गुरु नानक जयंती सिख धर्म का प्रमुख पर्व माना गया है, जो एकता, समानता और सेवा का संदेश देता है.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Guru Nanak Jayanti: सिख धर्म में गुरु नानक जयंती को गुरु पर्व के नाम से जाना जाता है. यह सिख धर्म के सबसे पवित्र उत्सवों में से एक माना गया है. इस दिन सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु गुरु नानक देव के जन्मोत्सव के रूप में सिख धर्म के अनुयायी मनाते हैं. यह पर्व हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है.
गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी में ननकाना साहिब में हुआ था. बचपन में ही उन्होंने समाज में व्याप्त अन्याय, अंधविश्वास और असमानता को देखकर लोगों को सच्चे ईश्वर और मानवीय मूल्यों की राह दिखाने का संकल्प लिया.
जीवन का सच्चा धर्म क्या है?
गुरु नानक देव जी से शिक्षा मिलती है कि एक ओंकार सतनाम अर्थात् ’ईश्वर एक है’ के सिद्धांत पर आधारित है. उन्होंने जात-पात, पाखंड, और धार्मिक कट्टरता का विरोध किया. उनके उपदेशों से यही सार निकलकर आता है कि — सत्य बोलो, करुणा रखो, और सबके साथ समान व्यवहार करो. उन्होंने कहा कि सेवा और नाम-सिमरन ही जीवन का सच्चा धर्म है.
कई देशों तक फैला उनका संदेश
अनुयायियों से पता चला है कि गुरु नानक देव जी ने मानवता का संदेश फैलाने के लिए चार बड़ी यात्राएँ की थीं. इन यात्राओं में उन्होंने भारत के अलावा तिब्बत, श्रीलंका, अरब और मक्का-मदीना तक का भ्रमण किया था. उन्होंने इन यात्राओं के माध्यम से सभी धर्मों के अनुयायियों को प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश दिया.
गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित हुए उपदेश
गुरु नानक देव जी के उपदेश और भजन आगे चलकर ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में संकलित किए गए. यह ग्रंथ सिख धर्म का सर्वोच्च ग्रंथ है, जिसमें उनके विचार आज भी जीवन का मार्गदर्शन करते हैं. उनकी वाणी केवल सिखों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा है.
आज भी उनका संदेश प्रासंगिक
गुरु नानक जयंती के अवसर पर गुरुद्वारा-शिक्षण संस्थान, सामाजिक संस्थानों में अखंड पाठ किए जाने की परंपरा है, जो लगातार 48 घंटे तक किया जाता है. इसके बाद नगर कीर्तन संदेश यात्रा निकाली जाती है, जो विभिन्न मार्गों में संदेश देते हुए निकलती है और गुरु ग्रंथ साहिब को पालकी में रखकर श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए नगर भ्रमण करते हैं. इस दिन जगह-जगह लंगर का विशेष आयोजन किया जाता है. जहाँ हर धर्म और जाति के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं.
यह पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि गुरु नानक जी की शिक्षाओं को जीवन में उतारने का अवसर है. उनकी विचारधारा हमें एकता, समानता और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

