51 शक्तिपीठों में से कई मंदिर मध्य प्रदेश में विराजमान हैं, जहां आज भी चमत्कारिक अनुभव देखने को मिलते हैं. आइए जानते हैं एमपी के देवी मंदिर जहां कई रहस्य छिपे हुए हैं…
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Famous Temple of The MP: चैत्र नवरात्रि प्रारंभ है. इन दिनों मंदिरों में विराजमान आदि शक्ति का दर्शन, पूजन करने का विशेष महत्व है. मध्य प्रदेश में कई ऐसे स्थान हैं, जहां 51 शक्तिपीठों का वर्णन मिलता है. ऐसी मान्यता है कि जितने भी प्राचीन सिद्धपीठ हैं, उनमें माता सती के शरीर के अंगों का स्वरूप है, जिनकी पूजा की जा रही है. मैहर की शारदा माता मंदिर, अमरकंटक की नर्मदा देवी और उज्जैन की हरसिद्धि माता मंदिर ये ऐसे 3 प्रमुख स्थान हैं जो मां सती के अंग माने जाते हैं. इन स्थानों पर आने वाले भक्तों को माता रानी के चमत्कारिक दर्शन भी होते हैं. जिसके कारण यह मंदिर देश भर में फेमस हो चुके हैं.

आइए जानते हैं माता रानी के प्रमुख स्थान और चमत्कारिक अनुभव
शारदा माता मंदिर (मैहर):
मध्य प्रदेश मैहर विंध्य के त्रिकूट पर्वत पर यह सिद्ध मंदिर है. जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु नवरात्रि के दिनों में पहुंचते हैं और दर्शन लाभ प्राप्त करते हैं. यह स्थान माता सती के गले का हार गिरने का स्थान माना जाता है. यह देश के 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि कलयुग में आज भी मां शारदा के भक्त आल्हा प्रतिदिन सबसे पहले दर्शन करने पहुंचते हैं और प्रथम पूजा आल्हा ही करते हैं. इसके प्रमाण प्रतिदिन मां शारदा का पट खोलने के बाद मां शारदा के चरणों में चढ़े फूलों से मिलता है. ऐसी मान्यता है कि आल्हा परम भक्त थे, उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता शारदा ने उन्हें अमरता का वरदान दिया था. मां शारदा की प्रतिमा के नीचे एक शिलालेख है, उस शिलालेख में लिखि लिपि को आजतक किसी ने पढ़ा नहीं है, यह लेख आज भी रहस्य बना हुआ है.
हरसिद्धि माता मंदिर (उज्जैन):
मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकाल की नगरी में हरसिद्धि मंदिर है. इस मंदिर को भी मां सती के अंगों से जोड़कर देखा जाता है. यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ माता सती की कोहनी गिरी थी. नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों का मेला लगा रहता है. यह मंदिर इतना प्राची है कि हिंदू धर्म की आस्था रखने वाले भक्त माता हरसिद्धि से प्रार्थना करने मात्र से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. यह मंदिर वास्तुकला को प्रदर्शित करता है. चारों दिशाओं में बनाए गए प्रवेश द्वार आकर्षण का केन्द्र हैं.
ऐसी मान्यता है कि हरसिद्धि माता उज्जैन के राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी हैं. कहा जाता है कि माता दिन में गुजरात और रात में उज्जैन में निवास करती हैं. यह भी कहते हैं कि जरासंध के वध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने इनका पूजन किया था, इसके बाद ही माता का नाम हरसिद्धि पड़ा था.
शोनदेश शक्तिपीठ (अमरकंटक):
मध्य प्रदेश अमरकंटक का यह मंदिर भी 51 शक्तिपीठों में से एक है. जहां माता सती का नितंब (दायां नितंब) गिरा था. मां नर्मदा के रूप में विराजित माता सती का यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है और इसे शोनदेश शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है. यहां के मैकल पर्वत से निकली मां नर्मदा एक कुंड के रूप में बहती हैं और विशाल नदी के रूप प्रवाहित हो रही हैं. ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान भोलेनाथ शिव आज भी भद्रसेन के रूप में विराजमान हैं. इस मंदिर के पास कई स्थान है. लेकिन मां नर्मदा को ही शक्तिपीठ के रूप में मान्यता मिली हुई है.
पीतांबरा पीठ (दतिया):
मध्य प्रदेश के दतिया जिले में मां पीतांबरा पीठ है, यह अत्यंत प्रसिद्ध तांत्रिक शक्तिपीठ में से एक है, जहां मां बगलामुखी की पूजा करने का विधान है. मां बगुलामुखी को ही मां पीतांबरा कहा गया है जो राज सत्ता की अधिष्ठात्री देवी हैं. ऐसी मान्यता है कि मां पीतांबरा का दर्शन करने मात्र से सारे कष्टों का हरण हो जाता है और शत्रुओं का विनाश हो जाता है. मंदिर में महाभारत काल का वनखंडेश्वर महादेव का मंदिर हैं, यहां धूमावती माता का मंदिर भी है. संकट के दौर में माता रानी का पूजन करने के कई प्रमाण भी मिलते हैं.
