प्रदोष व्रत भगवान शिव को सबसे अधिक प्रिय है. इसके प्रताप से जीवन में आने वाली सारी परेशानियां दूर हो जाती है. इस साल दिसंबर 2024 में प्रदोष व्रत कब-कब है.
सोर्स- प्रडित प्रदीप मिश्रा ज्योतिषाचार्य
By : DB News Update | Edited by :प्रिंस अवस्थी
Pradosh Vrat 2024: शास्त्रों में प्रदोष व्रत भगवान शिव की महा कृपा पाने का दिन है, इस दिन पर लोग व्रत रखते हैं और भावपूर्ण पूजा-पाठ करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से शिव परिवार की कृपा प्राप्त होती है. जो प्रदोष शुक्रवार के दिन आता है उसे शुक्र प्रदोष कहते हैं.
मान्यता है कि प्रदोष व्रत पर उपवास रखने से मनचाहा वर पाने की कामना पूरी होती है, यह तिथि सुहागिन महिलाओं के लिए और भी खास मानी जाती है. कहते हैं इस व्रत के प्रताप से पति की आयु लंबी होती है, साथ ही सुख-सौभाग्य मिलता है. इस साल दिसंबर 2024 में प्रदोष व्रत कब-कब है.
दिसंबर 2024 में प्रदोष व्रत कब-कब ?
दिसंबर में शुक्र प्रदोष व्रत और शनि प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है. शुक्र प्रदोष व्रत करने से दरिद्रता का नाश होता है. शादीशुदा जिंदगी बेहतर रहती है और भाग्य अच्छा होता है. मान्यता है कि शनि प्रदोष रखने से संतान प्राप्त होती है, मानसिक परेशानियों से छुटकारा मिलता है, और शनि संबन्धी दोष दूर होते हैं.
दिसंबर 2024 पहला प्रदोष व्रत
दिसंबर का पहला प्रदोष व्रत 13 दिसंबर 2024 को है. इस दिन शुक्रवार होने से ये शुक्र प्रदोष व्रत होगा.
मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी तिथि शुरू – 12 दिसंबर 2024, रात 10.26
मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी तिथि समाप्त – 13 दिसंबर 2024, रात 09.40
प्रदोष काल मुहूर्त – शाम 05.26 – रात 07.40
दिसंबर 2024 दूसरा प्रदोष व्रत
दिसंबर का दूसरा प्रदोष व्रत 28 दिसंबर 2024 को है. इस दिन शनिवार होने से ये शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा.
पौष कृष्ण त्रयोदशी तिथि शुरू – 28 दिसंबर 2024, प्रात: 02.26
पौष कृष्ण त्रयोदशी तिथि समाप्त – 29 दिसंबर 2024, प्रात: 3.32
प्रदोष काल मुहूर्त – शाम 05.33 – रात 08.17
क्यों प्रिय है यह व्रत?
मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं. इस समय पूजा करने से पापों का नाश और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. यह व्रत स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति देता है.
व्रत की विशेषताएँ
- दिनभर उपवास रखकर शाम को शिव पूजा की जाती है.
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित किए जाते हैं.
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप विशेष फलदायी माना जाता है.
आध्यात्मिक महत्व
प्रदोष व्रत केवल भौतिक इच्छाओं के लिए नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और भगवान शिव की कृपा पाने का एक श्रेष्ठ साधन माना जाता है.
प्रदोष व्रत कथा
हिंदू धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि प्राचीन समय में एक नगर में एक निर्धन ब्राह्मणी रहती थी. उसका एक पुत्र था. पति की मृत्यु के बाद वह बहुत कठिनाई से जीवन यापन कर रही थी. एक दिन वह अपने पुत्र के साथ भिक्षा मांगने निकली. रास्ते में उसे एक घायल राजकुमार मिला. ब्राह्मणी को उस पर दया आई और वह उसे अपने घर ले आई. धीरे-धीरे राजकुमार स्वस्थ हो गया और वहीं रहने लगा. कुछ समय बाद एक महात्मा उनके घर आए. उन्होंने ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और बताया कि यह व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. ब्राह्मणी ने श्रद्धा से व्रत करना शुरू कर दिया. वह हर त्रयोदशी को उपवास रखती, शाम के समय भगवान शिव की पूजा करती और कथा सुनती.
कुछ समय बाद उस राजकुमार को अपने राज्य के बारे में पता चला कि उसका राज्य शत्रुओं ने छीन लिया है. ब्राह्मणी के पुत्र और राजकुमार ने मिलकर युद्ध किया और भगवान शिव की कृपा से अपना राज्य वापस पा लिया. राजकुमार राजा बना और उसने ब्राह्मणी तथा उसके पुत्र को सम्मान दिया. ब्राह्मणी का जीवन सुख-समृद्धि से भर गया.
प्रदोष कथा के माध्यम से संदेश
भगवान शिव की भक्ति और श्रद्धा से हर संकट दूर होता है. प्रदोष व्रत करने से दुख, दरिद्रता और बाधाएँ समाप्त होती हैं. सच्चे मन से किया गया व्रत अवश्य फल देता है.
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