शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव को पारा बहुत प्रिय है और उनके इस शिवलिंग की पूजा करने का विशेष महत्व है. पारद के शिवलिंग यानी पारदेश्वर महादेव जी की पूजा की इतनी महान महिमा पुराणों और उपनिषदों में बताई गयी है.
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
MP Jabalpur News : शास्त्रों में पारे के महादेव का पूजन करने का महत्व बतलाया गया है. भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त करने की जानकारी दी गई है. मान्यता है कि पारदेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन अत्यंत लाभकारी है. सावन के माह में पारे के शंकर जी का अभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. जीवन की सभी कठिनाई और बाधा का अंत होता है. आज हम आप सभी को बताने जा रहे ऐसे रस लिंग पारदेश्वर भगवान की पूजन विधि और उनके चमत्कारिक परिणाम के बारे में, जिनका पूजन करने के लिए भक्त चुंबक की तरह आकर्षित होते हैं और पारदेश्वर महादेव के मंदिरों में खिंचे चले आते हैं और श्रद्धा-भक्ति के साथ उनका पूजन करते हैं.
जबलपुर में यहां विराजमान हैं पारे के शिवलिंग
मध्य प्रदेश जबलपुर में नर्मदा के उत्तर तट पर गीताधाम आश्रम है. जहां भगवान पारदेश्वर महादेव की स्थापना की गई है. इस रसलिंग को वैदिक मंत्रोच्चारण और आयुर्वेद की जड़ी बूटियों के माध्यम से पारे को संग्रहित करके शिवलिंग का स्वरूप दिया गया है. पारदेश्वर महादेव मंदिर में पहुंचकर जो भी भक्त पूजन, अर्चन और अभिषेक करता है. उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. सावन के माह में प्रतिदिन श्री रुद्राभिषेक किया जा रहा है और भगवान भोलेनाथ को अलग-अलग स्वरूप प्रदान करने के लिए आकर्षक साज-सज्जा की जा रही है. इस आश्रम के संचालक श्री रामरंगी द्वाराचार्य जगद्गुरु डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी महाराज हैं, जिनके द्वारा संत सेवा, गौ-सेवा, बटुक ब्राम्हण सेवा, दरिद्र नारायण सेवा के प्रकल्प चलाए जा रहे हैं.
इन मनोकामनाओं की होती है पूर्ति
- – रुद्राभिषेक से आर्थिक परेशानियां समाप्त होती हैं और करियर में नई ऊंचाइयों की प्राप्ति होती है.
- – व्यापार और नौकरी में सफलता मिलती है.
- – संतान सुख के इच्छुक दंपतियों को विशेष रूप से लाभ मिलता है.
- – अभिषेक करने वाला व्यक्ति स्वास्थ्य और दीर्घायु होता है.
- – पारिवारिक जीवन में प्रेम, शांति और सामंजस्य स्थापित होता है, जिससे परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
भगवान शिव को पसंद है पारा
पारद का मतलब पारा से है. शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव को पारा बहुत प्रिय है और उनके इस शिवलिंग की पूजा करने का विशेष महत्व है. पारद के शिवलिंग यानी पारदेश्वर महादेव जी की पूजा की इतनी महान महिमा पुराणों और उपनिषदों में बताई गयी है. पारद शिवलिंग की पूजा करने से आपको 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के बराबर पुण्य फल देती है.
भगवान शिव के वीर्य या रसधातु का प्रतीक
वेदों और ऋषि मुनियों ने समस्त शिवलिंग में से पारद शिवलिंग को सर्वश्रेष्ठ शिवलिंग की मान्यता दी है. बताया गया है कि पारद शिवलिंग इसलिए सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि यह शिवलिंग भगवान शिव के वीर्य या रसधातु से बना हुआ है, जो शिवजी के एक जागृत स्वरूप के समान है. पारद शिवलिंग को शिवजी का जागृत स्वरूप माना गया है. पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही भक्तों के समस्त प्रकार के रोग, जीवन की व्याधियां, तकलीफ, परेशानियां दूर हो जाती हैं. अगर पारद शिवलिंग का अभिषेक करेंगे या अभिषेक से निकला हुए जल आपने शरीर को छूते हैं, तो उसका प्रभाव और भी ज्यादा विशेष फलदायी होता है.
शिवलिंग के 7 स्थान पर अवश्य लगाएं चंदन
- सावन में भोलेनाथ की पूजा करते समय सबसे पहले शिवलिंग के ऊपर चंदन लगाना चाहिए. इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार शरीर में बढ़ता है. वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है.
- दूसरा चंदन का तिलक शिवलिंग के दाईं ओर लगाएं जलाधारी के आगे की तरह लगाना चाहिए. ये गणेश जी का स्थान होता है. इससे जीवन में शुभता का आगमन होता है. आर्थिक स्थिति सुधरती है.
- जलाधारी के दूसरी तरफ गणेश जी के विपरीत दिशा में, कार्तिकेय जी का वास माना जाता है. तीसरा चंदन का तिलक यहां लगाएं. संतान प्राप्ति के लिए ये बहुत फलदायी माना गया है.
- शिवलिंग से जल बहने के रास्ते पर महादेव की पुत्री अशोक सुंदरी का स्थान होता है, वहां चंदन लगाएं, मान्यता है इससे सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है.
- चंदन का पांचवा तिलक शिवलिंग की जलाधारी पर लगाया जाता है. जहां से जल प्रवाह होता है. कहते हैं इससे कष्टों का निवारण होता है.
- छठा तिलक शिवलिंग के पीछे की ओर लगाना चाहिए. मान्यता है इससे शत्रु का नाश होता है. परिवार में सुख का आगमन होता है.
- सातवां तिलक भोलेनाथ के पास बैठे नंदी महाराज के दोनों सिंगो पर लगाया जाता है.
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