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जन्माष्टमी 2026 में कब है ? नोट कर लें तारीख, जानें पूजा मुहूर्त

DB News
Last updated: 09/09/2026 1:01 PM
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6 Min Read
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब है? जानें
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जन्माष्टमी का त्योहार देश-विदेश में धूमधाम से मनाया जाता है. कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को है. श्रीकृष्ण की पूजा की पूजा क्यों है खास?

Source : DB News Update  

Contents
जन्माष्टमी का त्योहार देश-विदेश में धूमधाम से मनाया जाता है. कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को है. श्रीकृष्ण की पूजा की पूजा क्यों है खास?जन्माष्टमी 2026 में शुभ मुहूर्तकृष्ण जन्माष्टमी 2026 व्रत पारण का समयजन्माष्टमी व्रत करने की विधिजन्माष्टमी की रात्रि श्रीकृष्ण की पूजा का विधानक्यों खास माना जाता है ये व्रतकृष्ण जन्माष्टमी आरती

By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Krishna Janmashtami 2026: लोक कल्याण के लिए भगवान विष्णु का अवतार द्वापर युग में हुआ. भगवान श्रीकृष्ण का जन्म जेल की काल कोठरी में हुआ. श्रीकृष्ण का जन्म होते ही अंधकार में डूबी जेल की बैरक देदीप्यमान हो गई. जीव का उद्धार करने के लिए अवतरित हुए भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव प्रतीकात्मक रूप से देशभर में मनाया जाता है. हिन्दु धर्म को मानने वाले भक्त श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बड़ी धूम-धाम के साथ मनाते हैं. उन्हें इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है. ऐसी मान्यता है कि भवसागर का पार लगाने वाले श्रीकृष्ण के जन्मदिन पर जो लोग व्रत रखते हैं, विधि-विधान से पूजा करते हैं. उनके सारे दु:ख दर्द दूर हो जाते हैं.

2026 में श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव है. जन्माष्टमी का पर्व सिर्फ आस्था का ही नहीं बल्कि भक्ति और प्रेम का पर्व है.

जन्माष्टमी 2026 में शुभ मुहूर्त

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:25 पर शुरू होगी और अगले दिन 5 सितंबर को सुबह 12:13 तक है.

जन्माष्टमी निशिता पूजा का समय –5 सितंबर- रात 11:57 – सुबह 12:43,

रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ – 4 सितंबर 2026, सुबह 12:29

रोहिणी नक्षत्र का समापन – 4 सितम्बर 2026, दोपहर 11:04

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 व्रत पारण का समय

व्रत पारण समय – 05 सितम्बर- सुबह 06:01

जन्माष्टमी व्रत करने की विधि

ऐसी मान्यता है कि एकादशी उपवास के दौरान जिस प्रकार नियमों का पालन किया जाता है. ठीक उसी प्रकार सभी नियम जन्माष्टमी उपवास के दौरान भी पालन किये जाते हैं. जन्माष्टमी के व्रत करने वाले भक्त को किसी भी प्रकार से अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. जन्माष्टमी का व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद एक निश्चित समय पर तोड़ने का विधान है जिसे जन्माष्टमी के पारण समय से जाना जाता है.

जन्माष्टमी की रात्रि श्रीकृष्ण की पूजा का विधान

  • जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
  • सूर्योदय होते ही सूर्य देव को जल अर्पित करें.
  • घर के मंदिर में लड्डू गोपाल को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएं.
  • फिर चंदन का तिलक लगाकर फूल अर्पित करें.
  • जन्माष्टमी की रात 12 बजते ही श्रीकृष्ण की मूर्ति के समक्ष दूध, दही, शहद, घी और पानी से स्नान कराए.
  • भगवान श्रीकृष्ण का दुग्धाभिषेक कराने के दौरान शंख, घंटी-घड़ियाल बजाए.
  • वैदिक मंत्रोच्चारण से श्रीकृष्ण स्रोत का पाठ करें.
  • भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के अलग-अलग प्रकार के प्रसाद का भोग अर्पित करें.
  • श्रीकृष्ण के वाल्यस्वरूप को झूला में बैठाकर झूला झुलाएं.
  • ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥ मंत्र का जाप करें.
  • देसी घी का दीपक जलाएं और श्रीकृष्ण की आरती करें.

क्यों खास माना जाता है ये व्रत

धार्मिक मान्यता के अनुसार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने से भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है. कहा जाता है कि श्रद्धा से पूजा करने पर जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. यही वजह है कि हर महीने बड़ी संख्या में भक्त ये व्रत रखते हैं.

कृष्ण जन्माष्टमी आरती

।। आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।।

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।

श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।

लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,

ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

।। आरती कुंज बिहारी की… ।।

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।

गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग,

अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

।। आरती कुंज बिहारी की… ।।

जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।

स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच,

चरन छवि श्री बनवारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

।। आरती कुंज बिहारी की… ।।

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।

चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू, हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद,

टेर सुन दीन दुखारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

।। आरती कुंज बिहारी की… ।। 

।। इति आरती कुंज बिहारी की ।।

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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