कुंडली में हर भाव का अपना अलग महत्व होता है. जानते हैं कुंडली का सातवां भाव क्या कहता है!
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Kundali: कुंडली के हर भाव का अपना अलग महत्व है. कुंडली में कुल 12 भाव होते हैं. कुंडली 12 भावों को घर भी कहा जाता है. इन 12 भावों से व्यक्ति के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के बारे में पता चलता है.
कुंडली के सातवें भाव में अगर मंगल परेशानी
कुंडली का सातवां भाव विवाह और पार्टनरशिप का भाव है. इस भाव के स्वामी शुक्र हैं और इस भाव के कारक शुक्र और बुध हैं. कुंडली के सातवें भाव में अगर मंगल, राहु हो तो काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
इस ग्रह के जातक को भूत-पेत, जादू टोने जैसी परेशानी
कुंडली में सप्तम भाव में राहु-केतु, मंगल, शनि पीड़ित अवस्था में हो तो जातक को भूत-पेत, जादू टोने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
शनि, राहु, केतु या मंगल में से कोई भी एक ग्रह सप्तम स्थान में हो तो शुभ प्रभाव नहीं मिलता है. इस दौरान बुरी आत्माएं आपको परेशान करने लग सकती हैं.

