सीएम मोहन यादव ने X पर पोस्ट कर कहा था-भोपाल, इंदौर की तर्ज पर जबलपुर-ग्वालियर में भी लागू होगी प्रणाली
BY : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Police News. जबलपुर.
MP News. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सूबे के मुखिया मोहन यादव ने X पर पोस्ट कर कहा था कि इंदौर और भोपाल में लागू हो चुके पुलिस कमिश्नर सिस्टम के बाद नए साल में जबलपुर और ग्वालियर में यह सिस्टम लागू कर दिया जाएगा. अपराध पर नकेल कसने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रहे हैं. सीएम ने इसे सुशासन और सुदृढ़ कानून व्यवस्था का संकल्प बताया था, लेकिन घोषणा के 8 माह बाद भी शहरवासी इस सिस्टम के लागू होने का इंतजार किए जा रहे हैं.
उनका यह इंतजार कब खत्म होगा कहा नहीं जा सकता है. गौरतलब है कि बड़े शहरों में अक्सर आपराधिक गतिविधियों की दर भी ज्यादा होती है. ज्यादातर आपातकालीन परिस्थितियों में लोग इसलिए उग्र हो जाते हैं, क्योंकि पुलिस के पास तत्काल निर्णय लेने के अधिकार नहीं होते। कमिश्नर प्रणाली में पुलिस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए खुद ही मजिस्ट्रेट की भूमिका निभाती है. प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का अधिकार पुलिस को मिलेगा तो आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर जल्दी कार्रवाई हो सकेगी. पुलिस अधिकारी कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होते हैं.
क्या है कमिश्नर प्रणाली सिस्टम?
आजादी से पहले भारत में अंग्रेजों ने मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया हुआ था. उस वक्त सारी न्यायिक शक्तियाँ पुलिस कमिश्नर के पास हुआ करती थीं. बाद में महानगरों का विकास होते ही वहाँ पर भी पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू कर दिया गया. जहाँ पर एडीजी स्तर के अधिकारी को सीपी बनाया जाता है. उसके बाद आईजी और डीआईजी स्तर के अिधकारियों के साथ अन्य अिधकारियों की पोस्टिंग होती है.
पुलिस को ये अधिकार मिलेंगे
- 1 –पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस के पास पाॅवर आ जाएगा। कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दे पर पुलिस कमिश्नर ही निर्णय ले सकेंगे. पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार को दिए गए मजिस्ट्रियल पॉवर पुलिस को मिल जाएँगे.
- 2 – गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और रासुका लगाने सहित अन्य महत्वपूर्ण कामों के लिए अभी थाने से प्रस्ताव पुलिस अधीक्षक फिर डीआईजी को भेजे जाते हैं और फिर इन्हें कलेक्टर कार्यालय भेजा जाता है, इसके बाद कलेक्टर के विवेक पर कार्रवाई की जाती है. पुलिस कमिश्नरी प्रणाली के बाद पुलिस कमिश्नर इस पर निर्णय ले सकेंगे.
- 3 – कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाने का सीधा अधिकार पुलिस दे सकेगी और नगर निगम को इस पर अमल करना होगा.
- 4 – पुलिस शांति भंग होने की आशंका में धारा 155 के तहत व्यक्ति पर कार्रवाई कर सकती है. ऐसी स्थिति में अभी जमानत के अधिकार एसडीएम को होते हैं, लेकिन कमिश्नरी के बाद यह अधिकार खत्म हो जाएँगे.
- 5 – धरना-प्रदर्शन की अनुमति देने का अधिकार पुलिस के पास आ जाएगा. आर्म्स, आबकारी को लेकर भी एनओसी देने के अधिकार पुलिस के पास आ जाएँगे. कार्रवाई के मामलों में मजिस्ट्रेट के अधिकार डीसीपी और एसीपी के पास होंगे.

