कार्तिक मास के महीने में इस साल काली पूजन 08 नववंबर 2026, रविवार के दिन है. आइए जानते हैं काली पूजा के संबंध में.
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By : DB News Update| Edited By: प्रिंस अवस्थी
Kali Puja 2026: दीपावली के दिन तांत्रिक पूजा का विशेष दिन माना गया है. इस दिन काली पूजन का भी विधान बतलाया गया है. हिंदू परंपरा का यह त्योहार प्रसिद्ध है. हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व कार्तिक माह में पड़ता है. इस साल काली पूजन का सही दिन 08 नवंबर 2026 दिन रविवार को पड़ रहा है. काली पूजा को श्याम पूजा के नाम से भी जाना जाता है, यह त्योहार मां दुर्गा की उग्र रूप मां काली को समर्पित है, जो शक्ति, सुरक्षा और बुराई के लिए विनाशकारी माना गया है.
काली पूजन का विशेष महत्व
कार्तिक मास के अवसर पड़ने वाला यह दिन मां काली की पूजा अर्चना की जाती है. इससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. यह त्योहार उत्तर भारत समेत पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में मुख्य रूप से मनाया जाता है. इसके अलावा कई जगह दीवाली की रात को काली पूजा करने का विधान बतलाया गया है.
क्षेत्र की अपनी परंपराएं
बंगाल की प्रसिद्ध ‘काली पूजा’भारत के कुछ हिस्सों में दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा से भी ज्यादा महत्व मां काली की पूजा का होता है. पश्चिम बंगाल के साथ-साथ उड़ीसा और असम में भी दीपावली की रात को मुख्य रूप से ‘काली पूजा’ (Shama Puja) के रूप में मनाया जाता है. यहां ऐसी मान्यता है कि इसी दिन मां काली ने असुरों का वध करने के बाद अपना भयानक रूप धारण किया था, जिसे शांत करने के लिए भगवान शिव उनके चरणों के नीचे लेट गए थे. इसलिए यहाँ भव्य पंडालों में मां काली की विशाल और जागृत मूर्तियों की स्थापना कर आधी रात को तांत्रिक और सात्विक दोनों विधियों से पूजा की जाती है.
दीपावली पर काली पूजा और तंत्र साधना का महत्व
निशीथ काल: जहां आम गृहस्थ शाम के समय माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करते हैं, वहीं तांत्रिक और अघोरी आधी रात को (निशीथ काल या महानिशा काल में) अपनी साधना शुरू करते हैं.
महानिशा पूजा: इस समय मां लक्ष्मी के संहारक और सुरक्षात्मक रूप, यानी मां काली की पूजा की जाती है. यह पूजा जीवन से नकारात्मक शक्तियों, शत्रुओं के भय, तंत्र बाधा और बुरी नजर को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए की जाती है.
शक्तियां जागृत करना: इस रात को किए जाने वाले मंत्र जाप, यंत्र सिद्धि और साधनाएं बहुत शक्तिशाली मानी जाती हैं. तांत्रिक इस रात को गुप्त रूप से सिद्धियां प्राप्त करने के लिए चुनते हैं.
कैसे मनाएं काली पूजा?
ऐसी मान्यता है कि, काली मां की पूजा तंत्र-मंत्र से जुड़े लोग ही करते हैं, जबकि ये पूरी तरह से निराधार है. देवी काली की पूजा हर कोई अपने घर पर मंत्रों और धार्मिक अनुष्ठान के रूप में कर सकता है.
मां काली के भोग में फल, मिठाई, मछली, मांस और दाल का भोग लगाने का विधान बतलाया गया है. यह त्योहार भारत के कोलकाता और गुवाहटी में ये त्योहार विशेष रूप से मनाया जाता है.
गृहस्थों के लिए विशेष नियम
ऐसी मान्यता है कि तांत्रिक पूजा के नियम बेहद कड़े, उग्र और गुप्त होते हैं, इसलिए सामान्य गृहस्थों को तांत्रिक विधियों से दूर रहने की सलाह दी जाती है. आम परिवारों को इस रात मां काली की सामान्य, सात्विक पूजा (जैसे दीपक जलाना, कपूर आरती करना और मानसिक जाप करना) ही करनी चाहिए.
काली पूजा 2026 शुभ मुहूर्त और समय
काली पूजा निशिता काल में- रात 11 बजकर 39 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 31 मिनट तक (8 नवंबर से 9 नवंबर 2026)
अमावस्या तिथि आरंभ- 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त- 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे
काली पूजा के लिए पूजन सामग्री
भगवान गणेश की मूर्ति, भगवान विष्णु की मूर्ति और मां काली की प्रतिमा
धूप-दीप
तांत्रिक प्रतीकों
चावल
चंदन पाउडर
काली पूजा का महत्व
दूर्वा घास
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