मान्यता है कि मंत्रों के प्रभाव से समस्त कार्य सिद्ध हो जाते हैं सुख, समृद्धि और सफलता के रास्ते खोलता है
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Holika Dahan 2025: सनातन धर्म में होलिका दहन से तात्पर्य यह है कि भगवान की भक्ति से जो दूर करे. उसे अग्नि में समाहित कर दो. उसका निर्णय अग्नि स्वयं करेंगी. इसी उद्देश्य को लेकर हर वर्ष होलिका दहन का आयोजन किया जाता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और पीढ़ी दर पीढ़ी इस भक्तिमय वातावरण में मनाने की परंपरा है. होलिका दहन 13 मार्च 2025 को किया जाएगा. हालिका दहन के दिन केवल अपनी बुराई का अंत करने का समय नहीं है. बल्कि कुछ प्राप्त करने का दिन भी है. इस रात कुछ खास मंत्रों का यदि नियमानुसार जाप किए जाए तो कार्य सिद्ध होते हैं. नौकरी, धन, व्यापार वृद्धि में आ रही बाधा दूर होती है.
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै: अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।
होलिका दहन की रात इस मंत्र का उच्चारण एक माला, तीन माला या फिर पांच माला विषम संख्या में करें. मान्यता है कि इसके प्रभाव से समस्त कार्य सिद्ध हो जाते हैं सुख, समृद्धि और सफलता के रास्ते खोलता है.
होलिका दहन की रात होलिका की पूजा करें और फिर ऊं नमों भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें. कहते हैं ये उपाय हर विपदा से व्यक्ति की रक्षा करता है, संकट उसे छू नहीं पाते हैं.
विरोधियों को मात देने का अचूक उपाय
कई दिनों से नौकरी में सफलता नहीं मिल रही है, विरोधी काम में बाधा डाल रहा है तो होलिका दहन की रात ‘ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्’ का रुद्राक्ष की माला से 108 बार जाप करें. मान्यता है इससे सर्व कार्य सिद्ध होते हैं.
भय और समस्या से मुक्ति पाने के लिए होलिका दहन की रात में गायत्री माता के महामंत्र ‘ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्’ का जाप करना लाभदायी होता है.
दहन के लिए ये है मुहूर्त सबसे शुभ
इस साल होलिका दहन 13 मार्च 2025 को रात 11 बजकर 26 से देर रात 12 बजकर 30 मिनट के बीच करना श्रेष्ठ होगा. इस दिन भद्रा काल 13 घंटे रहेगा, इसलिए दहन के लिए ये मुहूर्त सबसे शुभ है.
होलिका दहन के समय ॐ होलिकायै नम: का जाप करना चाहिए, इसके बाद अपनी मनोकामना बोलकर होलिका में नारियल अर्पित करना शुभ होता है.
होलिका दहन के मंत्र
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:,
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।
होलिका दहन के दिन इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें. इस मंत्र का जप करने के लिए आप एक तुलसी की माला लें इसके बाद अपने घर के मंदिर में बैठकर इसका जप कम से कम 108 बार करें. साथ ही होलिका की परिक्रमा करते हुए भी इस मंत्र का जप कर सकते हैं. इस मंत्र का जप करने से घर परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है.
वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव।।
होलिका दहन का महत्व
होलिका दहन की राख जब ठंड़ी हो जाए तो उसे अपने घर लाकर उस विभूति को अपने शरीर पर लगाएं और शरीर पर लगाते समय इस मंत्र का जप जरुर करें.
ऊं नमों भगवते वासुदेवाय नम:
होलिका दहन की रात भगवान विष्णु के इस मंत्र का जप जरुर करें। होलिका की परिक्रमा करते हुए मन ही मन इस मंत्र का उच्चारण करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है.
ओम होलिकायै नम:
अगर आपकी कोई मनोकामना है तो होलिका की परिक्रमा करते हुए इस मंत्र का जप करें और एक नारियल इस दौरान अपने हाथ में रखें. इस मंत्र का जप करके हुए परिक्रमा कर नारियल को होलिका में अर्पित कर दें.
ओम नृम नरसिंहाय शत्रुबल विदीर्नाय नमः
होलिका दहन के समय परिक्रमा करते हुए भगवान नरसिंह के इस मंत्र का जप जरुर करें. मान्यता है कि इस मंत्र का जप करने से आपके शत्रु कमजोर होते हैं. साथ ही आरोग्य सुख प्राप्त होता है.
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