हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इस अवधि को नौतपा कहा जाता है. इसका मतलब नौ दिनों की प्रचंड गर्मी पड़ेगी, इस दौरान सावधानी रखना बहुत जरूरी है. जानें कैसे?
Source : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Nautapa 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ के महीने में जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इस अवधि को नौतप कहा जाता है. नाम से ही साफ पता चल रहा है कि, इसके पीछे का मतलब ‘नौ दिनों की प्रचंड गर्मी’, इस दौरान गर्मी का स्तर बढ़ने के साथ लू भी चलती है. इन नौ दिनों में सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है और लू का असर भी ज्यादा महसूस होता है.
इस खास अवधि में सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. ज्योतिष और परंपरा दोनों ही दृष्टिकोण से यह समय विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसे प्रकृति के संतुलन और आने वाले मौसम से भी जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में इस अवधि के दौरान कुछ सावधानियां बरतना और सूर्य देव से जुड़े उपाय करना लाभकारी माना जाता है. आइए जानते हैं नौतप के इन नौ दिनों के दौरान बरती जाने वाली खास सावधानियां क्या हैं? और हिंदू धर्म के अनुसार नौतपा की प्रथाओं को किस प्रकार आत्मसात करें?
2026 में नौतप की शुरुआत कब है?
2026 में नौतप 25 मई से शुरू हो रहा है और 2 जून तक चलेगा. नौतता के ये 9 से 10 दिन तपाने वाले होते हैं. इन दिनों भीषण गर्मी पड़ती है, जिसे मानसून के आगमन के लिए शुभ माना जाता है. इस अवधारणा का वर्णन निम्नलिखित श्लोक में किया गया है.
ज्येष्ठ मासे सीत पक्षे आर्द्रादि दशतारका।
सजला निर्जला ज्ञेया निर्जला सजलास्तथा।।
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष (चंद्रमा के बढ़ते चरण) में, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र (आद्रा) में प्रवेश करता है, यदि उस पल से लेकर अगले दस नक्षत्रों तक तीव्र गर्मी बनी रहती है, तो यह प्रचुर मानसून का संकेत होता है.
दरअसल रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चंद्रमा होता है. सूर्य तेज और प्रताप का प्रतीक माना जाता है जबकि चंद्र शीतलता का प्रतीक होता है. सूर्य जब चंद्र के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है तो सूर्य इस नक्षत्र को अपने प्रभाव में ले लेता है जिसके कारण ताप बहुत अधिक बढ़ जाता है. इस दौरान ताप बढ़ जाने के कारण पृथ्वी पर आंधी और तूफान आने लगते है.
नौतप के दौरान इन अभ्यासों का करें पालन
सनातन धर्म में नौतप का समय सूर्य देव को खुश करने के लिए अत्यंत विशेष माना जाता है, जिससे कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. इसलिए, इस दौरान सुबह जल्दी उठना चाहिए, स्नान करने के बाद सूर्य देव अर्घ्य अर्पित करना चाहिए और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखने के लिए सूर्य देव को समर्पित मंत्रों का जाप करना चाहिए.
भीषण गर्मी को देखते हुए इस दौरान खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. दही, छाछ, लस्सी, बेल का शरबत, नारियल पानी और तरबूज जैसे ठंडे पदार्थों का सेवन लाभकारी होता है.
नौतापा में इन कामों को करने से बचना चाहिए
- नौतपा में विवाह, गृह प्रवेश आदि जैसे मांगलिक कार्यक्रम करने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से घरेलू शांति पर असर पड़ता है.
- नौतपा में जितना हो सके हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए.
- शुभ परिणाम को प्राप्त करने के लिए, नौतपा के दौरान पक्षियों और जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था की जा सकती है.
- भोजन-पानी जैसे जरूरतमंद व्यक्ति को घर आते ही भोजन कराना चाहिए, उसे खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए.
- नौतपा में पूर्वजों को जलदान और तर्पण करने के लिए अत्यंत उपयुक्त है.
- नौतपा के दौरान दही, छाछ, लस्सी, बेल शरबत, नारियल पानी और तरबूज जैसी ठंडी चीजों का जितना हो सके उतना सेवन करना चाहिए.
- इसके अलावा प्याऊ स्थापित करना, जल, शरबत, सत्तू, मिट्टी के बर्तन, छाते, सूती कपड़े, हाथ के पंखे और मौसमी फलों जैसी चीजों का दान करना शुभ माना गया है.
- नौतपा में गर्म, मसालेदार, तले हुए और मांसाहारी भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए.
- जब तक जरूरी न हो, चिलचिलाती धूप खासकर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए.
- नौतपा के दौरान जब तक कि जरूरी न हो अधिक यात्रा करने से बचना चाहिए.
- प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना और उनके मंत्रों का जाप करना फलदायी माना जाता है.
- इसके साथ ही नौतपा के दिनों में परोपकार और दान का विशेष महत्व है.
- पक्षियों और जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था करें.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

