सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जबलपुर नगर निगम के अधकारी शेल्टर होम बनाने के लिए जगह ढूढ़ रहे, जमीनी स्तर पर नहीं हो रहा काम
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Supreme Court Order on Dogs: आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को आदेश दिया गया था और स्कूल, कॉलेज, अस्पतालों और बस स्टैंड जैसी जगहों से श्वानों को हटाने के निर्देश दिए थे. इसके लिए राज्य सरकारों को 6 से 8 सप्ताह का समय दिया गया था. न्यायालय से आदेश हुए एक माह से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन नगर निगम ने अभी तक सिर्फ कागजी कार्रवाई में उलझा हुआ है. जमीनी स्तर पर श्वानों को रखने और उन्हें पकड़ने की दिशा में तो कोई काम हो ही नहीं रहा है. नगर निगम जबलपुर के द्वारा कमेटी बना ली गई. नोडल भी नियुक्त हो गए, लेकिन असल जरूरत शेल्टर होम की है, जिसको लेकर प्लान तक नहीं बना है. अब यह समझ से परे है कि निगम आवारा श्वानों को सार्वजनिक स्थानों से पकड़कर आखिर रखेगा कहां. दरअसल निगम के पास फिलहाल एक मात्र शेल्टर होम है जिसकी क्षमता 55 श्वानों को रखने की है, यह टीकाकरण और नसबंदी वाले श्वानों से ही भरा रहता है.
30 हजार आवारा श्वानों की कैसे होगी व्यवस्था
शहर में आवारा श्वानों की संख्या 60 हजार के पार पहुंच चुकी है. इनमें से करीब आधे यानी करीब 30 हजार आवारा श्वान उन्हीं स्थानों पर नजर आते हैं, जहां से इन्हें हटाने के निर्देश दिए हैं. यानी ज्यादातर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और बस स्टैंड जैसी सार्वजनिक जगहों पर ही मंडराते नजर आते हैं. इतनी बड़ी तादाद में स्लाटर हाउस या शेल्टर होम कहां और कैसे बनेंगे, इस बात को लेकर भी संशय की स्थिति बनती जा रही है.
कागजों पर बन रहा प्लान
आवारा श्वानों को लेकर नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग अभी तक कागजों में ही प्लान बना रहा है. यही वजह है कि जो सबसे शेल्टर होम और एबीसी जैसे सेंटरों को बढ़ाने की दिशा में ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इनके निर्माण को लेकर न जगह चिह्नित की गई, न ही कोई प्लानिंग हो सकी है. नगर निगम ने सिर्फ नोडल अधिकारी और निगरानी समिति बना दी है.
होने चाहिए 8, अभी है सिर्फ एक एबीसी सेंटर
केंद्र ने एबीसी (एनीमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर के लिए जो गाइडलाइन तय की है, उसके अनुसार हर दस वार्ड में एक एबीसी सेंटर होना चाहिए. शहर में कुल 79 वार्ड हैं. इस हिसाब से 8 एबीसी सेंटर होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में नगर निगम के पास सिर्फ एक ही है. इस वजह से ही डॉगों की नसबंदी का काम गति नहीं पकड़ पा रहा है.
हर माह 2270 लोगों को काटते हैं डॉग
नेशनल हेल्थ मिशन की रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर में हर महीने 2270 डॉग बाइट्स की घटनाएं होती हैं. 2024 में 13619 लोगों को कुत्ते ने काटा था. डॉग बाइट्स की ये घटनाएं साल दर साल बढ़ती ही जा रही हैं. रैबीज के कारण कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. बावजूद इसके नगर निगम ने रेबीज फ्री सिटी बनाने का प्लान तैयार करने में इतनी देरी कर दी कि फंड जारी नहीं हो पा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश क्या हैं
सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 के आदेश में राज्यों को आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए मानवीय तरीके अपनाने के निर्देश दिए. इसमें स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और बस स्टैंड जैसी जगहों से कुत्तों को हटाकर बाड़ाबंदी करने और उन्हें वापस वहीं न छोड़ने का आदेश दिया था. केवल रैबीज संक्रमित या आक्रामक कुत्तों को शेल्टर में रखने की बात आदेश में कही गई है. व्यवस्था के लिए 6 से 8 सप्ताह का समय दिया गया है.

