मुकुंदपुर मैहर जिला अंतर्गत महाराजा मार्तण्ड सिंह व्हाइट टाइगर सफारी का होगा विस्तार, टाइगर सफारी के द्वितीय चरण के विस्तार में नई सफारी स्थापित की जायेगी।
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Maharaja Martand Singh Zoo Dev Safari Mukundpur ::रीवा. महाराजा मार्तण्ड सिंह व्हाइट टाइगर सफारी एवं रेशक्यू सेंटर का विस्तार किया जायेगा। टाइगर सफारी के द्वितीय चरण के विस्तार में नई सफारी स्थापित की जायेगी। जिसमें यलो टाइगर, लायन एवं जेब्रा प्रजाति के जानवरों की सफारी होगी। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने वन विभाग के अधिकारियों को टाइगर सफारी के विस्तारीकरण के लिये आगामी 20 वर्ष की प्लानिंग कर मास्टर प्लान तैयार करने के साथ उक्त प्लॉन को शासन स्तर से स्वीकृत कराने के निर्देश दिये। जयंती कुंज रीवा के रेस्ट हाउस में वन विभाग के अधिकारियों की बैठक में उप मुख्यमंत्री ने मैहर जिला के अंतर्गत मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी के द्वितीय चरण के विस्तार कार्य की जानकारी ली तथा बनाये जाने वाले सफारी व जू के प्रस्तावित कार्ययोजना का अवलोकन किया।
खजुराहो को पर्यटन मार्ग में शामिल किया जाएगा
उप मुख्यमंत्री ने मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी को बनारस से खजुराहों पर्यटन मार्ग में शामिल कराने के निर्देश दिये इससे इस मार्ग के पर्यटक सफारी का भी भ्रमण करें। उप मुख्यमंत्री ने सतना जिले के बगदरा घाटी में डीएमएफ मद से बनायी जा रही गौशाला में पानी, चारा, भूसा की व्यवस्था सुनिश्चित रखने के निर्देश वन विभाग के अधिकारियों को दिये।
1951 को सीधी जिले से से पकड़ा था बाघ
मुकुन्दपुर सफेद बाघ सफारी सफेद बाघ को महाराजा मार्तंड सिंह ने 1951 को सीधी जिले से पकड़ा था. बाद में बाघ को रीवा के गोविंदगढ़ पैलेस में लाया गया, जहाँ से वह अगले दिन भाग निकला और फिर रीवा से लगभग 27 किमी दूर मुकुंदपुर क्षेत्र में पाया गया। तब मोहन दो दशकों तक इस क्षेत्र में रहा और इसकी संतानें धीरे-धीरे दुनिया के अन्य हिस्सों में फैल गईं। बताया जा रहा है कि रीवा राजघराने के राजा मार्तंड सिंह शिकार कर कर रहे थे जब वे शिकार के लिए गए थे तब उन्हें नौ महीने का एक शावक मिला था। उन्होंने उसका शिकार करने के लिए बंदूक तान ही दी थी कि तभी उन्हें दिखा कि टाइगर की आंख में आंसू हैं। आंसू देखकर उन्होंने इसका शिकार करने की बजाए इसे पालने का निर्णय लिया। उन्होंने बाघ का नाम मोहन रखा था।
मोहन ने दिया था 34 संतानों को जन्म
किवंदतियों से पता चला कि राजा ने मोहन के साथ महल में एक बाघिन को भी रखा था। उसका नाम राधा रखा गया था। इसके बाद इनके प्रजनन की शुरूआत हुई। अलग-अलग बाघिन से प्रजनन में मोहन से 34 संतानों का जन्म हुआ। इनके कुनबे में 114 बाघ हुए, जो अब तक के वर्ल्ड रिकॉर्ड बताए जा रहे हैं। 1959 में पहली बार कोलकाता के पीके दास ने तीन बाघों को खरीदा था। तब यह मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया था।
मुकुन्दपुर व्हाइट टाइगर सफारी के नाम से जाना जाता है यह क्षेत्र
अब यह मुकुन्दपुर व्हाइट टाइगर सफारी के नाम से जाना जाता है। जो कि मैहर जिले के अमरपाटन तह्सील के ताला अंतर्गत स्थित ग्राम मुकुन्द्पुर मे आता है । रीवा के पास बने व्हाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर को विश्व की पहली व्हाइट टाइगर सफारी का दर्जा मिला। मुकुंदपुर में करीब 640 हेक्टेयर में मांद रिजर्व बनाया गया है। इसमें से 75 हेक्टेयर में चिड़ियाघर और 25 हेक्टेयर में व्हाइट टाइगर सफारी है। इसमें जू एंड रेस्क्यू सेंटर, ब्रीडिंग सेंटर भी बनाए गए हैं। यहां इस समय तीन सफेद बाघ, दो बंगाल टाइगर और कुछ भालू हैं, जिनका दीदार करने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। वन्य प्राणी को पिंजरों में नहीं रखा गया है, बल्कि खुले बाड़े में रखा गया है।
मुकुन्दपुर व्हाइट टाइगर सफारी आने का रूट
ट्रेन मार्ग- यहां आने के लिए मुख्य रूप से ट्रेन मार्ग आसान है। आम तौर पर सभी ट्रेनों का स्टॉपेज मैहर, सतना और रीवा स्टेशन है। यहां आने के बाद सड़क मार्ग से व्हाइट टाइगर सफारी तक पहुंचा जा सकता है। रेलवे स्टेशन जंक्शन – सतना स्टेशन से मैहर स्टेशन की दूरी 36 किलोमीटर है मैहर स्टेशन से कटनी स्टेशन की दूरी 55 किलोमीटर है।
सड़क मार्ग- एनएच-34 मैहर होते हुए रीवा शहर तक जाता है। यहां से सीधे व्हाइट टाइगर सफरी मुकुंदपुर पहुंचा जा सकता है।
एयरपोर्ट सुविधा- रीवा और सतना में नए एयरपोर्ट बनाए गए हैं। यहां आने के बाद सड़क मार्ग से व्हाइट टाइगर सफारी का दीदार किया जा सकता है। हवाई अड्डों से आप ट्रेन, बस या टैक्सी से आसानी से मैहर तक पहुंच सकते हैं। जबलपुर से मैहर दूरी 150 किलोमीटर खजुराहो से मैहर दूरी 130 किलोमीटर इलाहाबाद से मैहर दूरी 200 किलोमीटर है। वहीं निकटतम रीवा एअरपोर्ट की दूरी 55 km हैं।

