चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होने वाली है, नवरात्रि में मां दुर्गा की यह सवारी क्या संकेत दे रही है? जानें…
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व शक्ति की देवी मां दुर्गा को समर्पित है. मां दुर्गा की आराधना करने के लिए चैत्र नवरात्रि का यह पर्व महत्वपूर्ण माना जाता है. देवी दुर्गा के नो रूपों की पूजा अलग-अलग दिनों में की जाती है. यह भक्तिमय मातारानी का पवित्र त्योहार 19 मार्च 2026 से शुरू होंगे और 27 मार्च को विसर्जन के साथ समाप्त होंगे. बासंती नवरात्र का यह त्योहार बसंत ऋतु में शुरू होता है. जिसके कारण यह और भी महत्वपूर्ण माना जाता है.
मां दुर्गा को मानने वाले भक्तगण पूरे नौ दिनों तक उपवास, पूजन और भक्ति में लीन रहेंगे और मां दुर्गा की आराधना करेंगे. चैत्र नवरात्रि में मातारानी के आगमन की सवारी बहुत महत्व रखती है, क्योंकि इससे आने समय का शुभ-अशुभ संकेत मिलते हैं. इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा की सवारी क्या रहेगी? और उसके क्या परिणाम निकलेंगे? यह बहुत महत्वपूर्ण है. आइए जानते हैं 2026 के चैत्र नवरात्रि पर मातारानी की सवारी और उसके महत्व के संबंध में…
चैत्र नवरात्रि में पालकी होगी माता की सवारी
देवी पुराण के तीसरे अध्याय में बताया गया है कि यदि मातारानी का आगमन पालकी (डोली) पर होता है तो वह शुभ नहीं माना जाता है. ज्योतिषाचार्य पंडित बालगोविंदाचार्य जी महाराज ने बताया कि पालकी तो शुभ है लेकिन वह स्थिर नहीं रहती है, जिस कारण अस्थिरता का माहौल निर्मित होता है. वहीं ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा की मानें तो उन्होंने भी देवी पुराण का उल्लेख करते हुए बताया कि पालकी तो शुभ है, लेकिन देश-दुनिया में आर्थिक मंदी आ सकती है. प्रकृति रौद्र रूप धारण कर सकती है, जान-माल का नुकसान हो सकता है. देवी पुराण के तीसरे अध्याय में यह बताया गया है कि माँ दुर्गा का इस तरह आना देश-दुनिया में महामारी जैसे संकेत भी देते हैं.
डोली शुभ लेकिन अंतिम पड़ाव तक पहुंचने से पहले अशुभ संकेत
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि डोली शुभ है, लेकिन जब तक वह डोली उठती है और अंतिम पड़ाव तक नहीं पहुंच जाती है, तब तक वह चलायमान रहती है, उसमें हलचल बनी रहती है, जिसके कारण अस्थिरता का माहौल बना रहता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार माँ दुर्गा इन नौ दिनों के लिए जब पृथ्वी पर आती हैं, तो एक विशेष वाहन पर सवार होकर आती हैं और एक विशेष वाहन पर सवार होकर ही जाती हैं. वो किस वाहन पर सवार होकर आयेंगी, ये उस दिन के आधार पर तय किया जाता है.
साल 2026 चैत्र नवरात्रि 19 मार्च गुरुवार से शुरू हो रही है. पुराणों के अनुसार अगर गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्रि प्रारंभ होने वाली होती है, तो इसका अर्थ है कि मां डोली पर आती हैं, जिसे सामान्यतः अशुभ माना जाता है क्योंकि यह अस्थिरता और चुनौतियों का संकेत है.
क्या है मां दुर्गा के प्रस्थान का वाहन?
ज्योतिषीय बताते हैं कि बुधवार और शुक्रवार के दिन माता हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं, जिसे बेहद शुभ संकेत माना जाता है. इस साल 27 मार्च 2026 शुक्रवार को चैत्र नवरात्रि का आखिरी दिन है, इस दिन माता हाथी पर सवार होकर अपने लोक लौटेंगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के हाथी पर विदा होना बेहद शुभ संकेत माना जा सकता है, जो सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा, कृषि में वृद्धि और समाज में शांति का प्रतीक है.
मां दुर्गा के प्राकट्य के बाद शुरू हुई थी सृष्टि!
हिंदू धर्म ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ था और ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष प्रारंभ होता है. इसके अलावा भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्म भी चैत्र नवरात्रि में ही हुआ था.
देवी पुराण के तीसरे अध्याय में किया गया है मां दुर्गा के आगमन का जिक्र
देवी पुराण के तीसरे अध्याय में मां दुर्गा के पृथ्वी लोक पर आगमन को लेकर विस्तृत व्याख्या की गई है. उसी के अनुसार ज्योतिषीय गणना की जाती है और मां दुर्गा के आगमन और उसके फल के बारे में जानकारी दी जाती है.
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