महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है. जानते हैं आज महाशिवरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और कैसे करें आज पूजा.
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited by : प्रिंस अवस्थी
Mahashivratri Puja Muhurat 2025: महाशिवरात्रि का पर्व आज मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है. इस दिन का शिव भक्त पूरे साल इंतजार करते हैं. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. साल 2025 में यह तिथि आज यानि 26 फरवरी, बुधवार के दिन पड़ रही है.
महाशिवरात्रि 2025 तिथि
चतुर्दशी तिथि की शुरूआत आज 26 फरवरी, 2025 को सुबह 11.08 मिनट पर होगी.
चतुर्दशी तिथि समाप्त 27 फरवरी 2025 को सुबह 8.54 मिनट पर होगी.
महाशिवरात्रि 2025 पूजन विधि
- महाशिवरात्रि व्रत के दिन भक्त सुबह उठकर व्रत का संकल्प लें.
- मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और पूजा करें.
- पूजा में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, चंदन आदि चीजें चढ़ाएं.
- शिवरात्रि व्रत की कथा करें और आरती जरुर करें.
- इस दिन रात्रि की पूजा का विशेष महत्व है.
- निशिता काल में की गई पूजा शिव जी को अति प्रिय हैं.
- रात्रि में चार पहर की पूजा करें. जिसमें भोलेनाथ का रुद्राभिषेक करें.
- शिव जी को भोग लगाएं.
- अगले दिन मुहूर्त के समय व्रत का पारण करें.
निशिता काल पूजा समय
महाशिवरात्रि या शिवरात्रि के दिन निशिता काल में पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है. निशिता काल में भगवान शिव की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होते हैं. पंचांग के अनुसार निशिता काल 27 फरवरी को 12.09 मिनट से लेकर 12.59 मिनट कर रहेगा. कुल 50 मिनट निशिता काल रहेगा.
महाशिवरात्रि 2025 चार पहर पूजा का समय
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – शाम 6:19 से 9:26 मिनट तक रहेगा.
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – रात 9:26 से 12:34 मिनट तक रहेगा.
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – रात 12:34 से लेकर 03:41 मिनट कर रहेगा.
वहीं रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:41 से 6:48 मिनट तक रहेगा.
महाशिवरात्रि पूजा मंत्र (Mahashivratri Puja Mantra)-
“ॐ ऐं ह्रीं शिव गौरीमय ह्रीं ऐं ऊं”
‘ऊं नम: शिवाय’
सांब सदा शिव
ॐ अघोराय नमः
ॐ श्रीकंठाय नम:
ॐ तत्पुरुषाय नम:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्
महाशिवरात्रि 2025 भोग
महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाना चाहिए. इस दिन उन्हें बेर, सेब, बेल, अनार और संतरे का भोग लगा सकते हैं. भोलेनाथ को फल अति प्रिय हैं. साथ ही महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिव-गौरी को हलवा, खीर, मालपुआ का भोग लगाया जाता है.
महाशिवरात्रि 2025 व्रत पारण
महाशिवरात्रि के व्रत का पारण अगले दिन किय जाता है. 27 फरवरी को सुबह 06:48 से 08:54 मिनट के बीच आप व्रत का पारण कर सकते हैं.
भगवान शिव के प्रतीक
भगवान शिव हर जगह व्याप्त हैं. हमारी आत्मा में और शिव में कोई अंतर नहीं है. इसलिए यह भजन भी गाते हैं, “शिवोहम शिवोहम…” मैं शिव स्वरुप हूँ. शिव सत्य के, सौंदर्य के और अनंतता के प्रतीक हैं. हमारी आत्मा का सार हैं शिव. हमारे होने का प्रतीक हैं शिव. जब हम भगवान शिव की पूजा करते हैं तो उस समय हम, हमारे भीतर उपस्थित दिव्य गुणों को सम्मान कर रहे होते हैं.
शिव तत्व
महाशिवरात्रि, शिव तत्त्व का उत्सव मनाने का दिन है. इस दिन सभी साधक और भक्त मिलकर उत्सव मनाते हैं. शिव तत्व यानी वह सिद्धांत या सत्य जो हमारी आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है. यह वही परम सत्य है जिसकी हम खोज कर रहे हैं. ऐसा कहा जाता है कि महाशिवरात्रि साधना, शरीर, मन और अहंकार के लिए गहन विश्राम का समय है. जो भक्त को परम ज्ञान के प्रति जागृत करता है.
महाशिवरात्रि और साधना का महत्व
यदि आपको इस भौतिक जगत के पार जाना है तो अनासक्ति और साधना के माध्यम से ही जाया जा सकता है. हमारे अस्तित्व के कई आयाम हैं. जिन्होंने भी इस सृष्टि के सूक्ष्म स्तर में प्रवेश पाया है, उनके अनुभव में यही आया है कि शिव नित्य निरंतर गतिमान हैं. इसका आनंद यदि आपको लेना हो तो शरीर, मन, बुद्धि, चित और अहंकार के परे जाना ही होगा.
महाशिवरात्रि और साधना
भारतीय ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, एक वर्ष में कुछ विशेष समय और दिन होते हैं जो आध्यात्मिक उन्नति और ध्यान करने के लिए अनुकूल माने जाते हैं. महाशिवरात्रि उन्ही में से एक है. ध्यान, आपको मन और बुद्धि के परे ले जाता है. ध्यान के दौरान एक ऐसा बिंदु आता है जहाँ हम ‘अनंत’ में प्रवेश कर जाते हैं; यह वो अनंत है जहाँ ‘प्रेम’ भी है और ‘शून्यता’ भी।.यह अनुभव हमें चेतना के चौथे स्तर पर ले जाता है, जिसे “शिव” कहते हैं.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

