बरसाना, नंदगांव, मथुरा, वृंदावन, गोकुल, महावन और बल्देव (बलदाऊ) सहित ब्रज में होली की तैयारी में जुटे कृष्णभक्त, 24 से उत्सव की शुरुआत.
Source : DB News Update
By : स्वामी वृन्दावनदास जी महाराज | Edited By: सुप्रिया
Braj Holi 2026: बांकेबिहारी लाल जी के गाल होली से पहले लाल दिखाई पड़ने लगे हैं. रंगो का उत्सव होली का खुमार ब्रज की गलियों में देखने को मिल रहा है. वहीं यहां के मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण से होली खेलने का सिलसिला शुरू हो चुका है. मंगलवार 24 फरवरी से ब्रज की गलियों में होली का उत्सव लट्ठमार होली के साथ शुरू हो जाएगा. अभी तक मंदिरों में धमार व होली के रसिया का गायन हो रहा था. लेकिन बरसाना में मंगलवार से बरसाना में लट्ठमार होली की शुरुआत हो जाएगी. रंग-गुलाल से ब्रज की गलियों में उड़ेला जाएगा.
मंदिरों में टेसू के फूलों से तैयार हो रहा रंग
ब्रज में टेसू के फूलों से रंग तैयार किया जा रहा है. गुलाल बड़ी मात्रा में एकत्रित किया जा रहा है. क्योंकि 24 फरवरी से बरसाना में लट्ठमार होली शुरू हो जाएगी. इससे पहले पूरी तैयारी ब्रजनंदन में की जा रही है.
ठाकुर जी के कमर में गुलाल से बांधा जाएगा फेंटा
मथुरा के सभी मंदिरों में ठाकुरजी के कमर पर गुलाल से भरा फेंटा बांध दिया जाएगा जो इस बात का संके है कि अब होली जलने तक अनवरत गुलाल व रंग उड़ता रहेगा. इससे पहले नंदगांव में 26 फरवरी को लट्ठमार होली खेली जाएगी.
बरसाना से शुरू होगी होली
सप्तमी से लड्डूमार और फुलेरा होली की शुरुआत होगी. इस दिन फूलों से बने रंग लगाने की परंपरा है, दूसरी ओर से फूल के लाल रंग के बदले लड्डूमार होली खेली जाएगी. अष्टमी को लट्ठमार होली शुरू होगी. इस दिन नंदगांव के गोप-गोसाइयां बरसाना श्रीजी के मंदिर में जाएंगे, वहां जाकर फाग गाएंगे, वहां स्वागत समारोह होगा. रंग-गुलाल एक-दूसरे पर डालेंगे. श्रीराधारानी मंदिरर के पुजारी वहां से नृत्य करते हुए निकलते हैं और सभी को अबीर लगाते हुए स्वागत करेंगे. वहीं दूसरी ओर गोपियां डंडा लेकर तैयार रहती हैं और जैसे ही उनके ऊपर रंग-गुलाल पड़ता है. उन गोपियों के द्वारा लट्ठों की बरसात होने लगती है. इसके लिए बरसाना, नंदगांव की गोपियां एक माह पहले से व्रत करती हैं और उसके बाद होली खेलने के लिए तैयार होती हैं. यहां पहुंचने वाले भक्तों को प्रसाद स्वरूप लट्ठ से स्पर्श करती हैं और उन्हें आशिर्वाद देती हैं.
कैसे पड़ी लट्ठमार होली की परंपरा
धर्मशास्त्रों के अनुसार व्रज की होली को लेकर उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीकृष्ण के मित्र श्रीदामा का जब विवाह हुआ. उनकी पत्नी आईं तो श्रीदामा की सासु मां ने अपनी बेटी से कहा कि श्रीकृष्ण को अपना मुख मत दिखाना. श्रीकृष्ण उनका मुख देखना चाहते थे. इस जिद में श्रीदामा की पत्नी सहित अन्य गोपिकाएं लट्ठ लेकर खड़ी हो गईं और कहा कि यदि श्रीकृष्ण या उनके मित्र जिद करेंगे तो उन्हें लट्ठ से मारेंगे. श्रीकृष्ण अपने मित्र श्रीदामा की पत्नी का मुख देखने पहुंचते हैं, जिसके बाद गोपिकाओं ने लट्ठ बरसाए. यह परंपरा आज भी चली आ रही है. बताया जा रहा है कि आज भी जितनी बहुएं ब्रज आती हैं, उन्हें घी खिलाया जाता है. जिससे वह लट्ठ चलाने के लिए मजबूत रहें. यह प्रथा बड़े लंबे समय से चली आ रही है.
दाऊजी के यहां हुरंगा मनाने की परंपरा
होली का उत्सव एकादशी से वृन्दावन में शुरू हो जाती है और दसमी के दिन गोकुल होली होती है. बरसाना, नंदगांव, मथुरा, वृंदावन, गोकुल, महावन और बल्देव सहित ब्रज में होली मनाने की परंपराएं अलग-अलग हैं. दाऊ जी के यहां हुरंगा या हुड़ेला मनाने की परंपरा है.
ब्रज में होली के उत्सव
24 फरवरी – नंदगांव – फाग आमंत्रण
24 फरवरी – बरसाना – लड्डू मार होली
25 फरवरी – बरसाना – लट्ठमार होली
26 फरवरी – नंदगांव – लट्ठमार होली
27 फरवरी – रंगभरनी एकादशी से ब्रज में रंगीली होली की शुरुआत हो जाती है और यहां के सारे प्रमुख मंदिरों में लगातार होली का रंग गुलाल उड़ना शुरू हो जाता है.
27 फरवरी – श्री कृष्ण जन्मभूमि होली
27 फरवरी – वृंदावन स्थित बिहारी जी मंदिर की होली
1 मार्च – मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर की होली
1 मार्च – गोकुल की छड़ीमार होली
3 मार्च – चतुर्वेदी समाज का डोला निकलेगा
3 मार्च – होलिका दहन
4 मार्च – जलती होली के बीच फालेन गांव में पंडा निकलेगा सुबह 4 बजे
4 मार्च – धुलेंडी होली संपूर्ण ब्रज में खेली जाएगी
5 मार्च – दाऊजी का कपड़े फाड़ हुरंगा
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

