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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि यह मोदी की हार है। उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।
नई दिल्ली. लोकसभा की 543 में से 542 सीटों पर काउंटिंग जारी है। रुझानों में भाजपा बहुमत से दूर है। उसे 64 से ज्यादा सीटों का नुकसान दिख रहा है। 2019 में पार्टी को 303 सीटें मिली थीं। हालांकि, NDA की सरकार बनती दिख रही है। रुझानों में NDA 291 और I.N.D.I.A. 234 सीटों पर आगे है। रुझानों में उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में NDA को नुकसान हुआ।
इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट के अनुसार, शाम 7 बजे तक भाजपा को 239, कांग्रेस को 99, सपा को 38, टीएमसी को 29, डीएमके को 21, टीडीपी को 16, जेडीयू को 15, शिवसेना यूटीबी को 9, एनसीपी शरद पवार को 7, राजद को 4 और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास को 5, शिवसेना शिंदे को 7 सीटें मिलती दिख रही हैं।
चुनाव आयोग ने 16 मार्च को लोकसभा चुनाव कार्यक्रम का ऐलान किया था। कुल 7 फेज में 19 अप्रैल से 1 जून तक वोटिंग हुई। 1952 के बाद 44 दिन का यह चुनाव सबसे लंबा रहा। 1952 में यह 4 महीने चला था। इन 2 मौकों के अलावा चुनाव की प्रोसेस अमूमन 30 से 40 दिन में पूरी हो जाती थी।
एक बाार फिर ममता चर्चा में
“ममता लगातार चौथी बार राज्य में सरकार बनाने की कोशिश में जुटी हैं. लेकिन उनके सामने क़ानून-व्यवस्था, बेरोज़गारी और विकास से जुड़े सवाल हैं, जिनका जवाब उन्हें देना पड़ेगा.”
“दूसरी चुनौती एसआईआर है. यह ममता बनर्जी के लिए नकारात्मक और सकारात्मक…दोनों तरह से असर डाल सकता है. ममता ने इसके ख़िलाफ़ सड़क से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी है, जिससे उनकी एक मज़बूत नेता की छवि बनती है और उनके समर्थकों को एकजुट होने का संदेश भी जाता है.”
एक साथ टिकट बंटवारा किया
पंश्चिम बंगाल के चुनाव की घोषणा हो चुकी है और अप्रैल माह में पूरे दिन चुनावी प्रक्रिया चलेगी. उसके बाद 4 मई को रिजल्ट घोषित होगा. इसके लिए ताबड़तोड़ फैसले लिए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी लगातार चुनावी दौरे पर हैं और ममता बैनर्जी को टार्गेट कर रहे हैं. उन्हें बंगाल से हटाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं. वहीं ममता बनर्जी भी ऐतिहासिक फैसला लेते हुए एक साथ अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा कर रही है. जिसके कारण वह एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं. यह पहली बार है कि पार्टी एक साथ कई विधायकों का टिकट काटते हुए उम्मीदवारों का ऐलान किया है.
2 चरण में हो जाएंगे चुनाव
पश्चिम बंगाल के चुनाव अमूनन 8 चरणों में हुआ करते थे. लेकिन अबकी बार 2 चरणों में चुनाव होने हैं. चुनाव की प्रक्रिया लगभग प्रारंभ हो चुकी है और सभी प्रत्याशी जोर आाजमाइश में लग गए हैं. अब देखना यह है कि किसका पड़ला भारी होता है. विगत दिनों जब मोदी की सीट संख्या में कमी आई थी तो ममता ने इस्तीफे की मांग की थी. यदि इस बार ममता अपना परचम नहीं लहरा पाती हैं तो क्या होगा? यह देखना दिलचस्प होगा.
2011 में पहली बार ममता ने मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला
साल 2011 में जब उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला तो न केवल उनके विरोधियों, बल्कि कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने भी उनके शासन चलाने की क्षमता को लेकर शंका ज़ाहिर की थी. उनकी राजनीतिक परिपक्वता को लेकर भी संशय जताया गया.
लेकिन बीते पंद्रह सालों में इन शंकाओं और सवालों का जवाब ख़ुद बंगाल की राजनीति ने ही दे दिया.
ममता बनर्जी एक नहीं लगातार तीन बार राज्य की मुख्यमंत्री चुनी गईं. और अब जब पश्चिम बंगाल एक बार फिर विधानसभा चुनाव की दहलीज़ पर खड़ा है, ममता बनर्जी चौथी बार तृणमूल कांग्रेस का चेहरा बनकर चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं.
ऐसे में ममता अगर अपनी पार्टी को फिर से जीत दिलाती हैं, तो वह पश्चिम बंगाल की पहली ऐसी मुख्यमंत्री बन सकती हैं, जिन्होंने लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीतकर इतिहास बनाया हो.
लेकिन क्या इतिहास रचना उनके लिए इतना आसान होगा? 2026 का यह चुनाव कई मायनों में ममता बनर्जी के लिए अब तक की सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा भी साबित हो सकता है.
ऐसे में सवाल उठता है कि इस चुनाव में उनके सामने कौन-कौन सी राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हैं और क्या वह इनसे पार पा पाएंगी?

