9 दिन भक्तजन शक्ति की साधना कर धर्म और आध्यात्मिकता में लीन रहते हैं. इस दौरान घटस्थापना शुभ मुहूर्त में करना शुभ फलदायी होता है
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Chaitra Navratri 2025: हिंदुस्तान सहित पूरी दुनिया में हिंदू धर्म मानने वाले बड़ी श्रद्धा भाव से चैत्र नवरात्रि का त्योहार मनाते हैं. नवरात्रि शक्ति की देवी मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित है, जिसमें प्रत्येक दिन एक अलग देवी को समर्पित है. इन 9 दिनों में व्रत रखकर लोग माता की आराधना करते हैं, मान्यता है कि देवी मां इस दौरान अपने भक्तों की हर मुरादें पूरी करती है.
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का खास महत्व है, इसे शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए तभी नौ दिन की पूजा सफल होती है. इस साल चैत्र नवरात्रि में 2 घटस्थापना मुहूर्त बन रहे हैं.
चैत्र नवरात्रि 29 या 30 मार्च 2025 कब ?
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को शाम 4.27 मिनट से होगी और 30 मार्च 2025 को दोपहर 12.49 मिनट पर समाप्ति होगी.
नवरात्रि की शुरुआत सदा उदयातिथि से होती है ऐसे में चैत्र नवरात्रि 30 मार्च 2025 से शुरू होगी, इसी दिन घटस्थापना की जाएगी.
चैत्र नवरात्रि 2025 कलश स्थापना मुहूर्त
घटस्थापना मुहूर्त सुबह 6.13 – सुबह 10.22
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12.01 – दोपहर 12.50
नवरात्रि में घटस्थापना का सही समय
प्रतिपदा तिथि के दिन का पहला एक तिहायी भाग घटस्थापना हेतु सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। यदि किसी कारणवश यह समय उपलब्ध नहीं है, तो अभिजीत मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है.
नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि में माता की आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है. इस दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिससे भक्तों को शक्ति, ज्ञान और समृद्धि प्राप्त होती है.
नवरात्रि में 9 शक्ति की पूजा का विधान
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति. चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति.महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।।
नवरात्रि के प्रत्येक दिन का एक अलग दुर्गा अवतार होता है, जैसे शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री.
नवरात्रि में किन चीजों को खरीदने से परहेज करें?
चमड़े (लेदर) से बनी वस्तुएं- जिसमें बेल्ट, जूते, पर्स जैसी चीजें शामिल हैं, इसलिए इन्हें खरीदना या इस्तेमाल करना धार्मिक नजरिए से अशुभ माना जाता है.
काले रंग की वस्तुएं- काला रंग नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है, जबकि नवरात्रि में लाल, पीला और नारंगी रंग शुभ होते हैं.
नुकीली या धारदार वस्तुएं- चाकू, कैंची या लोहे के भारी सामान खरीदने से बचना चाहिए, ये घर में नकारात्मक ऊर्जा लाने का काम करते हैं.
शराब और मांसहारी पदार्थ- नवरात्रि के दौरान सात्विकता का पालन करना चाहिए. इस दौरान ऐसा भोजन करें जो सात्विक होने के साथ पोष्टिकता से भरा हो. शराब या मांस का सेवन नहीं करना चाहिए. धार्मिक नजरिए से इन पदार्थों का सेवन करना अशुभ माना जाता है.
अनावश्यक खर्च- इस दौरान किसी भी तरह के दिखावे या फालतू खरीदारी से बचना चाहिए, क्योंकि नवरात्रि साधना और संयम का त्योहार है.
नवरात्रि के दौरान इन छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना सही नहीं माना जाता है. हालांकि ये सभी नियम धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिनमें क्षेत्र के अनुसार बदलाव भी देखने को मिलता है.
नवरात्रि केवल पूजा का समय नहीं, बल्कि खुद को अनुशासित और सकारात्मक बनाने का शुभ अवसर है. ऐसे में अगर आप पूरे नियमों के साथ इस त्योहार को मनाते हैं, तो इसका आध्यात्मिक लाभ कई गुना तक बढ़ जाता है.
चैत्र नवरात्रि में भजन-कीर्तन और रामायण का पाठ करने का महत्व
चैत्र नवरात्रि के दिनों में भजन-कीर्तन के साथ रामायण का नवान्ह पाठ करना शुभ माना गया है. नवरात्रि के दिन रामायण का पाठ करने से देवी मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्त को आशिर्वाद प्रदान करती हैं. देवी मंदिरों के अलावा अन्य कई जगह रामायण पाठ के लिए विद्वान पंडित नौ दिनों तक बैठाकर पाठ कराने की परंपरा है.
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