28 मार्च को चीन, म्यांमार, थाईलैंड, भारत में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. पहला भूकंप दोपहर 12.50 बजे आया, जिसकी तीव्रता 7.7 मापी गई. इसके 12 मिनट के बाद 6.4 तीव्रता का दूसरा भूकंप आया.
By : DB News Update| Edited By : प्रिंस अवस्थी
Myanmar Earthquake: चीन, म्यांमार, थाईलैंड, भारत में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. शुक्रवार (28 मार्च) को आए भूकंप से तबाही मची हुई है. इन झटकों में म्यांमार में हालात ज्यादा भयावह हो गए हैं, पहला भूकंप दोपहर 12.50 बजे आया, जिसकी तीव्रता 7.7 मापी गई. इसके 12 मिनट के बाद 6.4 तीव्रता का दूसरा भूकंप आया. वहां की सेना ने दुनिया से मदद की अपील की है. देश के कई इलाकों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है. इसके साथ ही थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में कई इमारतों के गिरने के बाद स्थिति गंभीर है.
बैंकॉक के जेजे मॉल चतुचक में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. यहां जेसीबी मशीनों के जरिए मलबा हटाया जा रहा है. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, अभी भी मलबे में 80 के आसपास लोग दबे हुए हैं.
बैंकॉक में 2 हजार बिल्डिंगों में आई दरार
बीबीबी के मुताबिक, बैंकॉक के अधिकारियों का कहना है कि चतुहाक में हाई-राइज बिल्डिंग ढहने से मलबे में दबे लोगों में से 15 के जीवित होने के संकेत मिले हैं. मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. अधिकारियों को कहना है कि भूकंप की वजह से दो हजार हाई राइज बिल्डिंगों में दरारें आने की शिकायतें मिली हैं. बिल्डिंगों के निरीक्षण के लिए इंजीनियरों को भेजा जा रहा है.
बैंकॉक में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
बैंकॉक में भूकंप से निर्माणाधीन बिल्डिंग गिरने के बाद वहां रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. राहत और बचाव कार्य के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें तैनात की गई हैं. बिल्डिंग ढहने के बाद से ही करीब 100 मजदूर लापता हैं, जिनमें से 9 की मौत हो चुकी है.
भूकंप आने का प्रमुख कारण क्या है?
भूकंप तब आते हैं जब पृथ्वी की पपड़ी को बनाने वाली विशाल ठोस चट्टानों की परतें, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है, एक-दूसरे के खिलाफ खिसकती हैं. जब ये प्लेट्स अलग-अलग गति और दिशाओं में चलती हैं, तो ऊर्जा जमा होती जाती है. जब यह ऊर्जा रिलीज होती है, तो पृथ्वी की सतह जोर से हिलने लगती है, जिसे भूकंप कहा जाता है. अगर यह ऊर्जा समुद्र के नीचे रिलीज होती है, तो इससे कई विशाल लहरें उठती हैं, जिन्हें सुनामी कहा जाता है.
म्यांमार में शुक्रवार को आए भूकंप के पीछे क्या कारण है?
म्यांमार भूकंप के लिए संवेदनशील है क्योंकि यह दो टेक्टोनिक प्लेटों – इंडिया और यूरेशिया प्लेटों के बीच स्थित है. वास्तव में, यह दुनिया के सबसे भूकंप-एक्टिव देशों में से एक है. इन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच की सीमा को सैगांग फॉल्ट के नाम से जाना जाता है. अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों के अनुसार सैगांग फॉल्ट एक लंबी, सीधी रेखा है जो लगभग 1,200 किमी उत्तर से दक्षिण की ओर मांडले और यांगून जैसे शहरों के साथ चलती है.
स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग” के कारण हुआ
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की प्रोफेसर और भूकंप विशेषज्ञ जोआना फॉरे वॉकर ने रॉयटर्स को बताया, “इंडिया प्लेट और यूरेशिया प्लेट के बीच की सीमा लगभग उत्तर-दक्षिण दिशा में चलती है, जो देश के बीच से होकर गुजरती है.” संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, म्यांमार में भूकंप “स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग” के कारण हुआ, जो इंडिया और यूरेशिया प्लेटों के बीच हुआ. इसका मतलब है कि ये दो टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के खिलाफ साइडवेज़ रगड़ती हैं.
2012 के अंत में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया था
एनएचके वर्ल्ड-जापान की रिपोर्ट में बताया गया कि जापान की मौसम एजेंसी ने भी पुष्टि की कि शुक्रवार को म्यांमार में आया भूकंप भूमि के तिरछा फिसलने, या “स्ट्राइक-स्लिप” फॉल्ट्स के कारण हुआ. सगाइंग ने हाल के वर्षों में कई भूकंपों का सामना किया है. 2012 के अंत में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे.
भारत ने 5 खेप में भेजी राहत सामग्री
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारतीय नौसेना के जहाज INS सतपुड़ा और INS सावित्री ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत 30 टन रिलीफ सामग्री म्यांमार के यांगून बंदरगाह भेजे गए. इसके अलावा 118 सदस्यीय फील्ड हॉस्पिटल यूनिट आगरा से म्यांमार के मांडले शहर पहुंची.

