विश्व हिंदू परिषद युवा संत चिंतन वर्ग उद्घाटित, हिंदू धर्म की रक्षा और धर्मांतरण को लेकर संतों के बीच हुआ चिंतन

By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Vishva Hindu Parishad News: एमपी के नरसिंहपुर करेली में विश्व हिंदू परिषद का भोपाल क्षेत्र का तीन दिवसीय युवा संत चिंतन वर्ग का शुभारंभ डी एम पैलेस में किया गया. इस अवसर पर जगद्गुरु स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने युवा संतों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि देश को तोड़ने के लिए बहुत से कालनेमि घूम रहे हैं हिंदू संस्कृति एवं गौरव ग्रंथ को संरक्षित करने के लिए संतो को आश्रम से निकलकर समाज में जाना होगा. हमारा समाज से जीवंत संपर्क रहता है. हमें समाज को आगाह करना होगा एवं वर्तमान परिस्थितियों से अवगत कराना होगा, संतो को समाज को संदेश देना होगा. सनातन परंपरा से जोड़ना होगा, जिससे हिंदू धर्म एवं संस्कृति का स्वाभिमान बढ़े. हिंदू धर्म एवं समाज विरोधी लोग मुखर होने का प्रयास करते हैं. धार्मिक ग्रंथो का अपमान, धर्मांतरण, गौ हत्या, बहन बेटियों का हरण एवं समाज को भयाक्रांत करने के लिए आतंकवाद चरम सीमा पर बढ़ता जा रहा है. जिसके लिए समाज में जागरण करने के लिए युवा संतो को आगे आना आवश्यक हो गया है.
इस वर्ग में पूरे मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के प्रमुख युवा संत शामिल हुए. कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र श्री राम दरबार एवं भारत माता के चित्र पट पर पूज्य संतों द्वारा दीप प्रज्वलित के साथ प्रारंभ हुआ.
उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद ही ऐसी संस्था है जो कि समाज एवं राष्ट्र चिंतन के लिए प्रेरित करता है संत और समाज में निकटता बढ़ाने का प्रयास करता है.
संतों को आश्रम से बाहर निकालना होगा
जगतगुरु स्वामी नरसिंह देवाचार्य ने आगे कहा कि हमारे मठ मंदिर सरकारी करण से मुक्त होना चाहिए जिससे संत चिंता मुक्त होकर अपनी पूरी शक्ति राष्ट्र उत्थान के लिए लगाए , विश्व हिंदू परिषद राष्ट्र जागरण का कार्य करता है और साधु-संत धर्म का कार्य करते हैं.संस्कृति जागरण का कार्य करते हैं. दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. अगर सनातन धर्म सुरक्षित रहेगा. तभी समाज सुरक्षित रहेगा. सनातन की जीत बरकरार रहे, इसके लिए संतों को आश्रम से बाहर निकाल कर समाज को प्रेरित करना होगा. तभी समाज में समरसता आएगी.
उन्होंने संतों का आवाहन करते हुए कहा हमारे आराध्य भी बन-बन में जाकर घर द्वार छोड़कर पूरे देश में भ्रमण कर वनवासी, गिरीवासी, भील, कोल, किरात को गले लगाया और समाज को जोड़ने का काम किया है. यही हम सभी संतों का भी कर्तव्य है. अतः समाज और राष्ट्र के जागरण एवं समाज के उत्थान के लिए प्रयास करना चाहिए.
संतों के मार्गदर्शन में कार्य करता है हमारा कार्य संगठ-महामण्डलेश्वर
महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी महाराज ने विश्व हिंदू परिषद की स्थापना के विषय एवं उद्देश्य को बतलाते हुए कहा कि विश्व हिंदू परिषद की स्थापना 1964 में मुंबई के संदीपनी आश्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक पूज्य गुरु जी एवं पूज्य शंकराचार्य सहित सभी मत, पंथ, संप्रदाय के साधु-संतों के द्वारा की गई. जिसका उद्देश्य देश तथा विदेश में रहने वाले हिंदुओं को संगठित करना , मठ मंदिर एवं साधु संतों की सुरक्षा , गौ गंगा गीता की सुरक्षा, धर्मांतरण रोकना एवं धर्मांतरित हुए व्यक्तियों को पुनः हिंदू धर्म में वापस लाना सहित हिंदू मान बिंदुओं की रक्षा करना है. विश्व हिंदू परिषद द्वारा लाखों की संख्या में सेवा कार्य भी चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद पूज्य संतों के मार्गदर्शन में कार्य करता है हमारा कार्य संगठनात्मक, रचनात्मक एवं आंदोलनात्मक है.
चिंतन वर्ग में पूज्य संतों सहित विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री द्वय अशोक तिवारी एवं हरिशंकर मौजूद रहे. मंच संचालन क्षेत्र धर्माचार्य संपर्क प्रमुख मुन्ना पांडे ने किया. जबकि बैठक का समापन मंत्र एवं उद्घोष प्रांत धर्माचार्य संपर्क प्रमुख सागर गुप्ता द्वारा कराया गया.

