अमरनाथ यात्रा की शुरुआत भगवान भोलेनाथ के पवित्र दिन सोमवार व ज्येष्ठ पूर्णिमा पर प्रथम पूजा के साथ हुई. 3 जुलाई से यात्रा विधिवत प्रारंभ होगी. इस बार सुरक्षा, आरएफआईडी ट्रैकिंग, नई सुविधाएं और लेज़र शो प्रमुख आकर्षण हैं.
Source : MEDIA
Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Amarnath Yatra 2026: जम्मू-कश्मीर की वादियों का आनंद और आध्यात्मिक चेतना का केन्द्र बन चुके पवित्र अमरनाथ गुफा में जाने का अवसर आ गया है. गुफा के अंदर प्राकृतिक रुप से बनें हिमलिंग 2026 में करीब एक फीट बड़े दिखाई पड़ रहे हैं. जबकि 2025 में चार फीट के बताए जा रहे थे. 3 जुलाई से प्रारंभ हो रही अमरनाथ यात्रा-2026 से पहले गुफा के अंदर आध्यात्मिक माहौल दिखाई पड़ने लगा है. भगवान शिव का प्रथम पूजन जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपपाल मनोज सिन्हा ने हिमलिंग के सामने पूजन की थाली में आरती करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं. उनके साथ संत-महंतों ने भी शिवलिंग का ‘प्रथम पूजा’ किया है. गुफा के अंदर धूप-दीप, नैवेद्य, फूल और दिव्य रोशनी से हिम गुफा आध्यात्मिक वातावरण के साथ जगमगा रही है. बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु गुफा तक पहुंच चुके हैं.
3 जुलाई से प्रारंभ हो रही अमरनाथ यात्रा
2026 में अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों से प्रारंभ होगी और यह यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन खत्म होगी. कुल 57 दिनों की आध्यात्मिक यात्रा दोनों मार्गों से चलती रहेगी.
5 फीट ऊंचे बनें बाबा बर्फानी
अमरनाथ यात्रा में पहुंचे श्रद्धालुओं की मानें तो इस वर्ष बाबा बर्फानी का हिमलिंग करीब 5 फीट ऊंचा है. यात्रा शुरू होने तक इसके करीब साढ़े चार फीट का रह जाने का अनुमान है. पिछले साल यात्रा के पहले दिन हिमलिंग की ऊंचाई करीब 4 फीट थी. पिछले दो साल से कश्मीर में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ रही है. इसका असर हिमलिंग पर भी पड़ रहा है. जिसके कारण यात्रा शुरू होने से पहले ही हिमलिंग का आकार घटने लगता है. यहां बतादें कि अमरनाथ गुफा के भीतर प्राकृतिक हिमलिंग अभी से ऊपरी हिस्सा हल्का पिघला हुआ दिखाई पड़ रहा है. गुफा में श्रद्धालु दूर से दर्शन कर रहे हैं, यहां का वातावरण शांत और आध्यात्मिक है.
ऑन-द-स्पॉट किए जाएंगे रिजिस्ट्रेशन
अमरनाथ यात्रा के लिए ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन कराने वाले श्रद्धालुओं को आज 30 जून मंगलवार से जम्मू में टोकन दिए जाएंगे. टोकन लेने वाले श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन और आरएफआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया 2 जुलाई से प्रारंभ होगी. यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से अमरनाथ यात्रा मार्ग पर सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. हाई-टेक चेकपोस्ट, बैरिकेड्स, ड्रोन निगरानी, CCTV कैमरे से निगरानी की जा रही है. श्रद्धालुओं को पहाड़ी रास्ते पर चलने के सुरक्षा और सतर्कता का एहसास कराने का प्रयास किया जा रहा है.
शिव थीम पर लेजर एण्ड साउंड शो
यात्रियों को भगवान शिव की भक्ति में लीन रखने के लिए रात के समय शिव थीम पर भव्य लेज़र एण्ड साउंड शो का प्रदर्शन किया जा रहा है. जिसे श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ नीली और सुनहरी लेज़र किरणों से बना भगवान शिव और बाबा बर्फानी का दिव्य दर्शन कर रहे हैं. इस भक्ति भरे माहौल में भगवती नगर बेस कैंप से पहला जत्था रवाना किया गया है. जिनके हाथों में तिरंगा और धार्मिक ध्वज है. श्रद्धालु “हर हर महादेव” के जयकारा लगाते हुए निकल रहे हैं.

2029 में बदला-बदला नजर आएगा अमरनाथ जाने का रूट
बताया जा रहा है कि अमरनाथ यात्रा का रूट 2029 में बदला-बदला नजर आएगा. क्योंकि यहां जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए 2029 से बालटाल रूट पर केबल कार का संचालन शुरू कर दिया जाएगा. क्योंकि केंद्र सरकार अगले साल 2027 अप्रैल से 11.6 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट के निर्माण को लेकर तैयारी शुरू कर दी है. इस परियोजना पूरी होने के बाद यात्रियों को बालटाल से संगम टॉप तक पहुंचने में 5 से 8 घंटे की जगह 25 से 30 मिनट का समय लगेगा.
केन्द्र सरकार से डीपीआर को मिल चुकी है मंजूरी
मीडिया रिपोर्ट से पता चला है कि नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) ने प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार कर ली है. इसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है. सूत्रों के मुताबिक नवंबर-दिसंबर 2026 में टेंडर जारी कर दिए जाएंगे. अप्रैल 2027 से निर्माण शुरू हो जाएगा. 2029 तक इसे चालू करने का लक्ष्य रखा गया है.
गुफा के 2 किमी पहले होगा आखिरी स्टेशन
बताया जा रहा है कि केबल कार बालटाल के डोमेल गेट से चलकर संगम टॉप तक जाएगी. मुख्य गुफा और प्राकृतिक बर्फ के शिवलिंग की संवेदनशीलता को देखते हुए इसका आखिरी स्टेशन गुफा से करीब 2 किमी पहले बनाया जाएगा. अभी बालटाल से अमरनाथ गुफा तक 14 किमी पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है. केबल कार शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं को सिर्फ 2-3 किमी पैदल या पालकी से जाना होगा.
पैदल ट्रैक के समानांतर रोपवे नहीं बनेगा
सूत्रों के मुताबिक रोपवे मौजूदा पैदल मार्ग के बिल्कुल समानांतर नहीं बनेगा. इसे पहाड़ियों और गहरी खाइयों के ऊपर से सीधी हवाई लाइन में बनाया जाएगा. हालांकि, इसके टर्मिनल पैदल मार्ग से जुड़े रहेंगे, ताकि किसी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला जा सके.

