ज्येष्ठ महीने में अधिकमास होने से इस बार 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं. इन दिनों श्रीराम का हनुमान जी से मिलन की मान्यता है, जिसके कारण ज्येष्ठ का हर मंगलवार बहुत खास है.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Bada Mangal 2026 Date: बाल्मीकि रामायण में कथा आती है कि भगवान श्रीराम ने लक्ष्मणजी और हनुमान जी को उपहार दिया है. यह उपहार कोई विशेष वस्तु नहीं, बल्कि आलिंगन का उपहार दिया है. ऐसी मान्यता है कि लक्ष्मण जी ने भगवान श्रीराम को रहने के लिए कुटिया बनाई थी, उस दौरान भगवान राम ने कहा था कि लक्ष्मण आज तुमने बहुत बड़ा काम किया है. लक्ष्मण जी ने कहा कि मैं कौन सा काम कर दिया? भगवान ने कहा कि किसी का उजड़ा घर बसा देना, इससे बड़ा कोई कार्य हो ही नहीं सकता है. आओ मेरे पास, आज तुम्हे परमप्रिय चीज उपहार रूप में देते हैं. मेरे पास आओ, लक्ष्मण जी जैसे ही श्रीराम के पास गए, भगवान ने लक्ष्मण जी को हृदय से चिपका लिया है. “परिष्वड.गो मया कृत:।“ मेरे आलिंगन से बढ़कर मेरे पास कुछ नहीं है. तेरे कार्य के बदले आज मैं लक्ष्मण तुझे आलिंगन देता हूं और यही बात भगवान श्रीराम ने हनुमान जी से कहा है.
“एष सर्वस्वभूतस्तु परिष्वड. गो हनूमत:।।‘’ वा. रा. 5/ 1 /13
यहां जो परिष्वंड.ग है, आलिंगन है यह हमारा सर्वस्व है। हनुमान मैं अपना सर्वस्व परिष्वंड.ग तुम्हे प्रदान करता हूं. ये परिष्वंड.ग भगवान ने हनुमान जी को दिया. क्योंकि लक्ष्मण जी ने भगवान को कुटिया बनाकर दिया और हनुमान जी ने भगवान के रहने के लिए अपने हृदय को ही कुटिया बना दिया.
“बन्दहु पवन खल बल पावक ज्ञानघन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धरि।।“
हनुमान जी ने कहा कि लक्ष्मण ने प्रभु के लिए घर बनाया तो प्रभु उन्हें पररिष्वंड.ग दिया तो हम अपने हृदय को ही प्रभु का घर बना देते हैं.
हनुमान जी का यही प्रेम भगवान के प्रति समर्पण, श्रद्धा और सेवा का प्रतीक माना गया है. जेष्ठ माह में अधिक मास भी लग रहे हैं. यह अस्थाई महीना माना जाता है. यह माह मलिन होता है. इस माह सच्ची भक्ति और दान करने से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है. इन दिनों पड़ने वाले मंगलवार बड़े मंगलवार के रूप में जाने जाते हैं. जेष्ठ माह पर पड़ने वाले मंगलवार के दिन हनुमान जी की साधनाख् पूजा करने से सभी मनोवाच्छित फलों की प्राप्ति होती है.
जेष्ठ माह में कितने पड़ रहे मंगलवार?
ज्येष्ठ माह 2 मई से प्रारंभ हो रहे हैं और 29 जून तक रहेगा, जो इस साल 2026 में खास है क्योंकि 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) भी है. 2 मई से 29 जून के बीच कुल 8 मंगलवार पड़ रहे हैं. ज्येष्ठ महीने का हर मंगलवार बड़ा मंगल कहलाता है. बड़ा मंगल केवल एक व्रत या पर्व नहीं, बल्कि सेवा, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है.
बड़ा मंगल कब-कब है ?
- पहला बड़ा मंगल 5 मई 2026
- दूसर बड़ा मंगल 12 मई 2026
- तीसरा बड़ा मंगल 19 मई 2026
- चौथा बड़ा मंगल 26 मई 2026
- पांचवां बड़ा मंगल 2 जून 2026
- छठा बड़ा मंगल 9 जून 2026
- सातवां बड़ा मंगल 16 जून 2026
- आठवां बड़ा मंगल 23 जून 2026
बड़ा मंगल मनाने की परंपरा
- हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाया जाता है.
- बूंदी या बेसन के लड्डू बनाकर भोग लगाने की परंपरा है.
- हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया जाता है.
- जरूरतमंदों को भोजन और पानी का वितरण किया जाता है.
बड़ा मंगल दान और व्रत करने के लाभ
धार्मिक मान्यता यह भी है कि ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में किसी को आश्रय देना पुण्यदायी माना गया है. इन दिनों हनुमान जी की पूजा, सेवा और भंडारा करना “राम सेवा” के समान फल देने वाला है. यही कारण है कि इस दिन जल सेवा, दान और प्रसाद वितरण का विशेष महत्व है.
हनुमान जी की पूजा करने से लाभ
- संकटों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है.
- शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.
- रोग और भय दूर होते हैं.
- धन, बल और बुद्धि में वृद्धि होती है.
हनुमान जी ने सीता माता का दिया था संदेश
श्रीरामचरित मानस में कथा आती है कि जब प्रभु श्रीराम माता सीता की तलाश में वन में भटक रहे थे, तो हनुमान जी पहली बार हनुमान जी से मिले थे. हनुमान जी और प्रभु श्रीराम का मिलन पहली बार ज्येष्ठ माह के मंगलवार को हुआ था, इसलिए इस ज्येष्ठ माह के मंगलवार को बड़ा या बुढ़वा मंगलवार के नाम से जाना जाता है. इसके बाद कथा आती है कि हनुमान जी ने भगवती सीता का समाचार सुनाया तो भगवान अति प्रसन्न हुए और उन्हें आलिंगन कर लिया.
हनुमान जी की पूजा करते समय रखें इन नियमों का ध्यान-
- हनुमान जी की पूजा प्रातः जल्दी उठकर करनी चाहिए या फिर संध्या के समय पूजन करें.
- हनुमान जी की पूजा में लाल रंग के फूल ही अर्पित करना चाहिए.
- हनुमान जी के समक्ष जो दीप जलायें उसमें लाल सूत की बाती डालनी चाहिए.
- हनुमान साधना में शुद्धता एवं सात्विकता का विषेष ध्यान रखें.
- हनुमान जी का पूजन करने से पहले घर, पूजा स्थल और स्वयं की भली-भांति साफ-सफाई कर लेनी चाहिए.
- हनुमान जी की साधना के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना अति आवश्यक है.
- महिलाओं को स्वयं हनुमान जी को चोला अर्पित नहीं करना चाहिए. किसी पुरुष या पुजारी से यह कार्य करवाया जा सकता है.
- मंगलवार के दिन भूलकर भी मांस, मदिरा या किसी भी तरह तामसिक गुणों वाली चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए.
- हनुमान जी की पूजा करते समय उनको चरणामृत से स्नान नहीं करवाना चाहिए, क्योंकि उनकी पूजा में चरणामृत चढ़ाने का विधान नहीं है.
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