एमपी जबलपुर बस स्टैण्ड के एंट्री पॉइंट पर खुल गए गैराज, सड़क किनारे कचरे का लगा है अंबार, साफ-सफाई के नाम पर दिखावा कर रहे अधिकारी
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
ISBT Jabalpur News: दीनदयाल चौक स्थित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है? इस पर जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं. कोई कुछ भी बोलने से परहेज कर रहा है, जबकि इस बस स्टैण्ड के एंट्री पॉइंट से लेकर अंदर चप्पे-चप्पे पर अराजक स्थिति देखने को मिल रही है. दूर से आने वाली बसों को अंदर जाने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है और जो बसें बाहर जाने के लिए निकलती हैं, वे दीनदयाल चौक पर घंटों जाम में फंस जाती हैं. इतना ही नहीं बस स्टैण्ड के बाहर निकलने वाले जितने भी एग्जिट पॉइंट हैं, जब से बस स्टैण्ड बना है, तभी से उन्हें बंद करके रखा गया है. उन सभी एग्जिट पॉइंट पर गैराज संचालित हैं, वाहनों की धुलाई हो रही है. इतना ही नहीं बस स्टैण्ड के चारों तरफ बसों का सुधार करने वाले मैकेनिक ठीहा जमाए बैठे हैं. आईएसबीटी के इस अराजक माहौल को ठीक करने वाले जिम्मेदार गायब रहते हैं. इससे साफ जाहिर हो रहा है कि आईएसबीटी का धनीधोरी कोई नहीं है. पूरा आईएसबीटी भगवान भरोसे चल रहा है.
साफ-सफाई करने के बाद सड़क किनारे फेंका जा रहा कचरा
आईएसबीटी में स्वच्छता के मापदण्डों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. जिस आधुनिक बस अड्डे में 24 घंटे सातों दिन साफ-सफाई और स्वच्छ वातावरण होना चाहिए, वहां झाड़ू कभी कभार ही लगती है और यदि लगाई भी जाती होगी तो उसका कचरा बस स्टैण्ड के अंदर वाली सड़क के किनारे फेंक दिया जाता है. जब भी तेज हवा चलती है, वही कचरा बस स्टैण्ड के अंदर तक दोबारा पहुंच जाता है. अब सवाल यह उठता है कि बस स्टैण्ड के नजदीक कठौंदा प्लांट है, जब बस स्टैण्ड का कचरा कठौंदा तक नहीं पहुंच पा रहा है तो फिर शहर के कचरे का निस्तारण कैसे किया जाता होगा? इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.
पुलिस चौकी और कन्ट्रोल रूम की दुर्दशा
बस स्टैण्ड में सुरक्षा के लिहाज से अलग से पुलिस चौकी और बसों की निगरानी के लिए कन्ट्रोल रूम का निर्माण कराया गया था, लेकिन बस स्टैण्ड की पुलिस चौकी पर अराजक तत्वों का जमावड़ा रहता है और अब पुलिस चौकी के हालात इतने बद्तर हो चुके हैं कि कोई पुलिसकर्मी चाहते हुए भी उसमें बैठना पसंद नहीं करेगा. आखिरकार टैक्स रूप में जमा होने वाली जनता की गाढ़ी कमाई से हुए निर्माण की दुर्दशा के पीछे किसका हाथ है? यह जांच का विषय है, क्योंकि बस स्टैण्ड के निर्माण पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे. रखरखाव में भी पैसा लगातार खर्च किया जा रहा है.
रंगत उड़ी, चाहे जहां हो रहा कब्जा
जबलपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) द्वारा 25 एकड़ में आधुनिक बस अड्डा तैयार कराया गया, जिसका उद्घाटन 2016 में किया गया था. तब से आज तक इस बस स्टैण्ड में रंग-रोगन नहीं कराया गया, बस स्टैण्ड की रंगत उड़ चुकी है. इतने लंबे अंतराल में हजारों बसों का आवागमन हो चुका होगा, जिनसे जबलपुर सिटी ट्रांसपोर्ट लिमिटेड द्वारा वसूली भी हुई होगी. वसूली गई राशि इस बस स्टैण्ड के रंग-रोगन में क्यों खर्च नहीं की जा रही है? यह समझ से परे है. जबकि बस स्टैण्ड में एमपी, यूपी, महाराष्ट्र तक के यात्रियों का आना जाना होता है.
इन बस रूट के यात्रियों का होता है आना-जाना
आईएसबीटी में भोपाल, इंदौर, नागपुर, रीवा और रायपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, सागर, कटनी, सतना, सीधी, सिंगरौली, नरसिंहपुर, सिवनी जैसे प्रमुख शहरों से बसों की आवाजाही होती है. यहां पर इन बसों के लिए न तो पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था है और न ही फूड स्टॉल की ठीकठाक सुविधा है. यात्रियों को रुकने के लिए भी भटकना पड़ रहा है.
धुलाई सेंटर के रूप में तब्दील होता जा रहा बस स्टैण्ड
आईएसबीटी के चारों तरफ गंदगी और गैराज खोलते जा रहे हैं और आईएसबीटी के चारों तरफ धुलाई सेंटर खोले गए हैं, जहां बसों की धुलाई की जा रही है. गंदगी के बीच बसों की धुलाई का पानी फैलने से मच्छर पनप रहे हैं. यात्रियों के बैठना मुश्किल हाे रहा है. दूर-दराज से आने वाले यात्री भी बस स्टैण्ड की गंदगी देखकर आईएसबीटी के अंदर जाने से कतरा रहे हैं.

