सड़क दुर्घटना को रोक लगाने के नहीं हो रहे प्रयास, 60 फीसदी मौतों से भी सचेत नहीं हो रहे जिम्मेदार
BY : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
NH-30 में मैहर जिला के अंतर्गत नादन के पास हुए बस दुर्घटना में 8 लोगों की मौत हो गई. इस सड़क हादसे से यात्रियों का दिल दहल गया. इस प्रकार से आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं. विगत दिनों जबलपुर मझगवां में ओवर स्पीड हाइवा ने ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी थी, जिससे 7 लोगों की जान चली गई थी. ओवर स्पीड वाहनों से आए दिन सड़कें खून से लाल हो रही हैं .
इसकी जानकारी यातायात, परिवहन विभाग सहित तमाम जिम्मेदारों को है. इसके बाद भी ओवर स्पीड पर लगाम लगाने में लापरवाही कर रहे हैं. मात्र एक इंटरसेप्टर व्हीकल से ओवर स्पीड पर लगाम लगाने का दिखावा किया जा रहा है. 2019 में भारत सरकार द्वारा जारी एक रिपोर्ट में साफ लिखा है कि सड़क हादसों में 60 फीसदी मौतें ओवर स्पीड वाहनों की टक्कर से हो रही हैं. इसके बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. इसलिए साल दर साल सड़क हादसों में मरने वाले और घायलों की संख्या बढ़ती जा रही है.
10 लाख से ज्यादा वाहन, इंटरसेप्टर व्हीकल एक
जबलपुर आरटीओ में 10 लाख से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड हैं. इतने वाहनों की ओवर स्पीड पकड़ने के लिए मात्र एक इंटरसेप्टर व्हीकल है, जिसे राष्ट्रीय राजमार्ग पर खड़ा कर दिया जाता है। इससे दिन भर में केवल 10 से 15 ओवर स्पीड वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है. जिम्मेदारों को पता है कि ओवर स्पीड से सबसे ज्यादा सड़क हादसे हो रहे हैं. आंकड़े भी यही बता रहे हैं. इसके बाद भी इंटरसेप्टर वाहनों की संख्या नहीं बढ़ाई जा रही है.
फिटनेस, लाइसेंस में भ्रष्टाचार
रिपोर्ट के मुताबिक अनफिट वाहनों से भी बड़ी संख्या में सड़क हादसे हो रहे हैं. आरटीओ में वाहनों के फिटनेस टेस्ट को कमाई का जरिया बना लिया गया है. यहाँ एक प्राइवेट व्यक्ति से वाहनों का फिटनेस कराया जा रहा है. बताया जाता है कि वह प्रत्येक वाहन से उगाही करता है. अगर किसी ने पैसे नहीं दिए तो उसकी गाड़ी में कई कमियाँ निकालकर अनफिट कर देता है. पैसे मिलने पर वह अनफिट वाहन को भी फिट वाहन होने का सर्टिफिकेट थमा देता है. ऐसे ही लाइसेंस जारी करने में भी खेल हो रहा है। बिना पैसे दिए कोई भी यातायात के नियम वाली परीक्षा पास नहीं होता. पैसे देने पर ही आवेदक परीक्षा पास कर पाता है.
हर साल बढ़ रही मरने वालों और घायलों की संख्या
साल दर साल सड़क हादसे बढ़ते जा रहे हैं. वर्ष 2021 में हुए सड़क हादसों में 467 की मौतें और 3756 लोग घायल हुए थे. 2022 में 481 की मौतें और 4181 लोग घायल हुए। 2023 में बढ़कर 545 मौत और 4753 लोग घायल हुए, जिनमें सबसे ज्यादा ओवर स्पीड वाहनों की टक्कर से मौतें हुई है.
नशाखोर वाहन चालक बेलगाम
सड़क दुर्घटनाएँ नशाखोरी के कारण भी हो रही हैं. अधिकांश सड़क हादसों में वाहन चालक नशे की हालत में पाए जाते हैं. यातायात के जिम्मेदार इस पर भी लगाम नहीं लगा पा रहे हैं. नशाखोर वाहन चालक खुद और दूसरों की जान के लिए भी खतरा बने हुए हैं. इन पर भी केवल दिखावे के लिए कार्रवाई हो रही है. यातायात विभाग हादसे के मुख्य कारणों को रोकने की कार्रवाई करने के बजाय राजस्व जुटाने पर ध्यान दे रहा है.
हादसों से सरकार को आर्थिक नुकसान
- > हादसे में घायल और मृतकों को मुआवजा देना पड़ता है.
- > सड़क हादसे के बाद इलाज व कानूनी प्रक्रिया में खर्च.
- > हादसे में अपंगता होने के कारण श्रम शक्ति का नुकसान.
- > इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़क, पुल क्षतिग्रस्त होने पर मरम्मत का खर्च.
- > बीमा कंपनियों का खर्च भी सरकारी खजाने से होता है.
हादसे से परिवार को नुकसान
- > हादसे में मौत होने पर परिवार को मानसिक आघात.
- > परिवार के मुखिया की मौत होने पर परिवार पर आर्थिक संकट.
- > दुर्घटना में अपंग होने पर नौकरी पेशा से वंचित.
- > घायल होने पर इलाज का बोझ, परिवार कर्ज में डूब जाता है.
किन वाहनों से कितने हादसे
- दो पहिया से दुर्घटना 37 प्रतिशत
- कार और जीप से दुर्घटना 24 प्रतिशत
- ट्रक और ट्रॉले से दुर्घटना 15 प्रतिशत

