जबलपुर नगर पालिका निगम में अउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर 1 अरब 86 करोड़ से ज्यादा का गबन किए जाने की चर्चा गर्म, पिछले 5 साल के आकलन में हुआ है बड़ा खुलासा
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Municipal Corporation Jabalpur: एमपी जबलपुर के नगर निगम में अजब-गजब का खेला चल रहा है. यहां आउटसोर्स कर्मचारियों का बेवजह मेला लगा हुआ है. इन आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है. यह खुलासा नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल के एईबीएएस (आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम) पर दर्ज कर्मचारियों की संख्या से हुआ है. आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या के मामले में पोर्टल और निगम के विभागों के आंकड़े मेल नहीं खा रहे हैं. पोर्टल में नियमित, विनियमित, संविदा, दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्स को मिलाकर 7105 कर्मचारी ही रजिस्टर्ड हैं, जबकि नगर निगम हर माह 8279 कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कर रहा है. पोर्टल की तुलना में 1178 अधिक कर्मचारियों का भुगतान किया जा रहा है. इतना ही नहीं पोर्टल में जो आउटसोर्स कर्मचारी रजिस्टर्ड हैं, उनमें भी 1635 कर्मचारी आधार बेस अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं, यानी निगम अधिकारी हर माह 2813 आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर खेला कर रहे हैं. इन बोगस कर्मचारियों को अकुशल श्रेणी में रखकर भी सैलरी का आकलन किया जाए तो एक साल में ही 37 करोड़ 26 लाख 66 हजार 240 रुपए का घोटाला हो रहा है. निगम में यह धांधली सालों से चल रही है, लेकिन पिछले 5 साल की ही बात की जाए तो अधिकारी 1 अरब 86 करोड़ 33 लाख 31 हजार 200 रुपए रुपए का घोटाला कर चुके हैं. सवाल यह उठ रहा है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर इतने बड़े घोटाले को अंजाम देने में किन-किन अधिकारियों की मिलीभगत है, अगर इस मामले की तह तक जाकर जांच की जाए तो निगम इतिहास के सबसे बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है.
खाईबाज अधिकारियों की क्यों नहीं हो रही जांच?
नगर निगम में एईबीएएस पोर्टल शुरू हुए महीनों बीत गए हैं. इस पोर्टल में जितने कर्मचारी रजिस्टर्ड हैं उनके अलावा अतिरिक्त 1178 आउटसोर्स कर्मचारियों को हर माह कैसे भुगतान हो रहा है, यह जांच का विषय है, लेकिन नगर निगम अधिकारी इसकी सुध ही नहीं ले रहे हैं. इतना ही नहीं जितने आउटसोर्स कर्मचारी रजिस्टर्ड हैं, उनमें से 1635 कर्मचारियों को भी आधार बेस अटेंडेंस के बिना लगातार भुगतान कैसे किया जा रहा है, इस पर भी विचार नहीं किया जा रहा है. ये तमाम बिंदु इस ओर इशारा कर रहे हैं कि निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर बड़ा घोटाला चल रहा है.
कमिश्नर द्वारा 600 कर्मचारियों की हुई थी पूछ-परख
नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार द्वारा विगत दिनों आउटसोर्स कर्मचारियों के फर्जीवाड़ा की भनक लग गई थी, जिसके तहत संबंधित विभागीय अधिकारियों से 600 कर्मचारियों की फर्जी तरीके से हाजिरी भरते रहे और ठेकेदार को फर्जी आउटसोर्स कर्मचारियों का भुगतान भी होता रहा. कमिश्नर यदि इस मामले की तह तक जाते तो और भी खुलासा हो सकता था. क्योंकि यह खेल लंबे समय से चल रहा है.
स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या में सबसे ज्यादा हेराफेरी स्वास्थ्य विभाग में किए जाने की चर्चा है, क्योंकि स्वास्थ्य अधिकारी मात्र 3500 कर्मचारियों की संख्या बता रही हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग में 3910 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं. इसी प्रकार फायर, अतिक्रमण और स्टोर विभाग में लगे आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या में घालमेल किए जाने की चर्चा है. इन सभी विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी तैनात ही नहीं हैं और उनके नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई हर माह निकाली जा रही है.
ऐसी है वस्तुस्थिति
- > एईबीएएस पोर्टल पर नगर निगम के नियमित, विनियमित, संविदा, दैनिक वेतन भोगी और आउटसोर्स के कुल 7105 कर्मचारी रजिस्टर्ड हैं।
- > निगम के रिकॉर्ड में नियमित और आउटसोर्स के कुल 8279 कर्मचारी काम कर रहे हैं.
- > नियमित, विनियमित, संविदा, दैनिक वेतन भोगी मिलाकर कुल 2504 कर्मचारी हैं.
- > एईबीएएस पोर्टल में आउटसोर्स के सिर्फ 4601 कर्मचारी रजिस्टर्ड हैं, यानी 1178 कर्मचारी पोर्टल में रजिस्टर्ड ही नहीं हैं.
- > 16 जनवरी 2026 की स्थिति में नगर निगम के 2504 और आउटसोर्स के 2966 कुल 5470 कर्मचारी और अिधकारी एईबीएएस पोर्टल पर हाजिरी लगा रहे हैं.
- > आउटसोर्स के कुल कुशल श्रमिक 1380 कार्यरत हैं, जिन्हें 472 रुपए प्रतिदिन वेतनमान के हिसाब से आउटसोर्स कंपनी को हर साल 23 करोड़ 44 लाख 89 हजार 600 रुपए का भुगतान किया जा रहा है.
- > स्वास्थ्य, अतिक्रमण, उद्यान आदि विभागों में 4395 अकुशल श्रमिक कार्यरत हैं, जिन्हें 368 रुपए की दर के हिसाब से मजदूरी दी जा रही है और इन पर 58 करोड़ 22 लाख 49 हजार 600 रुपए सालाना खर्च किए जा रहे हैं.
- > नगर निगम में कुशल और अकुशल आउटसोर्स कर्मचारियों की कुल संख्या 5779 है, जिनके लिए नगर निगम के द्वारा आउटसोर्स कंपनियों को हर साल 81 करोड़ 67 लाख 39 हजार 200 रुपए का भुगतान किया जा रहा है.
- > विभागीय गणना के अनुसार 5779 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं.
विभागवार आउटसोर्स कर्मचारियों के आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग -3910
ड्राइवर, स्टोर -804
उद्यान-220
कम्प्यूटर ऑपरेटर -341
फायर-123
सिक्युरिटी-169
अतिक्रमण-100
प्रकाश विभाग-105
स्वच्छता सेल -07
कुल- 5779

