वैशाख महीना 1 मई तक रहेगा. इस अवसर पर मांगलिक कार्य, नियम, दान, व्रत त्योहार आदि कार्य किए जाते हैं. यह पुण्यदायी माह माना गया है, इस अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम करना भी लाभकारी है.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Vaishakh Month 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ हो रहा है. यह तिथि 2 अप्रैल को सुबह 7:41 बजे शुरू होगी और 3 अप्रैल को सुबह 8:42 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर वैशाख मास की शुरुआत शुक्रवार 3 अप्रैल से मानी जाएगी. यह माह साल के 12 महीनों में सबसे पुण्यदायी माह माना गया है. स्कंद पुराण के अनुसार “न वैशाखसमो मासो न कृतं समं तपः। न दानं सममस्त्येव न गंगा सममं जलम्॥” अर्थात वैशाख के समान कोई महीना नहीं, न ही इसके समान कोई तप, दान या गंगा जल है. वैशाख मास शुक्रवार से शुरू होगा और शुक्रवार को ही खत्म होगा. मान्यता है कि इस माह में किए गए पूजा-पाठ से अक्षय पुण्य मिलता है और भगवान की कृपा से भक्त की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं. ये महीना वृक्षों में कल्पवृक्ष के समान और शिवजी, विष्णु को प्रसन्न करने वाला माना गया है.
शास्त्रों में मिलता है वैशाख माह का उल्लेख
न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्.
न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंङ्गया समम्..
स्कंद पुराण का यह श्लोक संदेश दे रहा है कि वैशाख के समान कोई और मास नहीं है. सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है. वेद के समान को शास्त्र नहीं है और गंगा जी के समान कोई तीर्थ नहीं है.
पद्मपुराण, पातालखण्ड में उल्लेख मिलता है कि…
यथोमा सर्वनारीणां तपतां भास्करो यथा .आरोग्यलाभो लाभानां द्विपदां ब्राह्मणो यथा..
परोपकारः पुण्यानां विद्यानां निगमो यथा.मंत्राणां प्रणवो यद्वद्ध्यानानामात्मचिंतनम् ..
सत्यं स्वधर्मवर्तित्वं तपसां च यथा वरम्.शौचानामर्थशौचं च दानानामभयं यथा ..
गुणानां च यथा लोभक्षयो मुख्यो गुणः स्मृतः.मासानां प्रवरो मासस्तथासौ माधवो मतः ..
जैसे सम्पूर्ण स्त्रियों में पार्वती, तपने वालों में सूर्य, लाभों में आरोग्यलाभ, मनुष्यों में ब्राह्मण, पुण्यों में परोपकार, विद्याओं में वेद, मन्त्रों में प्रणव, ध्यानों में आत्मचिंतन, तपस्याओं में सत्य और स्वधर्म-पालन, शुद्धियों में आत्मशुद्धि, दानों में अभयदान तथा गुणों में लोभ का त्याग ही सबसे प्रधान माना गया है, उसी प्रकार सब मासों में वैशाख मास अत्यंत श्रेष्ठ है.
आज से प्रारंभ हो रहा पुण्यदायी माह
पुण्यदायी वैशाख माह आज 3 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो रहा है और इसकी समाप्ति 1 मई 2026 शुक्रवार के दिन होगी. वैशाख में जैसे-जैसे सूर्य की तपिश बढ़ती है, वैसे-वैसे इस महीने में किए गए धर्म-कर्म का महत्व भी बढ़ता है इसलिए ऋषि-मुनियों ने इसे आत्मशुद्धि और पुण्य संचय के लिए श्रेष्ठ माह बताया है.
वैशाख माह पुण्य कमाने के लिए क्यों महत्वपूर्ण
जैसा कि पुराणों में वर्णित है कि वैशाख माह में किए गए पवित्र नदियों में स्नान, धार्मिक क्षेत्र में दान, जप और तप का फल अक्षय होता है, यानी ये पुण्यदायी कार्य कभी समाप्त नहीं होते हैं. इसके अलावा वैशाख में 16 संस्कारों को करना शुभ माना गया है, ये कर्य कभी न खत्म होने वाले पुण्य देते हैं. श्रीकृष्ण ने वैशाख को अपना प्रिय महीना माना है.
