मध्य प्रदेश जबलपुर स्थित नरसिंह मंदिर में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया भगवान नृसिंह का जन्मोत्सव, हवन, पूजन, अनुष्ठान, महाआरती के साथ भण्डारे का किया गया आयोजन.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Narasimha Jayanti 2026: हिंदू धर्म में भगवान नृसिंह के अवतार का वर्णन मिलता है. जिसमें इस बात की प्रमाणिकता सिद्ध होती है कि निर्जीव वस्तु में भी जीवन है. प्रकृति के प्रत्येक निर्जीव कण-कण में जीव का अस्तित्व दिखाई पड़ता है. पेड़-पौधे, पहाड़-जंगल, नदी-तालाब हम सभी को इस बात का हर वक्त इस बात का एहसास कराते हैं कि जीवन जीने के लिए हर उस जीव व निर्जीव वस्तु की आवश्यकता है, जो हमारे जीवन से जुड़ी हुई है. भगवान विष्णु इस चराचर जगत के पालन हैं, उन्होंने भी मनुष्य को जीवन दर्शन कराया है. तभी तो निर्जीव पत्थर के खंभे में प्रकट होकर जीवन रक्षा की है और उन्होंने प्रत्येक प्राणी जगत को यह सूत्र दिया है कि विश्वास, श्रद्धा, भक्ति और नि:स्वार्थ के साथ की गई आराधना कभी विफल नहीं होती है. इसी तारतम्य में 30 अप्रैल 2026 को भगवान श्रीनृसिंह जयंती के अवसर पर मध्य प्रदेश जबलपुर स्थित नरसिंह भगवान मंदिर गोरखपुर में श्रीनृसिंह का प्राकट्य उत्सव बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया. जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए और भगवान नृसिंह के विग्रह रूप का दर्शन प्राप्त किया.
भगवान के प्राकट्य होने का भाव जानने के प्रयास में जुटे रहे Gen Z
श्रीनृसिंह भगवान के प्राकट्य उत्सव पर श्रद्धा-भक्ति और आस्था से लबरेज बड़ी संख्या वृद्ध, युवा, माताएं-बहनें आई हुईं थीं. अपने माता-पिता के साथ आए कई युवाओं में भगवन नृसिंह के प्रकटोत्सव का कारण और निर्जीव खंभे से प्रकट होने का भाव जानने की कोशिश की. आज के समय में जिन्हें जेन जेड पीढ़ी (Gen Z) कहा जाता है. यानि 1997 से 2012 के बीच जन्मे वे बच्चे जो आध्यात्म और विज्ञान के बीच अंतर ढूढ़ने का प्रयास करते हैं. जिन्हें “डिजिटल नेटिव्स” भी कहा जाता है. वे नृसिंह भगवान की भाव भंगिमा को देखकर आश्चर्य में थे और भगवान श्रीनृसिंह के प्रति भक्ति-आस्था का भाव प्रकट करने आई भीड़ के बीच से नरसिंह भगवान का दर्शन कर रही थी, उसी भीड़ में युवा भगवान की महिमा जानने का प्रयास कर रहे थे.
जगद्गुरु नृसिंहदेवाचार्य जी ने श्रीनृसिंह प्राकट्य का सार बताया
भगवान श्रीनृसिंह प्राकट्य उत्सव के अवसर पर जगतगुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने नृसिंह भगवान के प्राकट्योत्सव का सार बताया और उन्होंने कहा कि भगवान का प्राकट्य होने से धरती पर मंगल ही मंगल होता है. इस चराचर जगत में हर वस्तु व पदार्थ में श्रीहरि के दर्शन होते हैं. पत्र, पुष्प, श्रीवग्रह में भगवान का वास होता है. भक्त केवल अपनी भक्ति और समर्पण भाव से कार्य करे और भगवान को स्वीकार्य कर ले तो भगवान भक्त की हर विपदा को हर लेते हैं. जिस प्रकार अपने परम भक्त प्रह्लाद के कष्टों को भगवान श्रीनृसिंह ने अपने प्रेम व दुलार करते हुए हर लिया था.
अनुष्ठान के साथ भगवान श्रीनृसिंह की हुई महाआरती
नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में भगवान श्रीनृसिंह का प्राकट्य उत्सव बड़ी-धूमधाम के साथ मनाया गया. विधि-विधानपूर्वक पूजन, अर्चन एवं हवन सम्पन्न हुआ. इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु-भक्त उपस्थित हुए और भगवान श्रीनृसिंह के महामंत्र “ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्।।’’ के माध्यम स हवन किया. तत्पश्चात महाआरती का आयोजन किया गया. भगवान श्रीनृसिंह जयंती के अवसर पर आयोजित भण्डारे का सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया.

श्रीनृसिंह के इन महामंत्रों पर हुआ हवन अनुष्ठान
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्।।
ॐ नृम नरसिंहाय शत्रुबल विदीर्नाय नमः
ॐ नृम मलोल नरसिंहाय पूरय-पूरय
(उक्त महामंत्रों के माध्यम से भगवान श्रीनृसिंह के समक्ष हवन किया गया.)
नृसिंह का महत्व
मान्यता है कि नरसिंह जयंती के दिन भगवान नरसिंह की पूजा करने से भक्तों के अंदर का भय दूर होता है.
भगवान नरसिंह की कृपा से जीवन में आने वाले संकटों का नाश होता है.
भगवान किसी भी परिस्थिति में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं.
उनकी पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाले कष्टों से छुटकारा मिलता है.
नरसिंह जयंती के दिन व्रत रखने और भगवान नरसिंह की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है.
ग्रह-दोष से पीड़ित जातक के जीवन के सारे ग्रह-दोष से भी मुक्ति हो जाते हैं.
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