चैत्र नवरात्रि के आखिरी दो दिन अष्टमी और नवमी माता की पूजा के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा| Edited By : प्रिंस अवस्थी
Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि के नौ दिन बेहद पवित्र और शक्ति साधना के लिए महत्वपूर्ण माने गए हैं. माता रानी अपने भक्तों के बीच पृथ्वी लोक पर ही रहती हैं. ग्रंथों में बताया गया है कि चैत्र नवरात्रि की सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर देवी पूजा के साथ ही श्रद्धानुसार व्रत या उपवास किया जाए तो पूरे नौ दिन व्रत-उपवास करने जितना पुण्य फल प्राप्त हो जाता है. यही वजह है कि नवरात्रि की अष्टमी और नवमी बहुत खास मानी गई है.
चैत्र नवरात्रि अष्टमी 2025
चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी 5 अप्रैल 2025 शनिवार को है. नवरात्रि की दुर्गाष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. दुर्गा अष्टमी के दिन नौ छोटे कलश स्थापित किये जाते हैं तथा उनमें देवी दुर्गा की नौ शक्तियों का आह्वान किया जाता है. दुर्गा अष्टमी पूजा के समय देवी दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा की जाती है.
चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि शुरू – 4 अप्रैल 2025, रात 8.12
चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि समाप्त – 5 अप्रैल 2025, रात 7.26
संधि पूजा मुहूर्त – रात 07.02 – रात 07.50
- शुभ – सुबह 7.41 – सुबह 9.15
- चर – दोपहर 12.24 – दोपहर 1.58
- लाभ – दोपहर 1.58 – दोपहर 3.33
- अमृत – दोपहर 3.33- शाम 5.07
चैत्र नवरात्रि नवमी 2025
चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी 6 अप्रैल 2025 शनिवार को है. इस बार राम नवमी के दिन ही चैत्र नवरात्रि महानवमी पूजा भी होगी. दुर्गा नवमी मां दुर्गा की 9वीं शक्ति मां सिद्धिदात्री को समर्पित है.
चैत्र शुक्ल नवमी तिथि शुरू – 5 अप्रैल 2025, रात 7.26
चैत्र शुक्ल नवमी तिथि समाप्त – 6 अप्रैल 2025, रात 7.22
- राम नवमी मध्याह्मन मुहूर्त – सुबह 11.08 – दोपहर 1.39
- चर – सुबह 7.40 – सुबह 9.15
- लाभ – सुबह 9.15 – सुबह 10.49
- अमृत – सुबह 10.49 – दोपहर 12.24
- शुभ – दोपहर 1.58 – दोपहर 3.33
नवरात्रि की अष्टमी-नवमी के नियम
- अष्टमी और नवमी पर तामसिक भोजन न करें
- इन दो दिनों में अनाज नहीं खाना चाहिए, फलाहार ही करें.
- इन दिनों में शराब, तंबाकू और हर तरह के नशे से दूर ही रहना चाहिए.
- अष्टमी और नवमी का व्रत रखा है तो दो दिन तक दोपहर में सोएं नहीं. माता की भक्ति करें.
- दोनों दिनों में से किसी भी एक दिन कन्या पूजन करें और नवमी के दिन हवन के बाद ही व्रत का पारण करें.
इन नियमों का पालन करें
- खाना पकाने के दौरान कम मात्रा में केवल सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करना चाहिए.
- प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों से बचें.
- उबालने या भूनने जैसी सरल खाना पकाने की विधियों को प्राथमिकता दें.
- पानी, नारियल पानी और ताजे जूस का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी दूर होने में मदद मिलेगी.
- संतुलित पोषण के लिए फलों और डेयरी उत्पादों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए.
- नवरात्रि व्रत के दौरान सही आहार का पालन करना इतना भी मुश्किल नहीं है. सब्जियों को सही जानकारी से आप अपने सेहत और आध्यात्मिक अनुशासन
- दोनों को बनाए रख सकते हैं. एक स्वच्छ और सात्विक आहार आपको भक्तिपूर्वक व्रत रखने के साथ ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करती है.
नवरात्रि व्रत के दौरान आप कौन-सी साग खा सकते हैं?
साग अनुमति
आलू आसानी से पचने के साथ व्रत के भोजन काफी उपयोग किया जाता है.
शकरकंदी फाइबर से भरपूर होने की वजह से यह आपको लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता.
कच्चा केला सामान्य सब्जियों का के लिए अच्छा ऑपशन
कद्दू प्रकृति में हल्का और सात्विक भोजन
लौकी यह हाइड्रेटिंग है और पेट के लिए हल्का और अच्छा है.
खीरा शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है.
टमाटर व्रत के दौरान बनने वाली करी में आमतौर पर प्रयोग किया जाता है.
पालक पोष्टिकता से भरपूर.
नवरात्रि व्रत के दौरान इनके सेवन से बचें?
प्याज
लहसुन
बैंगन
हरे मटर
मक्का
शिमला मिर्च
गाजर और बीन्स
नियमित नमक आधारित व्यंजन
उपरोक्त जानकारी व्रती महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी हैं. क्योंकि उन्हें पूरे 9 दिनों तक व्रत रखना होता है.
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