आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है दशहरा. इस साल 1 अक्टूबर को दशहरा का पर्व मनाया जाएगा.
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Dussehra 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार दशहरा हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के मुताबिक भगवान राम ने इस दिन लंका के राजा रावण का वध कर असत्य पर सत्य की जीत हासिल की थी.
जिसके बाद से दशहरा उत्सव मनाने की परंपरा चल पड़ी. परंपराओं के अनुसार दशहरा के दिन रावण, उसके भाई कुंभकर्ण और बेटे मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है. इसी समय पर दूर्गा पूजन का समापन भी होता है. जिसमें शस्त्र पूजा करने का विधान भी है.
चलिए जानते दशहरा कब है और शस्त्र पूजा का समय क्या है?
पंचांग के मुताबिक आश्विन शुक्ल की दशमी तिथि को दशहरा है. जो 1 अक्टूबर की शाम को 7 बजकर 1 मिनट से शुरू होगा. जिसका समापन दशमी तिथि को 2 अक्टूबर की शाम 7 बजकर 10 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर इस बार दशहरा 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा.
इस साल दशहरा के दिन रवि योग पूरे दिन बन रहा है. इस दिन रवि योग के साथ सुकर्मा योग और धृति योग भी बन रहे हैं. रवि योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होता है, जिसकी वजह से सभी तरह के दोष मिट जाते हैं. इस दिन सुकर्मा योग सुबह से शुरू होगा और रात के 11 बजकर 29 मिनट तक रहेगा.
जिसके बाद धृति योग शुरू हो जाएगा. दशहरा के दिन उत्तराषाढा नक्षत्र है, जो प्रात:काल से लेकर सुबह 9 बजकर 13 मिनट तक है. उसके बाद से श्रवण नक्षत्र है, जो पूर्ण रात्रि तक रहेगा.
दशहरा का शुभ मुहूर्त
दशहरा का शुभ मुहूर्त सुबह 04:38 सुबह से लेकर 05:26 सुबह तक है. अभिजीत मुहूर्त जो दिन में 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर के 12 बजकर 34 मिनट तक है. वहीं दशहरा पर विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 9 मिनट से दोपहर 2 बजकर 56 मिनट तक का है.
शस्त्र पूजा का शुभ समय
दशहरा के दिन शस्त्र पूजा का शुभ समय दोपहर 2 बजकर 09 मिनट से लेकर 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. इस अवधि में शस्त्र पूजन करने से विशेष पुण्य लाभ प्राप्त होगा.
रावण दहन का सही समय
ज्योतिषीय गणना के अनुसार दशहरा के अवसर पर रावण दहन का आयोजन प्रदोष काल में करने का विधान है. शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल की शुरुआत सूर्यास्त के बाद होती है. इस बार सूर्यास्त का समय शाम 6 बजकर 06 मिनट पर रहेगा. इसके बाद प्रदोष काल प्रारंभ होगा, और उसी समय से रावण दहन करना शुभ रहेगा.
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