कांवड़ मार्गों पर मौजूद दुकानों के बाहर नेमप्लेट लगाने का फैसला, बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा रहा, सहयोगी फैसले के खिलाफ
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: सुप्रिया
Kanwar Yatra Nameplate Controversy: उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को लेकर विवाद शुरू हो गया है. यूपी सरकार ने पहले मुजफ्फरनगर जिले में 240 किलोमीटर लंबे कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी होटल, ढाबे और ठेले सहित भोजनालयों के मालिकों को अपना नाम प्रदर्शित करने के निर्देश मिले हैं. यह आदेश पूरे राज्य में कांवल यात्रा मार्ग के लिए लागू कर दिया गया है. इसको लेकर बीजेपी के सहयोगी दलों में दरार पड़ गई है.
बीजेपी सरकार के इस फैसले की आलोचना होना शुरू हो गई है. जहां विपक्ष के नेता इस फैसले को विभाजनकारी बता रहे हैं तो वहीं अब बीजेपी के सहयोगी भी उसके ऊपर हमलावर हो गए हैं. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने भी अपनी ही पार्टी को नसीहत दी है. नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू, जयंत चौधरी की आरलेडी और चिराग पासवान की एलजेपी (आर) ने यूपी सरकार के फैसले को गलत बताया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि किस सहयोगी ने क्या कहा है.
सबका साथ, सबका विकास मंत्र के खिलाफ सरकार का फैसला: जेडीयू
जेडीयू ने कहा कि यूपी सरकार का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास मंत्र के खिलाफ है. पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा, “यह मुसलमानों की पहचान करने और लोगों को उनसे सामान न खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने जैसा है. इस प्रकार का आर्थिक बहिष्कार समाज के लिए अनुचित है. उन्होंने इस फैसले को वापस लेने की मांग की.
सरकार का फैसला गैर-संवैधानिक: आरएलडी
यूपी में बीजेपी की सहयोगी आरएलडी ने भी योगी सरकार के फैसले के खिलाफ नाराजगी जाहिर की. आरएलडी के रामाशीष राय ने एक ट्वीट में कहा, “उत्तर प्रदेश प्रशासन का दुकानदारों को अपनी दुकान पर अपना नाम और धर्म लिखने का निर्देश देना संप्रादायिकता को बढ़ावा देने वाला कदम है. प्रशासन इसे वापस ले. यह गैर-संवैधानिक निर्णय है.”
जाति या धर्म के नाम पर किसी भी विभेद का समर्थन नहीं करता: चिराग
एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि समाज में अमीर और गरीब दो श्रेणियों के लोग मौजूद हैं और विभिन्न जातियों एवं धर्मों के व्यक्ति इन दोनों ही श्रेणियों में आते हैं. पासवान ने कहा, “हमें इन दोनों वर्गों के लोगों के बीच की खाई को पाटने की जरूरत है. गरीबों के लिए काम करना हर सरकार की जिम्मेदारी है, जिसमें समाज के सभी वर्ग जैसे दलित, पिछड़े, ऊंची जातियां और मुस्लिम भी शामिल हैं. समाज में सभी लोग हैं. हमें उनके लिए काम करने की आवश्यकता है.”
नकवी ने पहले आलोचना की, फिर मारी पलटी
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी तक ने योगी सरकार के फैसले पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, “कुछ अति-उत्साही अधिकारियों के आदेश हड़बड़ी में गडबड़ी वाली..अस्पृश्यता की बीमारी को बढ़ावा दे सकते हैं…आस्था का सम्मान होना ही चाहिए, पर अस्पृश्यता का संरक्षण नहीं होना चाहिए.”
हालांकि, फिर उन्होंने अपना स्टैंड भी बदल लिया और कहा कि यह एक स्थानीय प्रशासनिक निर्देश था. राज्य सरकार ने निर्देश पर स्पष्टीकरण जारी किया है. ये निर्देश कांवड़ यात्रियों की आस्था का सम्मान करने के लिए जारी किए गए थे, इसे सांप्रदायिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए.
Source : PTI

