मध्य प्रदेश को 10,500 करोड़ रुपए मिले, सीआरआईएफ फंड में 3000 करोड़ रुपए का प्रावधान, मध्य प्रदेश में रिंग रोड के निर्माण के लिए यूनियन बजट में प्रावधान किए गए हैं.
By -DB News Update/edited by -supriya
Source : DB News Update
Ring Road : मध्य प्रदेश में रिंग रोड के निर्माण के लिए यूनियन बजट में प्रावधान किए गए हैं. प्रदेश में छह जगहों पर रिंग रोड का निर्माण होगा। साथ ही महाकाल मंदिर तक रोप-वे बनेगा. इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम के लिए मध्य प्रदेश को 10,500 करोड़ रुपए मिले हैं. इससे आने वाले दिनों में शहरों की हालत में सुधार होंगे.
इन शहरों में बनेंगी रिंग रोड
यूनियन बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में मध्य प्रदेश को कुछ सौगातें मिली हैं. प्रदेश के छह बड़े शहरों में रिंग रोड का निर्माण कराया जाएगा. भोपाल समेत इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और रीवा जैसे प्रमुख शहरों में रिंग रोड का निर्माण होना है. इसके लिए केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की है.
इसके अलावा, उज्जैन में महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोप-वे का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. वहीं, धार जिले के पीथमपुर में बन रहे मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क को भी 60 करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित की गई है.
इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए मिलेंगे 10,500 करोड़ रुपए
वित्तीय वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए कुल 10,500 करोड़ रुपए मिलेंगे. इसमें से 9,750 करोड़ रुपए केवल राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए रखे गए हैं. अगले पांच सालों में मध्यप्रदेश को केंद्र सरकार से 29,710 करोड़ रुपए मिलेंगे, जिससे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाया जा सकेगा.
इसके लिए भी मिलेंगे फंड
केंद्र सरकार ने अपने बजट में सीआरआईएफ फंड में 3000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. इसमें से चालू वित्तीय वर्ष में मध्यप्रदेश को 250 करोड़ रुपए मिलेंगे. इसके अलावा, एनएच के लिए 7000 करोड़ में से 2500 करोड़ रुपए, मेंटेनेंस पर 50 करोड़ रुपए और एनएचडीपी पर 90 करोड़ रुपए मिलेंगे.
नर्मदा एक्सप्रेस वे की लंबे समय से की जा रही मांग
हाल ही में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और सागर में रिंग रोड बनाने और 56 शहरों में आंतरिक सड़कों को सुदृढ़ करने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार से सैद्घांतिक सहमति मिली है. नर्मदा एक्सप्रेस वे को सरकार ने स्वीकृति दे दी है. अब इसे भारत माला परियोजना में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा. इसके साथ ही बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना के कामों को गति दी जाएगी.
इन शहरों में है रिंग रोड बनाने की योजना
मध्यप्रदेश में कुल 14 रिंग रोड बनाने की योजना है, जिन पर तेजी से काम चल रहा है. इनमें इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, उज्जैन, सतना, कटनी, नरसिंहपुर, हरदा, सीहोर, विदिशा, गंजबासौदा और आगर-मालवा शहर शामिल हैं. राजधानी भोपाल में पश्चिमी बायपास के बनने के बाद यह आउटर एरिया रिंग रोड की तरह काम करेगा.
जबलपुर में 111 किमी लंबी बनेगी सड्क
जबलपुर जिले में 111 किमी लंबी रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गयाा है. जिसकी सैद्धांतिक स्वीकृति बहुत पहले मिल चुकी थी. जबलपुर में लंबे समय से रिंग रोड की मांग भी की जा रही थी. क्योंकि रिंग रोड नहीं होने से शहर के अंदर से भारी वाहन गुजर रहे थे और सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा था. जिसको लेकर चिंतन किया गया और इस प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया. यह मांग लंबे समय बाद मानी गई है और जल्द इसमें काम भी शुरू हो जाएगा.
भू-अर्जन सबसे बड़ी समस्या
रिंग राेड निर्माण में भू-अर्जन सबसे बड़ी बाधा है. क्योंकि रिंग रोड का काम भू-अर्जन के बाद ही संभव हो सकेगा. जब तक भू-अर्जन नहीं हो जाता है तब तक रिंग रोड का कार्य आगे नहीं बढ़ सकता है. लिहाजा सबसे ज्यादा राशि भू-अर्जन पर ही खर्च होनी है. इस पर प्रशासनिक अधिकारी जुटे हुए हैं. लेकिन इस कार्रवाई को जल्द करने की जरूरत है. क्योंकि भू-अर्जन के दौरान कई बार किसान जमीन देने के ए राजी नहीं होते हैं और न्यायालयीन प्रक्रिया में लंबे समय तक प्रोजेक्ट उलझ जाता है. इससे बचने के लिए सबसे पहले भू-अर्जन की सारी समस्याओं का समाधान कर लेना चाहिए. इस पर जिम्मेदार अधिकारी कितनी गति के साथ काम करते हैं? यह देखना होगा.

