Gita Jayanti 2024: भगवत गीता का अनुरण करने पर जीवन की दिशा सकारात्मक रूप से बदल जाती है और मुश्किल राह भी आसान हो जाती है. क्योंकि गीता से कर्म करने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Gita Jayanti 2024: हिंदू धर्म में भगवत गीता को सबसे पवित्र ग्रंथ की श्रेणी में रखा गया है. साथ ही यह दुनिया का एकमात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसकी जयंती मनाई जाती है. हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है.
कुरुक्षेत्र की भूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिए थे, उसे ही गीता कहा जाता है. गीता कृष्ण के मुख-कमल से नि:सृप्त हुई है. गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, जिसका अनुसरण करने वाले को स्वत: हर समस्या का समाधान मिलने लगता है. इसलिए जिसने गीता के महत्व को समझ लिया उसका जीवन सफल हो गया.
नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में 40 साल से गीता का पाठ
मध्य प्रदेश जबलपुर स्थित श्रीनरसिंह मंदिर शास्त्रीब्रिज गोरखपुर में विगत 40 सालों से श्रीमद्भगवत गीता का संपूर्ण पाठ गीता जयंती के मौके पर आयोजित होता है. इसी अवसर पर शिशु स्तर से लेकर महाविद्यायलीन स्तर तक के विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगिता का आयोजन भी होता है. जिसमें श्लोक पठन, भाषण और लेख लिखने की प्रतिस्पर्धा होती है. इस आयोजन में जो भी विद्यार्थी उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है, उसे विशिष्ट अतिथियों के माध्यम से पुरुस्कृत भी किया जाता है. इस तरह के आयोजन होने से श्रीमद्भगवत गीता को समझने और युवाओं के बीच गीता के श्लोक पठन-पाठन करने की रुचि जागृत होगी. लेकिन इस दिशा में धार्मिक, सामााजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को कराने वाले लोग मौन हैं.
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
कृष्ण कहते हैं- कर्म पर तुम्हारा अधिकार है कर्म के फलों पर नहीं. इसलिए बिना फल की चिंता किए करो करते रहो.
क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
अर्थ: क्रोध से मनुष्य की मति-बुदि्ध मारी जाती है. स्मृति-भ्रम हो जाने से मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि का नाश हो जाने पर मनुष्य खुद अपना ही नाश कर बैठता है.
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
अर्थ: जब-जब धर्म का क्षय होता है और अधर्म बढ़ता है. तब-तब मैं (श्रीकृष्ण) धर्म के अभ्युत्थान के लिए अवतार लेता हूं.
सही कर्म का ज्ञान (कर्म योग)
गीता हमें सिखाती है कि बिना फल की चिंता किए अपना कर्तव्य ईमानदारी से करें, इससे तनाव कम होता है और काम में एकाग्रता बढ़ती है.
मानसिक शांति और संतुलन
गीता बताती है कि सुख-दुख, लाभ-हानि में समान भाव रखें. इससे जीवन में स्थिरता और शांति आती है.
आत्मज्ञान (Self-awareness)
गीता के अनुसार हम केवल शरीर नहीं, बल्कि आत्मा हैं. यह समझ डर, मोह और अहंकार को कम करती है.
निर्णय लेने की क्षमता
जैसे अर्जुन युद्ध के समय भ्रमित थे, वैसे ही हम भी जीवन में उलझते हैं.कृष्ण ने उन्हें सही मार्ग दिखाया.गीता हमें कठिन समय में सही निर्णय लेने की प्रेरणा देती है.
जीवन का उद्देश्य समझना
गीता सिखाती है कि जीवन का असली उद्देश्य केवल भौतिक सुख नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति है.
गीता हमें सिखाती है:
- कर्तव्य निभाओ
- मन को शांत रखो
- सही सोच विकसित करो
- और जीवन को अर्थपूर्ण बनाओ
मनोविज्ञान (Psychology) में योगदान
गीता में तनाव, चिंता और निर्णय-भ्रम का बहुत अच्छा विश्लेषण मिलता है. जैसे अर्जुन युद्ध के समय मानसिक तनाव में थे. आधुनिक मनोविज्ञान में इसे Cognitive Conflict (मानसिक द्वंद्व) कहा जाता है. श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया मार्गदर्शन Cognitive Reframing जैसा है (सोच बदलकर तनाव कम करना).
तनाव प्रबंधन (Stress Management)
“फल की चिंता मत करो” का सिद्धांत आधुनिक मनोविज्ञान में Mindfulness, Acceptance Therapy (ACT) से मेल खाता है. इससे कोर्टिसोल (stress hormone) कम होता है और मानसिक शांति बढ़ती है.
निर्णय लेने की क्षमता (Decision Science)
गीता सिखाती है कि भावना और कर्तव्य को अलग रखें, स्थिति को स्पष्ट सोच से देखें. यह Rational Decision Making Model से जुड़ा है, जिसमें भावनात्मक bias कम किया जाता है.
व्यवहार विज्ञान (Behavioral Science)
गीता कर्म पर जोर देती है, परिणाम पर नहीं. यह Intrinsic Motivation (आंतरिक प्रेरणा) को बढ़ाती है, जो लंबे समय तक स्थिर प्रदर्शन के लिए जरूरी है.
न्यूरोसाइंस (Neuroscience) दृष्टिकोण
प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (decision making brain area) को मजबूत करते हैं. अमिगडाला (fear response) की सक्रियता कम करते हैं. गीता का अभ्यास (चिंतन/ध्यान) मस्तिष्क को अधिक संतुलित बनाता है.
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