वैशाख महीने में कौन से कार्य शुभ हैं?
- वैशाख मास में विवाह, नामकरण और मुंडन संस्कार करना बहुत शुभ माना जाता है. इस समय ग्रह-नक्षत्र अनुकूल रहते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और स्थिरता का आशीर्वाद मिलता है.
- नया घर बनवाने या उसमें प्रवेश करने के लिए यह महीना श्रेष्ठ माना गया है. इस दौरान किया गया गृह प्रवेश घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और लक्ष्मी का वास सुनिश्चित करता है.
- अक्षय तृतीया के दिन विशेष रूप से सोना खरीदने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं कभी घटती नहीं, बल्कि बढ़ती हैं और समृद्धि लाती हैं.
- वैशाख में हवन, यज्ञ, सत्संग और पूजा-पाठ करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. सुहागिनों को भोजन कराना उन्हें सुहाग सामग्री दान करना श्रेष्ठ है.
वैशाख माह में दान का महत्व
“वैशाखे मासि यत् पुण्यं स्नानदानजपादिकम्। तत् सर्वं अक्षयं प्रोक्तं पापनाशनमुत्तमम्॥”
अर्थात – वैशाख महीने में किया गया स्नान, दान, जप आदि कभी नष्ट नहीं होता और यह सभी पापों का नाश करने वाला होता है.
वैशाख माह गर्मी के मौसम में आता है. ये समय सेवा के लिए श्रेष्ठ है. गर्मी के में प्यासे और जरूरतमंद लोगों को जल पिलाना, घड़ा दान करना, छाता, चप्पल, वस्त्र, सत्तू और फल देना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है.
वैशाख मास में शुभ कार्य करना जरूरी
- तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं.
- भगवान विष्णु और देवी महालक्ष्मी की पूजा करें.
- मंदिर में ध्वज यानी झंडे और पानी से भरे मटके का दान करें.
- शिवजी के सामने दीपक जलाएं और श्रीराम नाम का जाप 108 बार करें.
- शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, काले तिल अर्पित करें.
- सूर्यादय से पहले उठकर स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं.
- वैशाख में तीर्थ दर्शन करें और नदियों में स्नान करें. घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
- वैशाख में पानी का दान करें. किसी सार्वजनिक स्थान पर प्याऊ लगाएं या किसी प्याऊ में मटके का दान करें.
- प्यासों के लिए पानी और धूप से बचने के लिए छाते का दान करें.
- जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल का भी दान करें. आप चाहें तो किसी मंदिर में पंखों का दान भी कर सकते हैं
वैशाख माह के व्रत त्योहार
3 अप्रैल 2026 – वैशाख माह का आरंभ
5 अप्रैल – विकट संकष्टी चतुर्थी, बड़ी चतुर्थी
9 अप्रैल – मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
10 अप्रैल – कालाष्टमी
13 अप्रैल- वरुथिनी एकादशी, वल्लभाचार्य जयंती, पंचक शुरू
14 अप्रैल- मेष संक्रांति, बैसाखी
15 अप्रैल- बुध प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि
17 अप्रैल- वैशाख अमावस्या
19 अप्रैल- अक्षय तृतीया, परशुराम जयंती, त्रेता युग दिवस
20 अप्रैल – मातंगी जयंती, रोहिणी व्रत, संकर्षण चतुर्थी
21 अप्रैल – शंकराचार्य जयंती, सूरदास जयंती
22 अप्रैल – रामानुज जयंती, स्कंद षष्ठी
23 अप्रैल – गंगा सप्तमी
24 अप्रैल – बगलामुखी जयंती, मासिक दुर्गाष्टमी
25 अप्रैल – सीता नवमी
27 अप्रैल – मोहिनी एकादशी, सिद्धिलक्ष्मी जयंती, त्रिशूर पूरम
28 अप्रैल – भौम प्रदोष व्रत भौम, परशुराम द्वादशी
30 अप्रैल – नृसिंह जयंती, छिन्नमस्ता जयंती
1 मई – वैशाख पू्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा
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