से अर्पण करने के बाद ही भक्तों को वितरित किया जाता है. इससे भगवान का आशीर्वाद स्वरूप प्रसाद भक्तों को प्राप्त होता है. भक्त चरणामृत को बड़ी ही श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं. विष्णु पुराण, भागवत पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी चरणामृत का महत्व वर्णित है.

नकारात्मक ऊर्जा होती है समाप्त

चरणामृत का सेवन आत्मा की शुद्धि के रूप में माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, भगवान के चरणों का स्पर्श करने वाला जल व्यक्ति के भीतर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है. यह उसकी आत्मा को शुद्ध करता है.

इसे ग्रहण करने से मनुष्य का अहंकार नष्ट होता है. उसमें विनम्रता, भक्ति और सेवा भाव आता है. भक्तगण जब श्रद्धापूर्वक चरणामृत का सेवन करते हैं, तो उनके भीतर शुद्ध विचारों का संचार होता है.

शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

धार्मिक दृष्टि से चरणामृत का सेवन शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना गया है. चरणामृत में तुलसी, गंगाजल, और अन्य औषधीय तत्वों का समावेश होता है, जो आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होते हैं. तुलसी को औषधीय गुणों से युक्त माना गया है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और शरीर को शुद्ध करने में सहायक है.

पूर्व जन्म के पापों का होता है क्षय

शास्त्रों में चरणामृत को पापों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है. ऐसी मान्यता है कि जब भक्त चरणामृत ग्रहण करता है, तो उसके पूर्व जन्म और इस जन्म के पापों का भी नाश हो जाता है. श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित है कि जो व्यक्ति भगवान के चरणामृत का सेवन करता है. वह मोक्ष की प्राप्ति होती है.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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