महाराष्ट्र में चुनावी नतीजे आने के बाद छह दिन बीत जाने के बाद भी सरकार गठन की तस्वीर साफ हो रही है. दिल्ली में गुरुवार को अमित शाह के साथ तीनों नेताओं की बैठक हुई.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Maharashtra CM News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार रात भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन के तीनों राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात हुई. इस दौरान उन्होंने राज्य में सत्ता के बंटवारे पर चर्चा की. उन्होंने गठबंधन में शामिल तीनों दलों के बीच कैबिनेट सीटों के बंटवारे के अहम फॉर्मूले पर भी चर्चा की.
देवेंद्र फडणवीस को मना जा रहा मुख्यमंत्री पद का सबसे प्रबल दावेदार
देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है. महाराष्ट्र में 288-सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में महायुति गठबंधन ने 230 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी. महायुति गठबंधन में भाजपा, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) शामिल हैं.
बीजेपी के पास रहेगा मुख्यमंत्री पद
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री का पद भाजपा के पास रहेगा, लेकिन माना जा रहा है कि अमित शाह ने दो उपमुख्यमंत्रियों के नाम पर भी सहमति दे दी है, जिनमें से प्रत्येक सहयोगी दल शिवसेना और एनसीपी से एक-एक उपमुख्यमंत्री होगा.
वित्त विभाग एनसीपी के पास जाने की उम्मीद
उम्मीद है कि भाजपा शनिवार को मुंबई में विधायकों की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए अपना नेता चुनेगी. अगर देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो गृह विभाग उनके पास रहने की संभावना है, जबकि वित्त विभाग एनसीपी के पास जाने की उम्मीद है. भाजपा नेताओं के अनुसार, शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को यूडीडी और पीडब्ल्यूडी मिलने की उम्मीद है. दिल्ली स्थित अपने आवास पर अमित शाह की अध्यक्षता में दो घंटे तक चली बैठक आधी रात को समाप्त हुई.
शीर्ष नेताओं से मुलाकात के बाद अक्सर ये चीजें हो सकती हैं
पहला, अगर सरकार गठन या समर्थन का मुद्दा चल रहा हो, तो यह मुलाकात बातचीत को आगे बढ़ाने या अंतिम सहमति बनाने का हिस्सा हो सकती है.
दूसरा, अगर पहले से कोई गठबंधन सरकार है, तो यह बैठक मंत्रिमंडल विस्तार, विभागों के बंटवारे या अंदरूनी मतभेद सुलझाने से जुड़ी हो सकती है.
तीसरा, कभी-कभी ऐसी बैठकों को राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जाता है—जिसमें अगले चुनाव, नेतृत्व परिवर्तन या संगठनात्मक बदलाव पर चर्चा हो सकती है.
लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि सिर्फ बैठक होने से “फेरबदल तय” नहीं माना जा सकता. असली संकेत तब मिलते हैं जब विधायकों की संख्या में बदलाव हो, गठबंधन में औपचारिक घोषणा हो, या फिर सरकार-पार्टी की ओर से आधिकारिक बयान आएं.
देवेन्द्र को सीएम बनाने की प्रमुख वजह
संगठन और नेतृत्व क्षमता
फडणवीस लंबे समय से बीजेपी के संगठन से जुड़े रहे हैं और पार्टी के भरोसेमंद चेहरे माने जाते हैं. उन्होंने महाराष्ट्र में पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है. पार्टी को एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में परचम लहराने का काम किया है.
प्रशासनिक अनुभव
महाराष्ट्र वे पहले भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इसलिए सरकार चलाने का अनुभव उनके पक्ष में एक बड़ा कारण रहा. संकट प्रबंधन और प्रशासनिक निर्णय लेने में उनकी छवि एक “स्थिर नेता” की रही है.उनके द्वारा किए गए कार्य भी सराहनीय रहे हैं, जिसके कारण जनता के बीच उनकी छवि भी अच्छी बनी हुई है.
गठबंधन राजनीति में स्वीकार्यता
Maharashtra की राजनीति अक्सर गठबंधन पर आधारित रही है. ऐसे में ऐसा चेहरा चाहिए होता है जो सहयोगी दलों के साथ तालमेल बना सके. इनमें वह काबीलियत है कि महाराष्ट्र के अन्य दल के नेताओं से तालमेल बैठाकर सरकार ठीक ढंग से चला सकते हैं.
बीजेपी की रणनीतिक पसंद
पार्टी नेतृत्व (केंद्र में Amit Shah जैसे नेताओं की रणनीतिक भूमिका) अक्सर ऐसे नेता को आगे बढ़ाता है जो चुनावी सफलता और सरकार दोनों संभाल सके. इसमें देवेन्द्र फडवीस माहिर हैं और उन्होंने इससे पहले साबित भी कर चुके हैं.
चुनावी प्रदर्शन और जनछवि
फडणवीस को एक “विकास-उन्मुख” और अपेक्षाकृत कम विवादित चेहरे के रूप में पेश किया गया, जिससे शहरी और मध्यम वर्ग में उनकी स्वीकार्यता बढ़ी.
राजनीतिक संतुलन (जातीय और क्षेत्रीय समीकरण)
महाराष्ट्र की राजनीति में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन भी महत्वपूर्ण होता है, और नेतृत्व चयन में यह फैक्टर भी भूमिका निभाता है.

