स्मार्ट सिटी के द्वारा आवंटित की गई थी राशि, गुजरात की कंपनी सीएनजी बेचकर मुनाफा कमा रही
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Bio-CNG plant in Jabalpur: स्मार्ट सिटी जबलपुर के द्वारा परियट स्थित सांची दुग्ध संघ के पास कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) प्लांट तैयार कराया गया है, इस प्लांट पर गैस भी तैयार की जा रही है, लेकिन वह गैस न तो नगर निगम के कचरा वाहनों के काम आ रही है और न ही स्मार्ट सिटी के अिधकारी द्वारा प्लांट से उत्पादित सीएनजी गैस का हिसाब-किताब रखा जा रहा है, जबकि स्मार्ट सिटी को जनता की गाढ़ी कमाई से मिली अनुदान राशि में से 21 करोड़ रुपए का आवंटन सीएनजी प्लांट निर्माण में किया गया है. इसके बावजूद सीएनजी प्लांट निर्माण करने वाली गुजरात की बायोफिक्स कंपनी प्लांट से निर्मित गैस का उत्पादन कर विक्रय कर रही है, जिससे केवल ठेका कंपनी उपकृत हो रही है, जनता के हित में यहां की गैस का इस्तेमाल हो ही नहीं रहा है.
गोबरधन योजना के तहत बनाया गया है CNG Plant
प्रदेश सरकार के द्वारा गोबरधन योजना ‘कचरे से कंचन’ अभियान के तहत सीएनजी प्लांट का निर्माण कराया गया है. यह प्रोजेक्ट जल, वायु प्रदूषण से जुड़ा बताया जा रहा है। लोगों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ज्यादा से ज्यादा जोड़ने के प्रयास किए जाने का उद्देश्य छिपा है. यह प्रोजेक्ट इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर लॉन्च किया गया था.
मुफ्त की गैस लेने के बदले सांची ने दी जमीन
स्मार्ट सिटी के अिधकारियों ने सीएनजी बायो गैस प्लांट को परियट क्षेत्र में लॉन्च किया है, क्योंकि यहां पर डेयरी ज्यादा होने की वजह से गोबर की मात्रा अधिक है. सांची दुग्ध संघ ने इस प्रोजेक्ट को अपनी जमीन पर लगवाने का दबाव अिधकारियों से बनवाया, जिससे की मुफ्त में बायो गैस मिल सके.
150 टन गोबर हो रहा इस्तेमाल
परियट क्षेत्र की डेरियों से निकलने वाले गोबर से परियट, गौर सहित सहयोगी नदियां प्रदूषित प्रदूषित हो रही थीं, जिन्हें प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए बायो सीएनजी प्लांट लगाने का प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया था. इसे स्थापित कराने में जबलपुर स्मार्ट सिटी और जबलपुर दुग्ध संघ (सांची) का संयुक्त योगदान रहा, जिससे परियट परिक्षेत्र में बायो सीएनजी प्लांट स्थापित हो सका. इस प्लांट की प्रतिदिन 150 टन गोबर से 2400 किलो बायो सीएनजी गैस उत्पादन करने की क्षमता है.
उपकृत हो रही ठेका कंपनी
प्लांट स्थापित करने वाली कंपनी करीब डेढ़ साल से उपकृत हो रही है। जबसे इस प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन हुआ है, तब से अभी तक जितनी भी सीएनजी निकल रही है, उसका विक्रय कंपनी के द्वारा गुपचुप तरीके से किया जा रहा है. इस संबंध में जिम्मेदार भी यह कहते हुए पल्ला झाड़ रहे हैं कि सीएनजी उत्पादन से होने वाली आमदनी के संबंध में जानकारी ली जाएगी और स्मार्ट सिटी को क्या फायदा मिल सकता है, इस पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अभी तक ऐसी कोई कार्रवाई ठेका कंपनी पर होती नजर नहीं आ रही है.
पंप तक नहीं पहुंचाई जा रही सीएनजी
सीएनजी उत्पादित कर रही ठेका कंपनी ने सांची दुग्ध संघ परियट गेट के निकट पंप तैयार कराया था, जिससे सीएनजी का विक्रय किया जाना था, लेकिन प्लांट से उत्पादित गैस पंप तक पहुंचाई ही नहीं जा रही है. गुपचुप तरीके से उसका विक्रय कर मुनाफा कमाने में ठेका कंपनी जुटी हुई है.
बायो सीएनजी प्लांट एक नजर में
- उत्पादित गैस में मीथेन गैस 96 प्रतिशत प्योरिटी में पाई गई है. इससे न केवल कैलोरिफिक वैल्यू अच्छी होती है, बल्कि बायो सीएनजी की इफेक्टिवनेस भी बढ़ती है.
- बायो सीएनजी प्लांट 100 प्रतिशत गीले वेस्ट से संचालित हो रहा है.
- बायो सीएनजी प्लांट से 2400 केजी गैस प्रतिदिन उत्पादित हो रही है.
- सांची का बॉयलर इसी गैस से चलाने का प्लॉन था, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वायु की गुणवत्ता में सुधार लाना था.
- इस प्लांट में गीले कचरे (घरेलू जैविक कचरे) को उपचारित किया किए जाने की क्षमता है, जिससे बायो सीएनजी गैस तथा उच्च गुणवत्ता की आर्गेनिक कम्पोस्ट का उत्पादन किया जा रहा है.
- इस प्लांट से उत्पन्न होने वाली बायो सीएनजी से उद्योग एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को विक्रय की जा रही है, लेकिन उसका हिसाब-किताब स्मार्ट सिटी को नहीं बताया जा रहा है.

