स्मार्ट सिटी जबलपुर के अधिकारी कन्सल्टेंट कंपनी नियुक्त होने के बाद भी डीपीआर नहीं बनवा पा रहे.
BY :DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Smart City Jabalpur Narmada Corridor:नर्मदा कॉरिडोर में पीडब्ल्यूडी विभाग ने अड़ंगा लगा दिया है और गौरीघाट से लेकर तिलवाराघाट तक के हिस्से को खुद बनाने का दावा करने लगा है, जिससे स्मार्ट सिटी के अधिकारी जिस कन्सल्टेंट कंपनी से डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनवा रहे थे, वह झमेले में फँस गई है, जबकि स्मार्ट सिटी के अधिकारियों को अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी के द्वारा बहुत पहले इस प्रोजेक्ट को खत्म करने के निर्देश मिले थे, लेकिन स्मार्ट सिटी के अधिकारियों की लेटलतीफी के चक्कर में यह प्रोजेक्ट आए दिन कोई न कोई अड़ंगेबाजी में फँस रहा है और इस प्रोजेक्ट को गति नहीं मिल पा रही है.
इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर अधिकारियों के द्वारा दिलचस्पी नहीं ली जा रही है, जिसके कारण इस प्रोजेक्ट पर नगर निगम, जबलपुर विकास प्राधिकरण, स्मार्ट सिटी के अिधकारी काफी मशक्कत कर चुके हैं और इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था. अब जब एक बार फिर नर्मदा कॉरिडोर को लेकर उम्मीद की किरण नजर आ रही थी तो एक बार फिर लोक निर्माण विभाग द्वारा अड़ंगा लगा दिया गया और आधे हिस्से को हथियाने का प्रयास शुरू हो गया है.
फंडिंग स्ट्रक्चर तय, अभी नहीं भेजी गई राशि
नमामि नर्मदे प्रोजेक्ट को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा फेज-1, 2 और फेज-3 में काम कराने का प्लान फाइनल कर दिया गया था. हर काम का फंडिंग स्ट्रक्चर तय किया गया था. यानी पहले फेज में काम करने के लिए करीब 400 करोड़ रुपए की राशि सुनिश्चित की गई थी.
पहले फेज में घाटों का उन्नयन, साफ-सफाई, नर्मदा बफर जोन में वृक्षारोपण, बायोडायवर्सिटी, लैंड स्कैप, लोक प्रसाधन का काम शामिल किया जाना था, वहीं दूसरे फेज में नर्मदा ग्राम, नर्मदा वाटिका और 15 किलोमीटर का नर्मदा पथ, नर्मदा रिसर्च सेंटर, बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन, वॉटर क्वॉलिटी मॉनिटरिंग सिस्टम, बायोरेमेडिएशन, पार्किंग के काम शामिल किए गए थे. वहीं तीसरे फेज में घाटों के डेवलपमेंट एवं कंजर्वेशन क्षेत्र का काम कराया जाना था.
एमपीआरडीसी अलग बना रहा प्लान
स्मार्ट सिटी अधिकारियों की मानें तो नर्मदा कॉरिडोर के आधे हिस्से का प्लान एमपीआरडीसी (मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन) द्वारा तैयार किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार को पत्र भी लिखा गया है. प्रदेश सरकार से पत्राचार का जवाब नहीं आया है, लेकिन यह बात निश्चित है कि नर्मदा कॉरिडोर का आधा हिस्सा पीडब्ल्यूडी के हवाले हो जाएगा. यानी जिस प्रोजेक्ट को 2024 में शुरू होने की उम्मीद की जा रही थी, वह प्रोजेक्ट अभी एक से दो साल तक शुरू नहीं हो पाएगा.
1042 करोड़ है प्रोजेक्ट की लागत
नमामि नर्मदे प्रोजेक्ट कम्पलीट करने में लगभग 1042 करोड़ रुपए खर्च करने का प्लान तैयार किया गया था. इस प्रोजेक्ट के तहत भटौली गौरीघाट से लेकर भेड़ाघाट तक विकसित किए जाने का प्लान बनाया गया था. नमामि नर्मदे प्रोजेक्ट की जद में आने वाले 17 घाटों का उन्नयन भी शामिल था. प्रोजेक्ट के तहत जितने भी विकास कार्य होंगे, उसमें नर्मदा के संरक्षण, संवर्धन एवं उन्नयन के लिए पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल किए जाने के निर्देश थे.
कन्सल्टेंट कंपनी पूरे प्रोजेक्ट के लिए नियुक्त हुई, अब होने लगा बंटवारा
स्मार्ट सिटी के अिधकारियों द्वारा भटौली गौरीघाट से लेकर भेड़ाघाट तक नर्मदा कॉरिडोर के लिए कन्सल्टेंट कंपनी नियुक्त की गई है. अब इस प्रोजेक्ट का बँटवारा होने लगा है. अब सवाल यह उठता है कि कन्सल्टेंट कंपनी को उक्त प्रोजेक्ट के बदले पूरा भुगतान किया जाएगा या फिर एमपीआरडीसी द्वारा नियुक्त की जा रही कन्सल्टेंट कंपनी का भुगतान भी स्मार्ट सिटी द्वारा नियुक्त की गई कंपनी के हिस्से की रकम काटकर किया जाएगा, यह सबसे बड़ा सवाल है.
प्रोजेक्ट एक नजर में
- > 2400 एकड़ जमीन में इसका निर्माण होना है.
- > 655 एकड़ सरकारी जमीन अधिग्रहित की जाएगी.
- > 421 एकड़ मौजूदा विकसित क्षेत्र है.
- > 610 एकड़ हरित क्षेत्र आरक्षित किया जाएगा.
- > 300 मीटर दूर नर्मदा से विकास कार्य होंगे.
कॉरिडोर में क्या रहेगी व्यवस्था?
- > 20 मीटर चौड़ा मार्ग और 8.5 किलोमीटर की लंबाई रखी गई है.
- > पैदल यात्रियों के लिए पाथवे बनाया जाएगा और दिव्यांग और वृद्धों के लिए ई-रिक्शा साइकिल ट्रैक बनेगा.
- > मार्ग के बीच में बैठक व्यवस्था और नर्मदा दर्शन के लिए व्यू-प्वॉइंट बनेंगे.
- > पाथ-वे में खान-पान के लिए स्टॉल और आराम करने के लिए आरामदायक चेयर लगाई जाएँगी.
- > कॉरिडोर के किनारे गार्डन, हरियाली विकसित की जाएगी.