विजयासन माता मंदिर (सलकनपुर, सीहोर):
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में विंध्यवासिनी विजयासन माता मंदिर है, जहां नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालुओं का दर्शन करने के लिए तांता लगा रहता है. इसे विंध्याचल पहाड़ी का एक सिद्ध शक्तिपीठ माना गया है. ऐसी मान्यता है कि राक्षस रक्तबीज का संहार करने के बाद माता जिस स्थान पर विराजमान हुईं थी उसे विजयासन कहा जाता है. मंदिर में माता की मूर्ति दक्षिणमुखी है, यहां आस-पास पहाड़ी पर रक्त बीज से युद्ध के अवशेष भी मिलने के प्रमाण दिखाई पड़ते हैं. देश भर से श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए यहां पहुंचते हैं और मातारानी का दर्शन लाभ प्राप्त करते हैं.
त्रिपुर सुंदरी मंदिर (जबलपुर):
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में त्रिपुर सुंदरी मंदिर है. जहां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के एक पिण्डी में एक साथ दर्शन होते हैं. बताया जाता है कि यह मंदिर कलचुरी राजा दानवीर कर्ण की कुलदेवी थी. देश में यह मंदिर ऐसा मंदिर है, जहां मां भगवती त्रिपुर सुंदरी की प्रतिभा में महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली का स्वरूप देखने को मिलता है. ऐसी प्रतिमा कहीं और देखने नहीं मिलती है. जम्मू-कश्मीर के त्रिकूट पर्वत में मां वैष्णो देवी मंदिर में ही इन तीनों देवियों का दर्शन होता है. यहां तीनों देवियां पिंडी के स्वरूप में विराजमान हैं.
चौसठ योगिनी मंदिर (भेड़ाघाट, जबलपुर):
मध्य प्रदेश के जबलपुर में चौसठ योगिनी नाम से यह मंदिर है. इसका नाम भले ही 64 योगिनी है. लेकिन यहां 95 मूर्तियां हैं. सभी मूर्तियां विखण्डित हैं. आश्चर्य जनक बात यह है कि यहां विराजित कोई भी एक मूर्ति दूसरे मूर्ति की प्रतिकृति नहीं है. यह मंदिर 11वीं शताब्दी का बताया जा रहा है. इस मंदिर को भी माता सती को ही समर्पित है. यहां नवरात्रि के दिनों में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है और यहां आने वाले भक्त 64 योगिनियों की पूजा करते हैं. भारत में 64 योगिनियों के कई ऐसे मंदिर हैं, जिन्हें अलग-अलग नाम से जाना जाता है और सभी जगह अलग-अलग ढंग की मूर्तियां हैं. जबलपुर की 64 योगिनी मंदिर में कुछ ऐसी विशेष देवियों की मूर्तियां हैं, जो रहस्यमयी हैं.
त्रिशक्ति माता बगलामुखी (आगर-मालवा):
मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे त्रिशक्ति माता बगलामुखी मंदिर है. यह मंदिर शाक्य और शैव मार्गी साधु-संत के लिए आस्था केंद्र है. मान्यता है कि यहां की देवी बगलामुखी की मूर्ति स्वयंभू हैं, मध्य में मां बगलामुखी, दाएं मां लक्ष्मी तथा बाएं मां सरस्वती हैं. यह मंदिर भी रहस्यमयी बताया जाता है. किवंदतियों से पता चलता है कि श्रीकृष्ण के निर्देश पर पांडवों ने कौरवों पर विजय पाने के लिए यहां मंदिर की स्थापना की थी.
मां तुलजा भवानी (देवास) :
मध्य प्रदेश के देवास में माता टेकरी पर बड़ी माता के रूप में मां तुलजा भवानी और छोटी माता के रूप में मां चामुंडा विराजमान हैं. ऐसी मान्यता है कि देवास टेकरी पर माता सती का रक्त गिरा था, इसलिए इसे शक्तिपीठ माना जाता है. यह मंदिर 450 वर्ष से भी ज्यादा वर्षों का है. यह मंदिर नाथ संप्रदाय का सिद्ध स्थान है. तुलजा भवानी शिवाजी महाराज की कुलदेवी हैं.
श्री बिजासन माता मंदिर (इंदौर):
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर मं श्री बिजासन माता मंदिर है. नवरात्रि के दौरान हज़ारों श्रद्धालु इंदौर स्थित बीजासन माता मंदिर के दर्शन करने पहुंचते हैं. ऐसी मान्यता है कि मंदिर में स्थापित नौ दिव्य प्रतिमाओं को तंत्र-मंत्र के एक चमत्कारी स्थल और एक ‘सिद्ध पीठ’ के रूप में पहचान मिली हुई है. यहां पूजा करने वाले भक्तों की कतरा लगी रहती है.
कंकाली मंदिर (भोपाल):
मध्य प्रदेश भोपाल के नजदीक रायसेन जिले के गुदावल में मां काली का प्रसिद्ध देवी मंदिर है. जिसे मां कंकाली के नाम से जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां विराजमान मातारानी का सर हर 6 महीने में दूसरी तरफ घूम जाता है. नवरात्रि के दिनों में बड़ी संख्या में यहां श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं.

