By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP Tiger Reserves: मध्य प्रदेश के सभी टाइगर रिज़र्व 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटकों के लिए बंद रहेंगे. जंगल सफारी का मजा फिर 1 अक्टूबर से मिलेगा।
Source : DB News Update
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mp news: मध्य प्रदेश में मुकुंदपुर, कान्हा, बांधवगढ़, नौरादेही, पेंच, पन्ना, सतपुड़ा और संजय गांधी टाइगर रिज़र्व दुबरी में 30 जून के बाद अगले तीन महीने के लिए पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लग जाएगी. इस दौरान व्हाइट एंड रेड टाइगर देखने के लिए जंगल सफारी बंद रहेगी.विंटर सीजन में 1 अक्टूबर से पर्यटकों को टाइगर रिज़र्व में फिर से एंट्री मिलेगी.
गौरतलब है कि भारत में 50 साल पहले 1973 को प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत की गई थी. शुरुआत में देश में नौ टाइगर रिजर्व थे, इसमें मध्य प्रदेश का भी एक कान्हा रिजर्व शामिल था.आज अकेले मध्य प्रदेश में ही 8 टाइगर रिजर्व हैं.मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा बाघ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हैं.यहां बाघों की संख्या 225 से ज्यादा है. टाइगर देखने के शौकीन पर्यटकों के लिए देश-विदेश मध्य प्रदेश के नेशनल पार्क बेहद पसंदीदा जगह हैं।
मध्य प्रदेश में हैं ये सात टाइगर रिजर्व
मध्य प्रदेश में 8 टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें मुकुंदपर, बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना, पेंच, संजय, नौरादेही और सतपुड़ा शामिल हैं. बांधवगढ़ में 31 बाघों की क्षमता है, जबकि बांधवगढ़ में वर्तमान में 225 बाघ हैं. इसी तरह कान्हा में 41 की क्षमता लेकिन 210 के करीब बाघ हैं. पन्ना में 32 की क्षमता है लेकिन यहां 83 बाघ है. इसी तरह पेंच में 24 बाघ की क्षमता के विपरीत 129 बाघ हैं, संजय में 34 की क्षमता और यहां 35 बाघ हैं. इसी तरह सतपुड़ा में 43 बाघों की क्षमता है, जबकि यहां 90 बाघ हैं. कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में 205 बाघ की क्षमता है, जबकि यहां 700 से अधिक बाघ हैं.
जानें क्यों बंद हो रहा टाइगर रिजर्व?
बता दें कि बारिश के दिनों में मैटिंग के दौरान बाघ हिंसक हो सकते हैं, इसलिए नेशनल पार्क बंद किए गए हैं. दरअसल, बारिश के दौरान 3 माह के लिए हर साल टाइगर रिजर्व को बंद कर दिया जाता है. इस साल 1 जुलाई से 3 माह के लिए टाइगर रिजर्व को बंद कर दिया जाएगा. ऐसे में अब पर्यटकों को 1 अक्टूबर के बाद ही टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में प्रवेश मिल सकेगा.
बफर जोन में ले सकेंगे सफारी का आनंद
सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना, संजय दुबरी टाइगर रिजर्व 1 जुलाई, 2025 से लेकर 30 सितंबर तक बंद रहेगा. हालांकि नेशनल पार्क में सिर्फ बफर जोन में ही पर्यटक सफारी का आनंद ले सकेंगे. दरअसल, पर्यटकों को टाइगर रिजर्व के बफर जोन में एंट्री मिल सकेगी, जहां पर्यटकों के लिए कैंपिंग साइट पर नाइट स्टे की सुविधा उपलब्ध रहेगी. इसके अलावा जंगल में ट्रेकिंग रूट पर सफारी का आनंद ले सकेंगे.
1973 में हुई थी टाइगर प्रोजेक्ट की शुरुआत
बताया जा रहा है कि भारत में 50 साल पहले 1973 को प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत की गई थी. शुरुआत में देश में नौ टाइगर रिजर्व थे, इसमें मध्य प्रदेश का भी एक कान्हा रिजर्व शामिल था.आज अकेले मध्य प्रदेश में ही 7 टाइगर रिजर्व हैं.मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा बाघ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हैं.यहां बाघों की संख्या 225 से ज्यादा है. टाइगर देखने के शौकीन पर्यटकों के लिए देश-विदेश मध्य प्रदेश के नेशनल पार्क बेहद पसंदीदा जगह है.
क्या-क्या गतिविधियां रहेंगी बंद?
- जंगल सफारी
- बोटिंग
- नाइट कैंपिंग
- ईको-टूरिज्म से जुड़ी अन्य सेवाएं
पर्यटकों की संख्या के लिहाज से मध्य प्रदेश उपयुक्त
बाघों की संख्या के लिहाज से मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा उपयुक्त जगह है. यहां बाघों की संख्या सबसे ज्यादा है, यही वजह है कि मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट कहा जाता है। वर्ष 2024-25 की बात करें तो बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा 32 हजार से भी ज्यादा विदेशी पर्यटक आए। उसके बाद कान्हा, पन्ना, पेंच और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का नंबर आता है। पर्यटकों का रुझान देखते हुए प्रदेश सरकार भी नित नए प्रयोग करती रहती है। कभी टाइगर की गणना करने के बाद बाहर से चीते बुलवाए जाते हैं तो कभी कोकाोड्रिल छोड़े जाते हैं। प्रदेश में पर्यटन की दृष्टि से नित नए प्रयोग होते रहते हैं, जो प्रदेश के लिए पर्यटन के लिए अच्छा कदम है।

